TRAI on Truecaller Tag: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने ट्रूकॉलर को 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स पर दिखाए जा रहे “Frequently Blocked” टैग को हटाने का निर्देश दिया है। ट्राई का कहना है कि इस तरह के लेबल ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं और जरूरी बैंकिंग, सरकारी और सर्विस कॉल्स पर अविश्वास पैदा कर सकते हैं।
नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने कॉलर आइडेंटिफिकेशन ऐप ट्रूकॉलर (Truecaller) द्वारा कुछ आधिकारिक नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स पर लगाए जा रहे “Frequently Blocked” टैग पर आपत्ति जताई है। नियामक ने कंपनी से खासतौर पर 1600 सीरीज के नंबरों से यह लेबल हटाने को कहा है।
ट्राई के अनुसार, रेगुलेटेड नंबर सीरीज को “Frequently Blocked” जैसे टैग के साथ दिखाने से मोबाइल यूजर्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे ग्राहकों को जरूरी कमर्शियल, बैंकिंग और सरकारी कॉल्स को लेकर संदेह हो सकता है।
1600 नंबर सीरीज क्यों है खास?
ट्राई ने 1600 सीरीज को विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर की सर्विस और ट्रांजैक्शनल कॉल्स के लिए निर्धारित किया है।
इस सीरीज का इस्तेमाल उन संस्थानों द्वारा किया जाता है जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) जैसे नियामकों के दायरे में आते हैं।
इसके अलावा, सरकार और नागरिकों के बीच जरूरी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए भी इस नंबर सीरीज का इस्तेमाल किया जाता है।
ट्राई के अधिकारी ने कहा कि इन नंबरों को इस तरह मार्क नहीं किया जाना चाहिए जिससे ग्राहक कॉल उठाने से बचें। ऐसी कॉल्स में बैंकिंग अलर्ट, ट्रांजैक्शन वेरिफिकेशन, फ्रॉड चेतावनी और सरकारी सूचनाएं शामिल हो सकती हैं।
140 सीरीज के लिए भी ट्राई ने दी सलाह
ट्राई ने 140 नंबर सीरीज के इस्तेमाल को प्रमोशनल कॉल्स के लिए निर्धारित किया है। इस सीरीज का उपयोग अलग-अलग क्षेत्रों की रजिस्टर्ड कंपनियां अपने मार्केटिंग और प्रमोशनल कम्युनिकेशन के लिए करती हैं।
हालांकि, ट्राई का कहना है कि किसी नंबर को केवल ब्लॉक किए जाने की संख्या के आधार पर लेबल करना सही तरीका नहीं है। इसके बजाय ग्राहकों को डीएनडी (Do Not Disturb) सिस्टम के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
Truecaller को दिखाना होगा DND ऐप का विकल्प
ट्राई ने ट्रूकॉलर को सुझाव दिया है कि वह यूजर्स को एक मैसेज के जरिए बताए कि वे ट्राई के आधिकारिक डीएनडी प्रेफरेंस मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से अनचाहे प्रमोशनल कॉल्स को नियंत्रित कर सकते हैं।
नियामक का मानना है कि नंबरों को नकारात्मक टैग देने के बजाय ग्राहकों को अपने कम्युनिकेशन विकल्पों को मैनेज करने की सुविधा और जानकारी देना ज्यादा प्रभावी समाधान है।
Truecaller ने स्पैम कॉल बढ़ने की जताई चिंता
वहीं, ट्रूकॉलर का कहना है कि ट्राई द्वारा डेडिकेटेड नंबर सीरीज लागू करने और कॉलर आइडेंटिफिकेशन ऐप्स को इन नंबरों के लिए कम्युनिटी रिपोर्टेड स्पैम जानकारी दिखाने से रोकने के बाद स्पैम कॉल्स में बढ़ोतरी हुई है।
कंपनी के मुताबिक, कई यूजर्स अब इन नंबरों से आने वाली कॉल्स को नजरअंदाज करने या ब्लॉक करने लगे हैं। इससे असली कंपनियों और ग्राहकों के बीच होने वाले जरूरी कम्युनिकेशन पर असर पड़ रहा है।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
ट्राई के इस कदम के बाद बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों और सरकारी संस्थानों से आने वाली जरूरी कॉल्स पर ग्राहकों का भरोसा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कम्युनिकेशन के बढ़ते दौर में स्पैम कॉल्स को रोकना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही जरूरी सेवाओं से जुड़ी कॉल्स की पहचान भी आसान होनी चाहिए।
ट्राई का उद्देश्य यही है कि ग्राहक फर्जी कॉल्स से सुरक्षित रहें और साथ ही वास्तविक बैंकिंग, सरकारी और सर्विस कॉल्स को बिना डर के रिसीव कर सकें।
(आईएएनएस)


