वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और बदलते कैपिटल फ्लो के बीच भी भारतीय इक्विटी बाजार को लेकर घरेलू फंड मैनेजरों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। इसी संदर्भ में Swarup Mohanty, जो कि Mirae Asset Mutual Fund के सीईओ और वाइस चेयरमैन हैं, ने कहा है कि वह पूरी तरह से भारतीय शेयर बाजार में निवेशित (fully invested) हैं और उनका मानना है कि मौजूदा गिरावटें और वैश्विक दबाव निवेशकों के लिए अच्छे अवसर पैदा कर रहे हैं।
ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत है, लेकिन आने वाले समय में निवेशकों को अधिक धैर्य और व्यापक पोर्टफोलियो दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत होगी।
भारत की ग्रोथ स्टोरी अब भी मजबूत, लंबी अवधि में बड़ा विस्तार संभव
मोहंती का मानना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि की दिशा अभी भी सकारात्मक है, भले ही अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हो।
उन्होंने अनुमान जताया कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में लगभग 3.5–4 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 7–8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि यह वृद्धि सीधे तौर पर कैपिटल मार्केट्स में दिखाई देगी और निवेशकों को इस विस्तार का लाभ मिलेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह सफर एक सीधी रेखा में नहीं होगा और निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच धैर्य रखना होगा।
ग्लोबल कैपिटल फ्लो में बड़ा बदलाव और सोने की बढ़ती हिस्सेदारी
मोहंती ने एक महत्वपूर्ण वैश्विक बदलाव की ओर इशारा किया। उनके अनुसार, दुनिया में अब केंद्रीय बैंकों और संप्रभु फंड्स की रिजर्व स्ट्रैटेजी बदल रही है और पहली बार दशकों बाद डॉलर की तुलना में सोने की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
यह बदलाव तुरंत डॉलर के प्रभुत्व को खत्म नहीं करता, लेकिन यह संकेत देता है कि वैश्विक पूंजी प्रवाह (global capital flows) एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश धारणा पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
मुद्रा प्रभाव से भारत की वैश्विक रैंकिंग में बदलाव
मोहंती ने कहा कि हाल के महीनों में मुद्रा (currency) प्रभाव के कारण भारत की नाममात्र जीडीपी रैंकिंग में बदलाव देखा गया है। कुछ समय पहले तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन मुद्रा प्रभाव के चलते यह रैंकिंग कुछ स्थान नीचे आ गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बदलाव मूल आर्थिक कमजोरी को नहीं दर्शाता, लेकिन यह वैश्विक निवेश धारणा पर असर डाल सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
AI को लेकर वैश्विक निवेशकों की धारणा भी एक कारण
उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी निवेशकों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंपनियों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। यह भी भारतीय बाजार में निवेश प्रवाह पर असर डाल रहा है।
इसके अलावा पिछले एक-दो वर्षों में कॉर्पोरेट अर्निंग्स में धीमापन और लिक्विडिटी आधारित बाजारों से फंड आउटफ्लो ने भी निवेश धारणा को प्रभावित किया है।
“हम पूरी तरह निवेशित हैं” – नकद होल्डिंग नहीं
मोहंती ने साफ कहा कि वर्तमान समय में उनकी रणनीति पूरी तरह निवेशित रहने की है।
उन्होंने कहा:
“हम किसी भी तरह से कैश में नहीं हैं। हम पूरी तरह निवेशित हैं।”
उनका मानना है कि ऐसे समय में जब बाजार दबाव में होता है, तब अच्छी कंपनियों को बेहतर वैल्यूएशन पर खरीदने का अवसर मिलता है।
बैंकिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा भरोसा
मोहंती ने विशेष रूप से बैंकिंग सेक्टर को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उनका मानना है कि वर्तमान में यह सेक्टर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 2,500 डॉलर से 3,500 डॉलर की ओर जाएगी, वैसे-वैसे उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव आएगा। लोग जरूरी खर्चों से हटकर डिस्क्रेशनरी (वैकल्पिक) खर्चों की ओर बढ़ेंगे, जिससे नए सेक्टरों को लाभ मिलेगा।
कैपिटल मार्केट का विस्तार और निवेश का बढ़ता दायरा
पिछले कुछ वर्षों में भारत में IPOs की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे निवेश योग्य कंपनियों का दायरा काफी बढ़ गया है।
अब बाजार केवल बड़े इंडेक्स जैसे Nifty 50 तक सीमित नहीं है, बल्कि Nifty 500 जैसे व्यापक इंडेक्स वास्तविक बाजार संरचना को दर्शा रहे हैं।
इस विस्तार ने फंड मैनेजर्स को अधिक विविध और संतुलित पोर्टफोलियो बनाने का अवसर दिया है।
जोखिम-प्रबंधित निवेश रणनीति पर जोर
मोहंती ने कहा कि वर्तमान बाजार चरण में “हीरो बनने” की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी है:
- गुणवत्ता (Quality) पर फोकस
- जोखिम प्रबंधन (Risk Management)
- और धैर्य के साथ निवेश करना
वे मौजूदा होल्डिंग्स को मजबूत करने और वैल्यूएशन सुधार के दौरान नए अवसर जोड़ने पर ध्यान दे रहे हैं।
डेट मार्केट और यील्ड आउटलुक
इक्विटी के अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में लॉन्ग टर्म डेट यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि अभी उनका फोकस इक्विटी पर ही है, लेकिन वे इस अवसर को भविष्य में कैप्चर करने की रणनीति पर भी नजर बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष: अस्थिरता के बीच भारत पर भरोसा कायम
Swarup Mohanty का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी मजबूत बनी हुई है।
हालांकि बाजार में अस्थिरता, मुद्रा प्रभाव और वैश्विक पूंजी प्रवाह में बदलाव चुनौतियां पेश कर रहे हैं, लेकिन मजबूत कंपनियों और संरचनात्मक ग्रोथ के कारण भारत अब भी एक आकर्षक निवेश गंतव्य बना हुआ है।
उनका संदेश साफ है—निवेशित रहें, गुणवत्ता पर ध्यान दें और जोखिम-प्रबंधित रणनीति अपनाएं।
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