नई दिल्ली। देश में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ताजा रिपोर्ट सामने आई है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, मई 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के बीच बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत रही। यह दर मई 2025 के 5.6 प्रतिशत के मुकाबले मामूली रूप से कम है, लेकिन अप्रैल 2026 के 5.2 प्रतिशत की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि जहां शहरी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला, वहीं ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बढ़ी है। इसके अलावा श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और रोजगार अनुपात (WPR) में गिरावट ने श्रम बाजार में मौसमी सुस्ती के संकेत दिए हैं।
गांवों में बढ़ी बेरोजगारी, शहरों में राहत
एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर अप्रैल 2026 के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.1 प्रतिशत हो गई। दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत पर आ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों के बीच आने वाले मौसमी बदलावों का असर रोजगार पर पड़ा है। वहीं शहरी क्षेत्रों में सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों की गतिविधियों में सुधार के कारण रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट
मई 2026 में देश की कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) घटकर 54.4 प्रतिशत रह गई, जबकि अप्रैल में यह 55 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि काम करने योग्य आयु वर्ग के कम लोग नौकरी की तलाश में रहे या श्रम बाजार का हिस्सा बने।
ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR 56.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 49.8 प्रतिशत रही। सालाना आधार पर भी इसमें 0.4 प्रतिशत अंक की गिरावट देखी गई है।
महिलाओं की श्रम भागीदारी भी घटी
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर मई 2026 में 32.8 प्रतिशत रही, जो मई 2025 में 33.2 प्रतिशत थी।
- ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी दर: 36.7%
- शहरी महिलाओं की भागीदारी दर: 24.8%
यह आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की रोजगार बाजार में भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है और इसमें सुधार की आवश्यकता है।
रोजगार अनुपात में भी आई कमी
रोजगार में लगी आबादी का अनुपात यानी Worker Population Ratio (WPR) मई 2026 में घटकर 51.4 प्रतिशत रह गया। अप्रैल 2026 में यह 52.2 प्रतिशत था, जबकि मई 2025 में 51.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
क्षेत्रवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
| क्षेत्र | WPR |
|---|---|
| ग्रामीण | 53.8% |
| शहरी | 46.6% |
| कुल | 51.4% |
रोजगार अनुपात में गिरावट यह दर्शाती है कि रोजगार के अवसरों में कमी आई है या श्रम बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या घटी है।
क्यों आई श्रम बाजार में नरमी?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार मई 2026 के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मौसमी सुस्ती देखने को मिली। इसका सीधा असर रोजगार और श्रम भागीदारी पर पड़ा।
मंत्रालय ने कहा कि श्रम बल में शामिल लोगों की संख्या में मामूली कमी आई, लेकिन रोजगार के अवसर उससे भी तेज गति से घटे। परिणामस्वरूप बेरोजगारों का अनुपात बढ़ गया और बेरोजगारी दर अप्रैल की तुलना में ऊपर चली गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सीजन के बीच के अंतराल और कुछ क्षेत्रों में कम आर्थिक गतिविधियों ने रोजगार पर दबाव बनाया है।
देशभर से जुटाए गए आंकड़े
पीएलएफएस सर्वेक्षण के तहत मई 2026 में देशभर के 3,73,887 लोगों से जानकारी जुटाई गई। यह सर्वेक्षण भारत में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण आधिकारिक स्रोत माना जाता है।
जनवरी 2025 से सर्वेक्षण की पद्धति में बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब रोजगार से जुड़े आंकड़े मासिक और तिमाही आधार पर जारी किए जाते हैं। इससे श्रम बाजार में होने वाले बदलावों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा रही है।
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
मई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारत का श्रम बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। शहरी क्षेत्रों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन ग्रामीण बेरोजगारी में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। महिलाओं की श्रम भागीदारी में गिरावट और रोजगार अनुपात में कमी भी नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं।
आने वाले महीनों में मानसून, कृषि गतिविधियों और औद्योगिक उत्पादन की स्थिति रोजगार बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।


