Consumer Court Complaint: आज के समय में लैपटॉप, मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारी जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में अगर कोई ग्राहक नया प्रोडक्ट खरीदने के बाद भी लगातार खराबी से परेशान रहे और कंपनी की सर्विस से समाधान न मिले, तो वह उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) का सहारा ले सकता है। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के रहने वाले विवेक भट्ट के साथ भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां खराब लैपटॉप से परेशान होकर उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए करीब ₹59,000 की राहत दिलाई।
₹49,000 में खरीदा था HP लैपटॉप
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विवेक भट्ट ने 8 सितंबर 2024 को चंडीगढ़ स्थित जेटेज कंप्यूटर ट्रेडर्स से HP कंपनी का लैपटॉप खरीदा था। यह लैपटॉप HP 15S-EQ2084AU मॉडल था, जिसकी कीमत करीब 49,000 रुपये थी। कंपनी की ओर से इस लैपटॉप पर एक साल की वारंटी भी दी गई थी।
लेकिन खरीदारी के कुछ ही महीनों बाद लैपटॉप में तकनीकी समस्याएं शुरू हो गईं। ग्राहक का कहना था कि वारंटी अवधि के दौरान ही लैपटॉप बार-बार खराब होने लगा और सामान्य काम करने में भी परेशानी आने लगी।
स्क्रीन फ्लिकरिंग और बैटरी की समस्या से परेशान हुआ ग्राहक
विवेक भट्ट के अनुसार, फरवरी 2025 के आसपास लैपटॉप की स्क्रीन में गंभीर समस्या आने लगी। स्क्रीन बार-बार झिलमिलाने (Screen Flickering) लगी। इसके अलावा बैटरी भी तेजी से खत्म होने लगी।
ग्राहक ने इस समस्या की जानकारी HP कंपनी को दी। कंपनी ने वारंटी के तहत लैपटॉप की बैटरी बदल दी, लेकिन इसके बाद भी स्क्रीन फ्लिकरिंग की समस्या खत्म नहीं हुई।
इसके बाद ग्राहक ने कई बार कंपनी से संपर्क किया और ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायतों के अनुसार, उन्होंने 16 मई, 26 मई, 28 मई, 4 जून और 29 जुलाई 2025 को सर्विस रिक्वेस्ट दर्ज की।
टेक्निशियन ने बताया मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट
लैपटॉप की समस्या लगातार बनी रहने के बाद कंपनी के टेक्निशियन ने जांच की। अंतिम सर्विस विजिट के दौरान टेक्निशियन ने कथित तौर पर बताया कि लैपटॉप में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (Manufacturing Defect) है।
टेक्निशियन के अनुसार, यह खराबी सामान्य रिपेयर से ठीक नहीं हो सकती थी। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी से समाधान की मांग की, लेकिन संतोषजनक राहत नहीं मिलने पर उन्होंने कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Kangra District Consumer Disputes Redressal Commission) में शिकायत दर्ज कर दी।
Consumer Court ने कंपनी की सेवा में कमी मानी
मामले की सुनवाई कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद तथा नारायण ठाकुर की पीठ ने की।
सुनवाई के दौरान HP इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड शुरुआत में आयोग के सामने पेश हुई, लेकिन बाद में उसने कार्यवाही में हिस्सा लेना बंद कर दिया। इसके बाद आयोग ने कंपनी के खिलाफ एक्स-पार्टी (Ex-Parte) कार्रवाई की।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए सबूत भरोसेमंद हैं और उन्हें खारिज करने का कोई कारण नहीं है।
आयोग ने माना कि एक महंगे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट को बेचने के बाद अगर वह सामान्य उपयोग में बार-बार खराब होता है और वारंटी के दौरान कई प्रयासों के बावजूद ठीक नहीं किया जाता, तो यह सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
Consumer Court ने दिया ₹59,000 का आदेश
कंज्यूमर कोर्ट ने 2 जुलाई 2025 को इस मामले में फैसला सुनाया। आयोग ने HP इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया कि वह ग्राहक को लैपटॉप की पूरी कीमत वापस करे।
अदालत के आदेश के अनुसार:
- लैपटॉप की कीमत ₹49,000 वापस करनी होगी।
- शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक राशि पर 9% सालाना ब्याज देना होगा।
- मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए ₹5,000 का मुआवजा देना होगा।
- मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 अतिरिक्त देने होंगे।
इस तरह ग्राहक को कुल मिलाकर ₹59,000 और उस पर ब्याज मिलने का आदेश दिया गया।
खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलने पर ग्राहक के अधिकार
यह मामला उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जो महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के बाद खराबी का सामना करते हैं। अगर कोई प्रोडक्ट वारंटी के बावजूद बार-बार खराब हो रहा है और कंपनी उचित समाधान नहीं देती है, तो ग्राहक के पास उपभोक्ता कानून के तहत शिकायत करने का अधिकार होता है।
ग्राहक इन कदमों को उठा सकते हैं:
- खरीदारी की रसीद और वारंटी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- कंपनी से की गई सभी शिकायतों का रिकॉर्ड रखें।
- सर्विस सेंटर की रिपोर्ट और रिपेयर हिस्ट्री संभालकर रखें।
- समाधान नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
निष्कर्ष
HP लैपटॉप से जुड़े इस मामले में कंज्यूमर कोर्ट का फैसला यह संदेश देता है कि कंपनियां सिर्फ प्रोडक्ट बेचकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। अगर वारंटी अवधि में कोई सामान लगातार खराब होता है और ग्राहक को उचित सेवा नहीं मिलती, तो उपभोक्ता अदालत से राहत मिल सकती है।
यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।


