Consumer Court Complaint: यदि किसी पैक्ड प्रोडक्ट में पैकेट पर लिखे वजन से कम सामान निकलता है, तो ग्राहक अपने अधिकारों के तहत कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। इसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड से सामने आया है, जहां हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) को कम वजन वाला Surf Excel डिटर्जेंट बेचने के मामले में उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश मिला। हालांकि राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग के फैसले में संशोधन करते हुए मुआवजे की राशि घटा दी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर निवासी ज्ञान चंद्र गर्ग से जुड़ा है। उन्होंने सितंबर 2020 में हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) का Surf Excel EW डिटर्जेंट का एक केस 512 रुपये में खरीदा था।
जब उन्होंने पैकेट की जांच की तो पाया कि 90 ग्राम लिखे गए एक डिटर्जेंट पैक का वास्तविक वजन केवल 70 ग्राम था। यानी पैक पर लिखे वजन से 20 ग्राम कम उत्पाद मौजूद था।
ग्राहक ने पहले कंपनी और विक्रेताओं को कानूनी नोटिस भेजकर समाधान की कोशिश की, लेकिन जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission), नैनीताल का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता ने कितने मुआवजे की मांग की?
शिकायतकर्ता ने कंज्यूमर कोर्ट में 1 लाख रुपये के मुआवजे और उस पर 18 प्रतिशत ब्याज देने की मांग की थी। उनका कहना था कि कंपनी ने कम वजन वाला उत्पाद बेचकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया और मानसिक परेशानी भी हुई।
HUL ने क्या दलील दी?
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि:
- शिकायतकर्ता उपभोक्ता होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं दे पाया।
- बैच नंबर और पैकेजिंग से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
- यह मामला Consumer Protection Act के बजाय Legal Metrology Act, 2009 के तहत आता है।
- इसलिए उपभोक्ता आयोग के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है।
जिला उपभोक्ता आयोग ने क्या फैसला सुनाया?
जिला आयोग ने HUL की सभी दलीलों को खारिज कर दिया और शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी:
- मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा दे।
- 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में अदा करे।
- इसके अलावा अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) अपनाने पर 50,000 रुपये का अलग जुर्माना भी लगाया गया।
- आयोग ने शिकायतकर्ता को आगे की कार्रवाई के लिए Central Consumer Protection Authority (CCPA) से संपर्क करने की भी सलाह दी।
राज्य आयोग में HUL ने दी चुनौती
जिला आयोग के आदेश के खिलाफ HUL ने उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की।
राज्य आयोग की बेंच, जिसमें अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य बी.एस. मनराल शामिल थे, ने कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया कि मामला उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में नहीं आता।
आयोग ने कहा कि Consumer Protection Act, 2019 की धारा 100 स्पष्ट करती है कि यह कानून अन्य लागू कानूनों के अतिरिक्त है, उनके स्थान पर नहीं। इसलिए जिला आयोग को मामले की सुनवाई और फैसला देने का पूरा अधिकार था।
कोर्ट ने कम वजन को कैसे माना साबित?
सुनवाई के दौरान जिला आयोग में सीलबंद Surf Excel पैकेट को इलेक्ट्रॉनिक किचन स्केल पर तौला गया।
जांच में उसका वजन 70 ग्राम निकला, जबकि पैक पर 90 ग्राम अंकित था।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस प्रक्रिया के दौरान HUL के वकील भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने वजन मापने की प्रक्रिया पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
राज्य आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर यह साबित कर दिया कि उसे कम वजन वाला उत्पाद बेचा गया था। इसलिए कंपनी की ओर से यह स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का मामला है।
आखिरकार कितना मुआवजा मिलेगा?
हालांकि राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले को सही माना, लेकिन मुआवजे की राशि को अधिक बताते हुए उसमें संशोधन किया।
राज्य आयोग ने आदेश दिया कि:
- मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए 50,000 रुपये की जगह 40,000 रुपये दिए जाएं।
- 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में बरकरार रहेंगे।
- जिला आयोग द्वारा लगाया गया 50,000 रुपये का अलग जुर्माना रद्द कर दिया गया।
इस तरह शिकायतकर्ता को कुल 50,000 रुपये (40,000 रुपये मुआवजा + 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च) मिलेंगे।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सीख?
यह मामला बताता है कि यदि किसी पैक्ड प्रोडक्ट में घोषित मात्रा से कम वजन, गुणवत्ता में कमी या भ्रामक जानकारी मिलती है, तो उपभोक्ता अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है। खरीद की रसीद सुरक्षित रखना, उत्पाद की जांच करना और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत करना ग्राहकों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


