मैचबॉक्स शॉट्स ने अपनी नई फिल्मों और सीरीज की स्लेट का ऐलान किया है। इसी के तहत श्रीराम राघवन एक ऐसी अनटाइटल्ड थ्रिलर पर काम कर रहे हैं, जिसका अंदाज उनकी कल्ट फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ की याद दिलाएगा। खास बात यह है कि 2027 में इस फिल्म को रिलीज हुए 20 साल पूरे हो जाएंगे।
बॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर श्रीराम राघवन एक बार फिर दर्शकों को सस्पेंस और थ्रिल से भरपूर दुनिया में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रोडक्शन हाउस मैचबॉक्स शॉट्स ने अपनी आने वाली फिल्मों और सीरीज की नई स्लेट का ऐलान किया है। इसमें श्रीराम राघवन की एक अनटाइटल्ड थ्रिलर भी शामिल है, जिसे उनकी चर्चित फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ के अंदाज में विकसित किया जा रहा है।
साल 2007 में रिलीज हुई ‘जॉनी गद्दार’ ने अपने ट्विस्ट, क्राइम, धोखे और लगातार बदलते समीकरणों के जरिए अलग पहचान बनाई थी। अब करीब दो दशक बाद उसी तरह की थ्रिलर के साथ श्रीराम राघवन की वापसी को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ना तय है।
20 साल बाद ‘जॉनी गद्दार’ की यादें होंगी ताजा
मैचबॉक्स शॉट्स के फाउंडर संजय राउत्रे ने श्रीराम राघवन के साथ नए प्रोजेक्ट को कंपनी के लिए एक तरह की घर वापसी बताया है। उनके मुताबिक, श्रीराम ने मैचबॉक्स को उसकी पहली फिल्म के जरिए यह भरोसा दिया था कि अगर किसी कहानी को पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ पेश किया जाए, तो उसके लिए दर्शक जरूर मिलते हैं।
ऐसे समय में जब ‘जॉनी गद्दार’ अपनी रिलीज के 20 साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है, उसी अंदाज की एक नई थ्रिलर विकसित करना श्रीराम राघवन और मैचबॉक्स शॉट्स के पुराने रचनात्मक रिश्ते को फिर से मजबूत करता है।
हालांकि नई फिल्म का टाइटल, स्टारकास्ट और रिलीज डेट फिलहाल सामने नहीं आई है। लेकिन इसका जॉनर और श्रीराम राघवन का नाम ही इसे शुरुआती स्तर पर खास बना रहा है।
‘अंधाधुन’ से शुरू हुआ था मैचबॉक्स का सफर
श्रीराम राघवन और मैचबॉक्स शॉट्स का रिश्ता नया नहीं है। ‘अंधाधुन’ इस प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म थी। आयुष्मान खुराना, तब्बू और राधिका आप्टे स्टारर इस फिल्म ने अपनी अनोखी कहानी और लगातार बदलते ट्विस्ट से दर्शकों को चौंका दिया था।
करीब 16 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘अंधाधुन’ ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया और 2018 की सबसे सफल भारतीय फिल्मों में अपनी जगह बनाई। इस फिल्म की सफलता ने यह भी दिखाया कि मजबूत कहानी और नियंत्रित बजट के दम पर कंटेंट आधारित फिल्म बड़ा बिजनेस कर सकती है।
यही सोच आगे चलकर मैचबॉक्स शॉट्स की पहचान का हिस्सा बनी।
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ से ग्लोबल पहचान
मैचबॉक्स शॉट्स का दायरा अब सिर्फ छोटे या मिड-बजट प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है। कंपनी की हालिया बड़ी परियोजनाओं में नेटफ्लिक्स की वॉर सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ शामिल है, जो रिलीज के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रही है।
200 करोड़ रुपये से अधिक के बजट में तैयार की गई इस सीरीज को कंपनी की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इसकी शूटिंग के दौरान फाइटर एयरक्राफ्ट और एयरबेस जैसी वास्तविक लोकेशंस का इस्तेमाल किया गया। करीब 450 लोगों की टीम ने कठिन और हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में इसके लिए काम किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-इंग्लिश कंटेंट की ग्लोबल रैंकिंग में सीरीज दूसरे स्थान तक पहुंची, जबकि भारत में यह शीर्ष स्थान पर रही।
‘IC 814’ के बाद दूसरी बड़ी ग्लोबल सफलता
मैचबॉक्स शॉट्स इससे पहले नेटफ्लिक्स की ‘IC 814: द कंधार हाईजैक’ के जरिए भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है। यह सीरीज ग्लोबल चार्ट पर नंबर दो पर डेब्यू करने में सफल रही थी।
लगातार दो बड़े स्ट्रीमिंग प्रोजेक्ट्स की अंतरराष्ट्रीय सफलता ने कंपनी की महत्वाकांक्षा को और बढ़ाया है। यही वजह है कि अब उसकी नई स्लेट में बड़े बजट की परियोजनाओं के साथ-साथ कहानी आधारित और अलग तरह के प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।
इन फिल्मों और सीरीज पर भी काम कर रहा है मैचबॉक्स
मैचबॉक्स शॉट्स ने पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग जॉनर की कहानियों पर काम किया है। इसकी प्रमुख परियोजनाओं में ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’, ‘थ्री ऑफ अस’, ‘स्कूप’, ‘मेरी क्रिसमस’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्में और सीरीज शामिल हैं।
कंपनी की रणनीति किसी एक जॉनर या फॉर्मेट तक खुद को सीमित रखने की नहीं है। इसका मानना है कि अलग-अलग तरह की कहानियों में निवेश करने से एक ही तरह के दर्शकों या किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होती है।
सिर्फ फिल्में नहीं, मजबूत IP तैयार करने की तैयारी
मैचबॉक्स शॉट्स का विस्तार अब फिल्मों और वेब सीरीज से आगे भी हो रहा है। कंपनी ने ‘द गुरुग्राम स्कूल मर्डर’ और ‘द जॉनसन एंड जॉनसन फाइल्स’ जैसी किताबों के अधिकार भी हासिल किए हैं।
इस रणनीति का मकसद मजबूत बौद्धिक संपदा यानी IP तैयार करना है। कंपनी तैयार स्क्रिप्ट के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय ऐसी कहानियों को विकसित करना चाहती है जिन पर शुरुआत से उसका अधिक रचनात्मक नियंत्रण हो।
आने वाले प्रोजेक्ट्स में श्रीराम राघवन के अलावा हंसल मेहता, वासन बाला और जस्मीत रीन जैसे फिल्ममेकर्स के साथ काम भी शामिल है।
‘बड़ा बजट’ नहीं, सही गणित है जरूरी
मैचबॉक्स शॉट्स की रणनीति का एक अहम हिस्सा लागत और कहानी के बीच संतुलन बनाए रखना है। कंपनी का मानना है कि किसी फिल्म की सफलता सिर्फ उसकी ओपनिंग या बजट से तय नहीं होती।
संजय राउत्रे के मुताबिक, कम बजट में बनी ‘थ्री ऑफ अस’ जैसी फिल्म भी उतनी ही संतोषजनक हो सकती है, जितनी 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट वाली ‘ऑपरेशन सफेद सागर’। उनके नजरिए में फिल्म का बड़ा होना जरूरी नहीं है, बल्कि उसका बिजनेस मॉडल और लागत का गणित सही होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
थिएटर और OTT दोनों पर फोकस
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की सफलता के बाद मैचबॉक्स शॉट्स अपनी स्ट्रीमिंग स्लेट को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन थिएट्रिकल फिल्मों से भी कंपनी का फोकस कम नहीं हुआ है।
कंपनी का मानना है कि थिएटर और स्ट्रीमिंग दोनों की अपनी अलग अर्थव्यवस्था और ऑडियंस है। इसलिए कहानी के हिसाब से तय किया जाना चाहिए कि उसे बड़े पर्दे के लिए बनाया जाए या घर पर देखने के अनुभव के लिए।
यही वजह है कि आने वाले समय में मैचबॉक्स की स्लेट में अलग-अलग स्केल और फॉर्मेट की कहानियां देखने को मिल सकती हैं।
श्रीराम राघवन की नई थ्रिलर पर टिकी नजरें
फिलहाल सबसे ज्यादा उत्सुकता श्रीराम राघवन की नई अनटाइटल्ड थ्रिलर को लेकर है। ‘जॉनी गद्दार’ और ‘अंधाधुन’ जैसी फिल्मों के जरिए राघवन पहले ही साबित कर चुके हैं कि वह सस्पेंस और अप्रत्याशित ट्विस्ट को बेहद अलग अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं।
अगर नई फिल्म भी ‘जॉनी गद्दार’ की तरह क्राइम, धोखे, रहस्य और लगातार बदलते समीकरणों वाली कहानी लेकर आती है, तो 2027 में इसके जरिए दर्शकों को पुराने दौर के राघवन वाले थ्रिल की नई झलक देखने को मिल सकती है।
फिल्म की कहानी, कलाकारों और रिलीज से जुड़ी बाकी जानकारी सामने आने के बाद इस प्रोजेक्ट को लेकर तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल इतना तय है कि ‘जॉनी गद्दार’ के 20 साल पूरे होने के मौके पर श्रीराम राघवन का उसी अंदाज की नई थ्रिलर के साथ लौटना बॉलीवुड के थ्रिलर प्रेमियों के लिए खास खबर है।


