8th Pay Commission Salary Hike: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी है। कर्मचारी संगठनों की ओर से 2.7 से लेकर 4 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग की जा रही है। हालांकि, अगर फिटमेंट फैक्टर 2.1 भी रहता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को कम फायदा होगा। दरअसल, फिटमेंट फैक्टर का आकलन केवल 2.57 और 2.1 जैसे आंकड़ों की तुलना करके नहीं किया जा सकता। मौजूदा बेसिक पे और महंगाई भत्ते को साथ रखकर वास्तविक बढ़ोतरी समझनी होगी।
8th Pay Commission: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में संभावित सैलरी और पेंशन बढ़ोतरी को लेकर चर्चा तेज है। सबसे ज्यादा नजर फिटमेंट फैक्टर पर है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। अब 8वें वेतन आयोग के लिए अलग-अलग स्तर पर 2.1 से लेकर 4 तक के फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है।
पहली नजर में 2.1 का आंकड़ा 7वें वेतन आयोग के 2.57 से कम दिखाई देता है। लेकिन वास्तविक वेतन वृद्धि समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि पिछली बार वेतन आयोग लागू होने के समय कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा था और इस बार मौजूदा बेसिक पे कितना है।
7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर का क्या हुआ था?

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✓ #7CPC में न्यूनतम बेसिक सैलरी पर 2.57 फिटमेंट फैक्टर लगाकर ₹7000 से बढ़ाकर ₹18000 की गई थी। जबकि उस पर #DA पहले से ही 125% यानी ₹8750 मिल रहा था, मतलब महज 2250 रूपयों का… pic.twitter.com/UviB51mKbI
— Dr Manjeet Singh Patel (@ManjeetIMOPS) August 24, 2026 7वें वेतन आयोग से पहले केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 था। 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर इसे बढ़ाकर न्यूनतम ₹18,000 किया गया था।
हालांकि, उस समय कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते को भी ध्यान में रखना जरूरी है। उपलब्ध गणना के मुताबिक, उस समय 125% डीए के आधार पर ₹7,000 बेसिक पर ₹8,750 का डीए बनता था।
इस तरह बेसिक पे और डीए को जोड़ने पर रकम:
₹7,000 + ₹8,750 = ₹15,750
होती थी। इसके मुकाबले नया बेसिक पे ₹18,000 हुआ। यानी केवल इस तुलना में अंतर ₹2,250 का रहा।
यही वजह है कि फिटमेंट फैक्टर के बड़े आंकड़े को सीधे वेतन में उतनी ही प्रतिशत बढ़ोतरी मान लेना सही तरीका नहीं है।
8वें वेतन आयोग में 2.1 फैक्टर हुआ तो कितना बढ़ेगा बेसिक?
अब मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 को उदाहरण के तौर पर लेते हैं। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.1 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो गणना इस प्रकार होगी:
₹18,000 × 2.1 = ₹37,800
यानी नए न्यूनतम बेसिक पे का आंकड़ा करीब ₹38,000 हो सकता है।
यह सिर्फ एक उदाहरण आधारित गणना है। वास्तविक बेसिक पे 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।
मौजूदा 58% डीए को जोड़कर समझें पूरा गणित
अगर मौजूदा 58% डीए को उदाहरण के तौर पर लिया जाए, तो ₹18,000 के बेसिक पे पर डीए होगा:
₹18,000 × 58% = ₹10,440
यानी बेसिक पे और डीए मिलाकर कुल रकम:
₹18,000 + ₹10,440 = ₹28,440
अब अगर 2.1 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर नया बेसिक पे करीब ₹37,800 माना जाए, तो मौजूदा बेसिक+डीए की तुलना में अंतर:
₹37,800 – ₹28,440 = ₹9,360
होता है।
यानी इस उदाहरण में नया बेसिक पे मौजूदा बेसिक+डीए की तुलना में करीब 32.9% अधिक बैठता है। वहीं, ₹9,360 की राशि मौजूदा ₹18,000 बेसिक पे की करीब 52% है।
इसलिए 53% जैसी गणना को समझते समय यह देखना जरूरी है कि प्रतिशत किस रकम के मुकाबले निकाला जा रहा है। इसे सीधे इन-हैंड सैलरी में 53% बढ़ोतरी नहीं माना जा सकता।
सिर्फ फिटमेंट फैक्टर देखकर फैसला क्यों नहीं करना चाहिए?
फिटमेंट फैक्टर वेतन आयोग की गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन कर्मचारी की वास्तविक इन-हैंड सैलरी सिर्फ इसी एक आंकड़े से तय नहीं होती।
वेतन में बदलाव के दौरान कई दूसरे घटक भी महत्वपूर्ण होते हैं, जैसे:
- नया बेसिक पे
- महंगाई भत्ता यानी DA
- हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA
- ट्रांसपोर्ट अलाउंस यानी TA
- दूसरे लागू भत्ते
- टैक्स और अन्य कटौतियां
इसलिए 2.1 फिटमेंट फैक्टर सुनकर यह निष्कर्ष निकालना कि कर्मचारियों की सैलरी बहुत कम बढ़ेगी, सही नहीं होगा।
इन-हैंड सैलरी कितनी बढ़ेगी?
अगर 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक पे करीब ₹38,000 के स्तर पर पहुंचता है, तो कर्मचारी की वास्तविक इन-हैंड सैलरी केवल ₹38,000 तक सीमित नहीं होगी।
इसके ऊपर लागू नियमों के अनुसार डीए, एचआरए, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्ते जुड़ सकते हैं। दूसरी तरफ टैक्स, एनपीएस और दूसरी कटौतियां भी होंगी।
इसलिए किसी कर्मचारी की वास्तविक टेक-होम सैलरी उसके पे लेवल, पोस्टिंग शहर, भत्तों और कटौतियों के आधार पर अलग-अलग होगी।
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें कब आ सकती हैं?
8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस समयसीमा के आधार पर इसकी सिफारिशें मई 2027 के आसपास सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंतिम वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर और नए पे मैट्रिक्स का फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.1 रहता है या इससे ज्यादा, फिलहाल यह तय नहीं है। इसलिए 2.1 को अंतिम आंकड़ा मानना सही नहीं होगा। लेकिन मौजूदा ₹18,000 न्यूनतम बेसिक पे को आधार बनाकर 2.1 की उदाहरणात्मक गणना करें तो बेसिक करीब ₹37,800 बैठता है।
इससे यह समझ आता है कि केवल फिटमेंट फैक्टर के आंकड़े की तुलना 7वें और 8वें वेतन आयोग की वास्तविक सैलरी बढ़ोतरी बताने के लिए पर्याप्त नहीं है। अंतिम तस्वीर आयोग की सिफारिशों, सरकार के फैसले और नए डीए-भत्तों की व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी।


