नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद के बीच निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इसका असर यह हुआ कि बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,400 अंक से अधिक उछल गया जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 350 अंक से ज्यादा मजबूत हो गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में करीब 7 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
दोपहर बाद 2:30 बजे सेंसेक्स 1,429.48 अंक यानी 1.94 फीसदी की बढ़त के साथ 75,262.03 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 384.55 अंक यानी 1.66 फीसदी की तेजी के साथ 23,546.15 अंक पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई और डॉलर के मुकाबले 60 पैसे चढ़कर 95.25 के स्तर पर पहुंच गया।
ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मूड
बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान माना जा रहा है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और जल्द ही दोनों पक्ष किसी समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है। इस खबर ने वैश्विक निवेशकों की चिंता कम कर दी। पिछले कई सप्ताह से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार दबाव में थे। निवेशकों को डर था कि यदि होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होता है तो दुनिया भर में तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार केवल राजनीतिक बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा बल्कि संभावित आर्थिक राहत को भी कीमतों में शामिल कर रहा है। यदि क्षेत्र में स्थिरता लौटती है तो ऊर्जा लागत कम होगी और वैश्विक महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट
पश्चिम एशिया से राहत भरी खबर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 1.67 फीसदी फिसलकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे आयात बिल कम होता है, रुपये पर दबाव घटता है और कंपनियों की लागत में भी कमी आती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहता है तो इसका फायदा ऑटो, एविएशन, पेंट, सीमेंट और उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों को मिल सकता है।
निवेशकों की संपत्ति में 7 लाख करोड़ रुपये का इजाफा
शेयर बाजार की तेजी का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 460 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। केवल एक कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मार्केट कैप में यह उछाल बताता है कि निवेशकों का भरोसा तेजी से लौटा है। खासतौर पर बैंकिंग, ऑटो, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
सेंसेक्स के अधिकांश शेयर हरे निशान में
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा तेजी इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयरों में दर्ज की गई। कंपनी का शेयर 3 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ।
इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी शानदार तेजी देखने को मिली।
दूसरी ओर टेक महिंद्रा उन चुनिंदा शेयरों में शामिल रहा जहां मामूली कमजोरी देखने को मिली।
ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती
बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली।
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1.38 फीसदी मजबूत हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.61 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक स्तर पर बढ़ा है और वे जोखिम लेने के लिए तैयार हैं।
विश्लेषकों के अनुसार जब मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी तेजी में शामिल होते हैं तो बाजार की मजबूती अधिक टिकाऊ मानी जाती है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा तेजी रही
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल एस्टेट, ऑटो और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो इंडेक्स सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सेक्टरों में शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहे।
आईटी शेयरों पर दबाव का एक कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी अनिश्चितताएं भी मानी जा रही हैं। वहीं घरेलू मांग से जुड़े सेक्टरों में निवेशकों ने ज्यादा भरोसा दिखाया।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की दिशा में ठोस प्रगति होती है तो वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है।
साथ ही विदेशी निवेशकों की खरीदारी, रुपये की मजबूती और घरेलू आर्थिक संकेतक भी बाजार की चाल तय करेंगे। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश निर्णय न लें बल्कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान दें।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक बाजारों का मूड बदल दिया है और भारतीय निवेशकों को एक ही दिन में 7 लाख करोड़ रुपये की बड़ी सौगात मिल गई है।
आज के लाइव रेट्स


