Sergio Gor No Questions Remark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया के सवालों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत की ओर से कहा गया है कि किसी भी VVIP दौरे से पहले नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी और मीडिया से बातचीत के प्रारूप को लेकर चर्चा होना सामान्य प्रक्रिया है। नई दिल्ली ने साफ किया कि ऐसी बातचीत का मतलब किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करना नहीं है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, VVIP विजिट से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रम और मीडिया इंटरेक्शन को लेकर दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच बातचीत होती है। इसी क्रम में भारतीय पक्ष ने भी ऐसे दौरे के लिए अपनी मानक प्रक्रिया अमेरिकी पक्ष के साथ साझा की थी।
भारत ने क्या कहा?
सर्जियो गोर के बयान पर भारत सरकार के सूत्र ने कहा कि किसी भी VVIP यात्रा से पहले नेताओं के सार्वजनिक रूप से सामने आने और मीडिया के साथ बातचीत से जुड़े इंतजामों पर चर्चा करना आम बात है। भारतीय पक्ष ने भी ऐसे दौरे के लिए अपनी मानक प्रैक्टिस अमेरिकी पक्ष को बताई थी।
भारत का कहना है कि बैठक में मीडिया की मौजूदगी या सवाल-जवाब के प्रारूप को लेकर पहले से चर्चा करना एक प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्था है। इसे किसी नेता को पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से रोकने या उनके उत्तर तय करने की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
सर्जियो गोर ने क्या दावा किया था?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात का जिक्र करते हुए मीडिया से जुड़े घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा था। उनके मुताबिक, बैठक से पहले उन्होंने ट्रंप के साथ निजी बातचीत की थी।
गोर ने बताया कि ट्रंप ने उनसे पूछा था कि भारत की ओर से कौन से मुद्दे उठाए जा सकते हैं और क्या नई दिल्ली की कोई विशेष मांग है। इसी दौरान मीडिया की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई।
गोर के मुताबिक, भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अनुरोध था कि बैठक में प्रेस को मौजूद रहने दिया जाए, लेकिन पत्रकारों के सवाल न हों। उन्होंने ट्रंप को कथित तौर पर यही बात बताई थी और ट्रंप ने इस पर सहमति जताई थी।
बैठक में फिर क्या हुआ?
गोर के अनुसार, जब दोनों नेता बैठक के लिए सामने आए तो वहां बड़ी संख्या में पत्रकार और करीब 50 कैमरे मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने शुरुआत में अपनी-अपनी बात रखी।
इसके बाद ट्रंप ने पत्रकारों की ओर देखकर पूछा कि क्या उनके कोई सवाल हैं। इस तरह बैठक का प्रारूप पहले से तय व्यवस्था से अलग हो गया और पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका मिल गया।
गोर का कहना था कि इसके बाद बातचीत काफी लंबी हो गई और करीब 45 मिनट तक सवाल-जवाब हुए। इस दौरान दोनों नेताओं से कई मुद्दों पर पत्रकारों ने सवाल किए।
‘नो क्वेश्चन’ को लेकर क्यों हुआ विवाद?
सर्जियो गोर के बयान के बाद यह सवाल उठा कि क्या भारत ने प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान पत्रकारों के सवालों को सीमित रखने का अनुरोध किया था।
हालांकि, भारत की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण में इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी VVIP कार्यक्रम से पहले मीडिया इंटरेक्शन के प्रारूप पर चर्चा होना सामान्य राजनयिक प्रक्रिया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी नेता को यह निर्देश दिया जा रहा है कि वह पत्रकारों के सवालों का क्या जवाब दें।
मीडिया फॉर्मेट और जवाब तय करना अलग-अलग बातें
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात मीडिया इंटरेक्शन के फॉर्मेट और नेता के जवाबों के बीच अंतर की है।
किसी बैठक से पहले यह तय करना कि पत्रकार मौजूद रहेंगे या नहीं, सवाल-जवाब होंगे या नहीं और मीडिया को कितनी देर तक बैठक कवर करने की अनुमति होगी, कार्यक्रम की व्यवस्था से जुड़ा विषय है।
वहीं, किसी नेता से यह कहना कि पत्रकार के सवाल का क्या जवाब देना है, एक अलग विषय है। भारत के स्पष्टीकरण का मुख्य आधार यही है कि दोनों चीजों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।
ट्रंप ने बदल दिया था बैठक का फॉर्मेट
गोर के मुताबिक, भारतीय पक्ष की इच्छा सवाल-जवाब नहीं कराने की थी, लेकिन बैठक के दौरान ट्रंप ने खुद पत्रकारों से सवाल पूछने की बात कही। इसके बाद पत्रकारों ने दोनों नेताओं से सवाल किए और बातचीत का दायरा बढ़ गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत का कहना है कि VVIP यात्राओं के दौरान सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया से बातचीत को लेकर पहले से समन्वय होना कोई असामान्य बात नहीं है। नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोटोकॉल से जुड़े ऐसे संवाद को किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


