50-60% सेविंग रेट और नियमित निवेश से बनाया ₹1.16 करोड़ का फाइनेंशियल पोर्टफोलियो
31 साल की उम्र में ₹1.16 करोड़ की नेट वर्थ बनाना आज के समय में किसी उपलब्धि से कम नहीं है। बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने अपनी इसी वित्तीय यात्रा को Reddit के r/personalfinanceindia पर साझा किया है। उन्होंने बताया कि 2017 में महज ₹2.6 लाख सालाना सैलरी से करियर शुरू करने के बाद उनकी कमाई अब करीब ₹46 लाख LPA तक पहुंच गई है।
इस सफर में खास बात सिर्फ उनकी बढ़ती सैलरी नहीं है, बल्कि कमाई बढ़ने के बावजूद खर्चों को नियंत्रित रखना, लगातार 50-60% सेविंग रेट बनाए रखना और नियमित निवेश करना है। उन्होंने 30 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ की नेट वर्थ बनाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, यह लक्ष्य एक साल की देरी से 31 की उम्र में पूरा हुआ।
उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि लंबी अवधि में बढ़ती आय + ज्यादा बचत + अनुशासित निवेश किस तरह संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।
₹1.16 करोड़ की नेट वर्थ में क्या-क्या शामिल है?
From ₹2.6 LPA (2017) to ₹1Cr+ net worth — hit my milestone a year late, but got there
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personalfinanceindia सॉफ्टवेयर डेवलपर के मुताबिक, उनकी मौजूदा नेट वर्थ अलग-अलग निवेश और बचत साधनों में बंटी हुई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा इक्विटी और म्यूचुअल फंड का है।
| निवेश/संपत्ति | अनुमानित रकम |
|---|---|
| डायरेक्ट इक्विटी | ₹43 लाख |
| म्यूचुअल फंड | ₹43 लाख |
| EPF | ₹15 लाख |
| बॉन्ड | ₹7 लाख |
| NPS | ₹1.3 लाख |
| ट्रेडिंग अकाउंट में कैश | करीब ₹6 लाख |
इस तरह उनकी कुल संपत्ति करीब ₹1.16 करोड़ के आसपास बैठती है। पोर्टफोलियो को देखने पर साफ है कि उन्होंने सिर्फ एक निवेश विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय इक्विटी, म्यूचुअल फंड, EPF, बॉन्ड और NPS जैसे अलग-अलग साधनों में पैसा लगाया।
₹2.6 लाख से ₹46 लाख तक कैसे पहुंची कमाई?
उनका करियर 2017 में करीब ₹2.6 लाख सालाना पैकेज से शुरू हुआ था। समय के साथ अनुभव और करियर ग्रोथ के साथ उनकी आय में बड़ा इजाफा हुआ और अब यह करीब ₹46 लाख LPA बताई गई है।
हालांकि, सिर्फ सैलरी बढ़ना ही उनकी संपत्ति बनाने की वजह नहीं रही। उनकी रणनीति यह रही कि जैसे-जैसे आय बढ़ी, उन्होंने अपनी पूरी अतिरिक्त कमाई को लाइफस्टाइल पर खर्च करने के बजाय उसका बड़ा हिस्सा बचत और निवेश में लगाया।
यही वजह है कि उन्होंने अपनी यात्रा में लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखना एक अहम बात बताई है।
50-60% की सेविंग रेट बना सबसे बड़ा हथियार
उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी 50-60% सेविंग रेट है। यानी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च करने के बजाय भविष्य के लिए बचाया और निवेश किया गया।
उनके मुताबिक, उनकी और उनकी पत्नी की संयुक्त आय का बड़ा हिस्सा निवेश में जाता रहा। आम तौर पर आय बढ़ने के साथ लोगों के खर्च भी तेजी से बढ़ जाते हैं। महंगे गैजेट, कार, घर, ट्रैवल और दूसरी लाइफस्टाइल जरूरतों पर खर्च बढ़ने से सेविंग रेट कम हो सकता है।
लेकिन उन्होंने अपनी आय बढ़ने के बावजूद खर्चों को अपेक्षाकृत नियंत्रण में रखा। इससे निवेश के लिए उपलब्ध रकम लगातार बढ़ती गई।
SIP से तैयार हुआ निवेश का मजबूत आधार
उन्होंने करीब 2018 के आसपास गंभीरता से निवेश करना शुरू किया। उनकी नेट वर्थ में म्यूचुअल फंड का लगभग ₹43 लाख का हिस्सा है, जो लंबे समय तक नियमित निवेश की अहमियत दिखाता है।
नियमित SIP का फायदा यह है कि निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद तय अंतराल पर निवेश करता रहता है। इससे लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।
उनकी कहानी में भी यही दिखाई देता है कि करोड़पति बनने के लिए किसी एक निवेश में असाधारण रिटर्न पाने के बजाय लंबे समय तक निवेश जारी रखना ज्यादा महत्वपूर्ण रहा।
ऑप्शंस ट्रेडिंग से करीब ₹15 लाख का मुनाफा
सॉफ्टवेयर डेवलपर ने 2018 से इंडेक्स ऑप्शंस में पार्ट-टाइम ट्रेडिंग भी शुरू की थी। उनके मुताबिक, 2020 से यह ट्रेडिंग मुनाफे में रही और करीब छह साल में इससे लगभग ₹15 लाख का संचयी लाभ हुआ।
हालांकि, उन्होंने खुद ट्रेडिंग को अपनी संपत्ति का मुख्य आधार नहीं माना है। उनके मुताबिक, उनकी नेट वर्थ का बड़ा हिस्सा सैलरी से हुई बचत और नियमित SIP निवेश से बना है।
यह अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि ऑप्शंस ट्रेडिंग में मुनाफे के साथ काफी जोखिम भी जुड़ा होता है। किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उनके ट्रेडिंग नतीजों को दोहराना जरूरी नहीं है।
निवेश के लिए उधार लेकर ट्रेडिंग करना कितना जोखिम भरा?
उनकी रणनीति का एक जोखिम भरा हिस्सा यह भी है कि कुछ ट्रेडिंग के लिए वह अपने निवेश को गिरवी रखकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसी रणनीति तेजी वाले बाजार में रिटर्न बढ़ा सकती है, लेकिन बाजार में तेज गिरावट आने पर जोखिम भी कई गुना बढ़ सकता है। खासकर मार्जिन आधारित ट्रेडिंग में गिरते बाजार के दौरान अतिरिक्त रकम की जरूरत पड़ सकती है और नुकसान तेजी से बढ़ सकता है।
इसलिए उनकी कहानी से बचत और नियमित निवेश जैसे सिद्धांतों को सीखना अलग बात है, जबकि उनकी ट्रेडिंग रणनीति को अपनाना अलग। दोनों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
अब 40 साल की उम्र तक ₹10 करोड़ का लक्ष्य
₹1 करोड़ का लक्ष्य हासिल करने के बाद अब उनकी नजर 2035 तक ₹10 करोड़ की नेट वर्थ बनाने पर है।
इसके लिए वह समय के साथ अपनी SIP बढ़ाने और करीब 17-18% blended CAGR हासिल करने का लक्ष्य रख रहे हैं। हालांकि, इतना रिटर्न निश्चित नहीं है और वास्तविक बाजार प्रदर्शन इससे काफी अलग हो सकता है।
₹10 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंचने में उनके लिए सबसे अहम भूमिका आगे भी बचत दर, आय में बढ़ोतरी, निवेश की अवधि और बाजार के प्रदर्शन की होगी।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
इस सॉफ्टवेयर डेवलपर की वित्तीय यात्रा का सबसे बड़ा सबक यह है कि करोड़पति बनने के लिए हर बार कोई बड़ा जैकपॉट जरूरी नहीं होता।
उनकी रणनीति को मोटे तौर पर इन बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- आय बढ़ाने पर लगातार ध्यान देना
- कमाई का 50-60% तक बचाने की कोशिश करना
- नियमित SIP और लंबे समय तक निवेश जारी रखना
- लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखना
- EPF, NPS, बॉन्ड और इक्विटी जैसे अलग-अलग साधनों में निवेश करना
- निवेश और ट्रेडिंग को अलग-अलग नजरिए से देखना
- लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य तय करना
इस पूरी कहानी में सबसे अहम बात यह है कि उनकी नेट वर्थ किसी एक शेयर या एक बड़े ट्रेड की वजह से नहीं बनी। सैलरी में लगातार बढ़ोतरी, उच्च सेविंग रेट और लंबे समय तक निवेश ने मिलकर उनकी संपत्ति बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
डिस्क्लेमर
यह रिपोर्ट Reddit पर एक यूजर द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। NewsJagran.in इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही किसी निवेश या ट्रेडिंग रणनीति का समर्थन करता है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और ऑप्शंस ट्रेडिंग में जोखिम होता है। निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता के अनुसार उचित सलाह लें।


