Atomberg IPO: कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एटमबर्ग आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में एंट्री की तैयारी कर रही है। कंपनी ने आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल कर दिया है। हालांकि, इसमें सामने आई एक बड़ी देनदारी निवेशकों का ध्यान खींच रही है। कंपनी के फाउंडर्स को दिए गए लेकिन अब तक भुगतान नहीं किए गए बोनस की रकम करीब ₹190 करोड़ है। यह राशि कंपनी के कैश और बैंक डिपॉजिट्स का करीब 88% बैठती है।
ऐसे में आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, फाउंडर्स के Deferred Bonus और इस देनदारी के भुगतान से जुड़े पहलुओं को समझना जरूरी है।
फाउंडर्स को मिला था करीब ₹192 करोड़ का बोनस
आईपीओ ड्राफ्ट और वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 में एटमबर्ग के फाउंडर्स मनोज कुमार मीना और सिबाब्रता दास को कुल ₹59.97 करोड़ का बोनस दिया गया था। वहीं वित्त वर्ष 2024 में दोनों को मिलाकर करीब ₹132.89 करोड़ का बोनस मिला।
इस तरह दोनों वित्त वर्षों में कुल बोनस करीब ₹192.46 करोड़ रहा। हालांकि मार्च 2026 तक इसमें से ₹190.09 करोड़ का भुगतान नहीं हुआ था और यह राशि Deferred Bonus के रूप में दर्ज रही।
सबसे अहम बात यह है कि आईपीओ ड्राफ्ट में इस बड़े बोनस को तय करने के आधार या इसे स्थगित रखने की वजह को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आती।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ₹190 करोड़ की देनदारी?
एटमबर्ग के पास ₹215.87 करोड़ का कैश और बैंक डिपॉजिट्स है। इसके मुकाबले ₹190.09 करोड़ का Deferred Bonus काफी बड़ी राशि है। यानी यह कंपनी के मौजूदा कैश और बैंक बैलेंस के करीब 88% के बराबर है।
अगर आने वाले समय में इस बोनस का भुगतान किया जाता है तो कंपनी के उपलब्ध कैश पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस देनदारी का भुगतान कब और किस तरीके से किया जाएगा।
आईपीओ ड्राफ्ट में बोनस भुगतान की कोई स्पष्ट तारीख, किस्तों का शेड्यूल या कोई निश्चित सेटलमेंट ट्रिगर नहीं बताया गया है। सिर्फ इतना संकेत मिलता है कि मैनेजमेंट बोनस का भुगतान भविष्य में किया जाएगा।
क्या IPO के पैसों से चुकाया जाएगा बोनस?
यह भी निवेशकों के लिए एक अहम सवाल है। एटमबर्ग आईपीओ के जरिए ₹450 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी के मुताबिक इस रकम का इस्तेमाल अलग-अलग कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा।
प्रस्तावित इस्तेमाल में करीब ₹90 करोड़ कर्ज चुकाने, ₹150 करोड़ ब्रांडिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग तथा ₹100 करोड़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D पर खर्च किए जाने हैं। बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए रखी जाएगी।
कंपनी सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए रखी गई रकम को विभिन्न कारोबारी जरूरतों पर खर्च कर सकती है। हालांकि, आईपीओ ड्राफ्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि Deferred Bonus के भुगतान के लिए आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं।
फाउंडर्स की कंपनी में कितनी हिस्सेदारी?
मनोज कुमार मीना और सिबाब्रता दास की एटमबर्ग में कुल मिलाकर 27.75% हिस्सेदारी है। दोनों फाउंडर्स पहले भी कंपनी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच चुके हैं।
वर्ष 2019 से सेकेंडरी सेल के जरिए मनोज मीना को लगभग ₹40.18 करोड़ और सिबाब्रता दास को करीब ₹31.39 करोड़ प्राप्त हुए हैं।
इसलिए संभावित निवेशकों के लिए कंपनी में फाउंडर्स की मौजूदा हिस्सेदारी के साथ-साथ उनके बकाया बोनस और पहले की हिस्सेदारी बिक्री को भी समझना जरूरी है।
एटमबर्ग का कारोबार क्या है?
एटमबर्ग ने अपने कारोबार की शुरुआत कम बिजली खपत वाले BLDC सीलिंग फैन से की थी। कंपनी ने इसके बाद अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार किया है।
अब एटमबर्ग ब्रांड के तहत कंपनी कई तरह के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज बेचती है। इनमें शामिल हैं:
- सीलिंग फैन
- पेडेस्टल फैन
- वॉल फैन
- एग्जॉस्ट फैन
- मिक्सर ग्राइंडर
- वॉटर प्यूरिफायर
- कोल्ड-प्रेस्ड जूसर
- स्मार्ट लॉक
कंपनी का फोकस टेक्नोलॉजी और एनर्जी-एफिशिएंट घरेलू उपकरणों के बाजार पर है।
बढ़ा रेवेन्यू, लेकिन घाटा भी हुआ ज्यादा
वित्त वर्ष 2026 में एटमबर्ग के ऑपरेशंस से रेवेन्यू में अच्छी वृद्धि देखने को मिली। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 34.8% बढ़कर ₹1,293.77 करोड़ हो गया।
हालांकि, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद कंपनी का घाटा कम नहीं हुआ। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का घाटा 26.8% बढ़कर ₹148.88 करोड़ हो गया।
इसके अलावा कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी निगेटिव रहा। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो करीब -₹218.98 करोड़ रहा। यानी कंपनी के कारोबार से नकदी का प्रवाह फिलहाल एक चुनौती बना हुआ है।
IPO से पहले निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
एटमबर्ग एक तेजी से बढ़ते कंज्यूमर अप्लायंसेज ब्रांड के तौर पर सामने आई है और कंपनी के रेवेन्यू में मजबूत वृद्धि हुई है। लेकिन आईपीओ में निवेश का फैसला सिर्फ बिक्री बढ़ने के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
निवेशकों को खास तौर पर ₹190.09 करोड़ के Deferred Bonus, निगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो, वित्त वर्ष 2026 के घाटे और IPO फंड के इस्तेमाल को ध्यान से देखना चाहिए।
साथ ही, आईपीओ का प्राइस बैंड, कंपनी का वैल्यूएशन, शेयरों की बिक्री का स्वरूप और अंतिम ऑफर डॉक्यूमेंट में दी गई शर्तों की जानकारी मिलने के बाद ही निवेश से जुड़ा फैसला लेना बेहतर होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी आईपीओ या शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और वित्तीय आंकड़ों का अध्ययन करें तथा जरूरत होने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता।


