बच्चों के साथ रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल या किसी पब्लिक प्लेस पर जाना कई बार माता-पिता के लिए चुनौती बन जाता है। बच्चा अचानक रोने लगे, जोर-जोर से चिल्लाए या अपनी बात मनवाने के लिए जिद करने लगे, तो पैरेंट्स समझ नहीं पाते कि उस वक्त क्या किया जाए। आसपास मौजूद लोगों की नजरें इस परेशानी को और बढ़ा देती हैं।
ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत डांटने या सजा देने के बजाय शांत रहना ज्यादा मददगार हो सकता है। जेंटल पेरेंटिंग बच्चे के व्यवहार के पीछे की वजह समझने और उसे धीरे-धीरे सही व्यवहार सिखाने पर जोर देती है। पब्लिक प्लेस पर टैंट्रम को संभालने के लिए कुछ आसान ट्रिक्स अपनाई जा सकती हैं।
1. बाहर निकलने से पहले स्नैक्स रखें साथ

अगर बच्चे के साथ लंबे समय के लिए बाहर जा रहे हैं, तो उसके लिए छोटे और पसंदीदा स्नैक्स साथ रखना उपयोगी हो सकता है। कई बार भूख लगने या खाना आने में ज्यादा समय लगने पर बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है और रोने या जिद करने लगता है।
रेस्टोरेंट में खाना आने तक कोई छोटा स्नैक बच्चे को कुछ देर व्यस्त रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, स्नैक्स का चुनाव बच्चे की उम्र और खान-पान की जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
2. पसंदीदा खिलौना या किताब रखें साथ
अनजान जगह पर बच्चे को सहज महसूस कराने के लिए उसका पसंदीदा खिलौना, किताब या कोई दूसरी एक्टिविटी साथ रख सकते हैं। खासकर तब जब रेस्टोरेंट में लंबे समय तक बैठना हो।
बच्चे को अपनी पसंद की कोई छोटी चीज चुनने की आजादी देना भी अच्छा तरीका हो सकता है। इससे वह खुद को एक्टिविटी में व्यस्त रखता है और बार-बार उठने या परेशान होने की संभावना कम हो सकती है।
ध्यान रखें कि खिलौना ऐसा हो जिससे आसपास के दूसरे लोगों को परेशानी न हो। बच्चे को छोटी-छोटी चीजों में चुनाव का मौका देना उसे जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता सीखने में भी मदद कर सकता है।
3. हर बार स्क्रीन का सहारा न लें
बच्चा बाहर जाकर परेशान करे तो उसे तुरंत फोन या टैबलेट देना आसान समाधान लग सकता है, लेकिन इसे रोज की आदत बनाना सही नहीं है। अगर हर बार टैंट्रम के बाद बच्चे को स्क्रीन मिलती है, तो वह धीरे-धीरे इस व्यवहार को स्क्रीन पाने के तरीके के तौर पर समझ सकता है।
इसकी जगह बच्चे से बातचीत करें, आसपास की चीजों के बारे में बताएं या उसे किसी छोटी एक्टिविटी में शामिल करें। हां, अगर बच्चा बहुत ज्यादा थका हुआ है या किसी खास दिन बिल्कुल शांत नहीं हो पा रहा, तो कभी-कभार स्क्रीन का इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरी बात यह है कि इसे हर स्थिति का स्थायी समाधान न बनाया जाए।
4. जरूरत पड़े तो रेस्टोरेंट से बाहर निकलें
कई बार माता-पिता पूरी कोशिश करने के बावजूद बच्चे को शांत नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में खुद को दोष देने या लोगों की प्रतिक्रिया की चिंता करने के बजाय कुछ देर के लिए बच्चे को बाहर ले जाना बेहतर हो सकता है।
अगर बच्चा बहुत थका हुआ है, लगातार रो रहा है या माहौल उसके लिए ज्यादा उत्तेजक हो गया है, तो थोड़ी देर शांत जगह पर ले जाने से उसे संभलने का मौका मिल सकता है। जरूरत हो तो उस दिन रेस्टोरेंट की विजिट जल्दी खत्म करना भी ठीक है।
बच्चे को बातचीत में शामिल करें
पब्लिक प्लेस पर बच्चे को सिर्फ चुप बैठाने की कोशिश करने के बजाय उससे बातचीत करना भी काफी मददगार हो सकता है। उससे पूछें कि वह क्या खाना चाहता है, आसपास उसे क्या दिखाई दे रहा है या दिनभर उसने क्या किया।
इस तरह बच्चा खुद को बातचीत का हिस्सा महसूस करता है और उसका ध्यान केवल फोन या किसी एक चीज पर केंद्रित नहीं रहता। धीरे-धीरे उसे यह भी समझ आने लगता है कि रेस्टोरेंट या किसी पब्लिक प्लेस पर परिवार के साथ बैठना, बातचीत करना और दूसरों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
हर टैंट्रम को असफलता न समझें
पब्लिक प्लेस पर बच्चे का कभी-कभी रोना, जिद करना या टैंट्रम करना असामान्य नहीं है। हर बच्चे का मूड और जरूरत अलग होती है। इसलिए ऐसी किसी एक घटना को अपनी पैरेंटिंग की असफलता मानने की जरूरत नहीं है।
जेंटल पेरेंटिंग का मतलब बच्चे को हर बात की छूट देना नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चे की भावनाओं को समझते हुए प्यार और धैर्य के साथ स्पष्ट सीमाएं तय करना है। पहले से थोड़ी तैयारी, बच्चे की जरूरतों पर ध्यान और शांत प्रतिक्रिया से पब्लिक प्लेस पर ऐसी मुश्किल स्थितियों को काफी हद तक संभाला जा सकता है।


