Pak Bayraktar Drones Near LoC: भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) पर ड्रोन गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ी है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने तुर्की में बने Bayraktar TB2 कॉम्बैट ड्रोन की निगरानी और गश्त बढ़ाई है। हालांकि, मुजफ्फराबाद और कोटली के आसपास नए ग्राउंड-कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल लॉन्च सिस्टम की तैनाती जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है।
Bayraktar TB2 को दुनिया के चर्चित मीडियम-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAV) में गिना जाता है। इसे खुफिया निगरानी और टोही के साथ-साथ सटीक हमलों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। निर्माता Baykar के अनुसार, TB2 में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सेंसर, रियल-टाइम इमेज ट्रांसमिशन और प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन को इंटीग्रेट करने की क्षमता है।
क्यों खतरनाक है Bayraktar TB2 ड्रोन?
Bayraktar TB2 की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबे समय तक हवा में बने रहने और निगरानी करने की क्षमता है। Baykar के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इसकी ऑपरेशनल ऊंचाई करीब 16,000 फीट और सर्विस सीलिंग 20,000 फीट है। इसकी एंड्योरेंस 18 घंटे से ज्यादा बताई गई है, जबकि एक प्रदर्शन उड़ान में इसने 27 घंटे 3 मिनट तक हवा में रहने का रिकॉर्ड भी बनाया था।
इसमें EO/IR और लेजर डिजाइनटेशन जैसी सेंसर क्षमताएं लगाई जा सकती हैं। इसका मतलब है कि ड्रोन केवल इलाके की तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि लक्ष्य की पहचान और प्रिसिजन स्ट्राइक में भी भूमिका निभा सकता है। Baykar के मुताबिक, TB2 में लेजर-गाइडेड तथा INS/GPS-गाइडेड हथियारों के इंटीग्रेशन का विकल्प मौजूद है।
TB2 की प्रमुख खूबियां
- 18+ घंटे की एंड्योरेंस
- 16,000 फीट तक ऑपरेशनल ऊंचाई
- 700 किलोग्राम अधिकतम टेक-ऑफ वजन
- 150 किलोग्राम तक पेलोड क्षमता
- रियल-टाइम इमेजरी ट्रांसमिशन
- EO/IR सेंसर और सर्विलांस क्षमताएं
- प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन के साथ इस्तेमाल की क्षमता
- ऑटोनॉमस टेक-ऑफ, लैंडिंग और नेविगेशन जैसी सुविधाएं
पाकिस्तान के ड्रोन नेटवर्क में Murid Airbase की अहम भूमिका
पाकिस्तान के ड्रोन ऑपरेशंस में Murid Airbase का नाम पहले भी सामने आ चुका है। 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान मीडिया रिपोर्टों में Murid को पाकिस्तान के UAV और UCAV ऑपरेशंस से जुड़े प्रमुख ठिकानों में बताया गया था। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां Shahpar-1 और Bayraktar TB2 जैसे UAV/UCAV संचालित किए जाते थे।
2026 में प्रकाशित एक रक्षा विश्लेषण में भी Murid को पाकिस्तानी वायुसेना के ड्रोन ऑपरेशंस के महत्वपूर्ण केंद्रों में बताया गया है और वहां Bayraktar TB2 से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा, 2025 में भारत की सैन्य कार्रवाई के दौरान Murid, Nur Khan/Chaklala और Rahim Yar Khan सहित कई पाकिस्तानी एयरबेस निशाने पर होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
LoC के करीब ड्रोन तैनाती क्यों अहम है?
LoC जैसे संवेदनशील इलाके में लंबे समय तक उड़ान भरने वाला सशस्त्र ड्रोन निगरानी क्षमता बढ़ा सकता है। ऐसे UAV का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों की निगरानी, इलाके की मैपिंग और संभावित लक्ष्यों की पहचान के लिए किया जा सकता है।
हालांकि, किसी ड्रोन की वास्तविक प्रभावशीलता केवल उसकी तकनीकी क्षमता पर निर्भर नहीं करती। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां, मौसम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, एयर डिफेंस और कम्युनिकेशन लिंक जैसे कई कारक उसके ऑपरेशन को प्रभावित करते हैं।
यही वजह है कि LoC के आसपास किसी MALE UCAV की गतिविधि को केवल हमले के खतरे के रूप में नहीं, बल्कि लगातार ISR यानी Intelligence, Surveillance and Reconnaissance क्षमता के संदर्भ में भी देखा जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा ड्रोन युद्ध का महत्व
मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम युद्धक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बने थे। इसी दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस और ड्रोन ऑपरेशंस से जुड़े ठिकानों पर भारतीय हमलों की रिपोर्ट सामने आई थी।
इस संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए UAV, UCAV और एंटी-ड्रोन सिस्टम की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन कम लागत पर लंबे समय तक निगरानी करने और कुछ परिस्थितियों में सटीक हमला करने की क्षमता देते हैं।
भारत के लिए चुनौती सिर्फ Bayraktar TB2 नहीं
LoC पर किसी भी सशस्त्र UAV की मौजूदगी का मुकाबला केवल लड़ाकू विमानों से करना जरूरी नहीं होता। आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, रेडियो-फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और आवश्यकता पड़ने पर हार्ड-किल इंटरसेप्टर जैसी कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए Bayraktar TB2 की मौजूदगी को लेकर चिंता जरूर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ड्रोन बिना किसी चुनौती के भारतीय क्षेत्र में ऑपरेट कर सकता है। वास्तविक खतरा इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस इलाके में, कितनी ऊंचाई पर, किस तरह के कम्युनिकेशन लिंक के साथ और किस मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
कितना खतरनाक है Bayraktar TB2?
तकनीकी रूप से देखें तो Bayraktar TB2 एक सिर्फ निगरानी करने वाला ड्रोन नहीं, बल्कि ISR और प्रिसिजन स्ट्राइक दोनों भूमिकाओं के लिए डिजाइन किया गया UCAV है। इसकी लंबी एंड्योरेंस और सेंसर क्षमताएं इसे सीमा क्षेत्रों में निगरानी के लिए उपयोगी बनाती हैं, जबकि हथियार ले जाने की क्षमता इसे जरूरत पड़ने पर स्ट्राइक प्लेटफॉर्म में बदल देती है।
हालांकि, LoC के आसपास इसकी वास्तविक तैनाती, उड़ान की संख्या और मुजफ्फराबाद-कोटली क्षेत्र में बताए जा रहे अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी को फिलहाल दावों/खुफिया इनपुट के रूप में ही देखना उचित है, जब तक आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से सत्यापित पुष्टि सामने न आए।


