Nifty 50 Target 27000: भारतीय शेयर बाजार को लेकर निवेशकों के लिए एक बार फिर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारतीय बाजार की वैल्यूएशन में सुधार हुआ है और घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े बेहतर आंकड़े बाजार को सपोर्ट कर सकते हैं। हालांकि, ग्लोबल स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी अभी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम बनी हुई है।
जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम के मुताबिक, भारतीय बाजार में लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक नजर आ रही है। इसके साथ ही नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी शेयरों में उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों का ध्यान भारत की ओर बढ़ाया है।
निफ्टी 50 के लिए 27,000 का लक्ष्य
जेपी मॉर्गन का निफ्टी 50 के लिए 27,000 का लक्ष्य ऐसे समय में आया है, जब बाजार में निवेशकों के बीच तेजी को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले कुछ वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति में पहुंच गया है।
संजय मोकिम के अनुसार, खासतौर पर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिला है। इससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में दोबारा अवसर बनने लगे हैं।
घरेलू अर्थव्यवस्था दे रही बाजार को मजबूती
भारतीय शेयर बाजार के लिए घरेलू आर्थिक परिस्थितियां भी फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रही हैं। अप्रैल-जून तिमाही के कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने को बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बेहतर कॉर्पोरेट प्रदर्शन के साथ अगर घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़े मजबूत बने रहते हैं, तो इसका असर कंपनियों की कमाई और शेयरों की वैल्यूएशन पर भी पड़ सकता है।
मोकिम का मानना है कि भारतीय शेयरों में मौजूदा समय में वैल्यूएशन का अंतर पहले की तुलना में कम हुआ है। ऐसे में घरेलू फंड फ्लो और बेहतर आर्थिक आंकड़े बाजार को आगे सपोर्ट कर सकते हैं।
ग्लोबल रिस्क अभी भी बना हुआ है
हालांकि जेपी मॉर्गन पूरी तरह से भारतीय बाजार को जोखिम से मुक्त नहीं मानता। संजय मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख ग्लोबल रिस्क बताया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर ग्लोबल निवेशकों के लिए डॉलर आधारित अपेक्षाकृत सुरक्षित एसेट्स आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों यानी Emerging Markets में निवेश का आकर्षण कुछ कम हो सकता है।
यही वजह है कि भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी की रफ्तार को लेकर अभी पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।
निवेशकों की नजर फिर भारत पर
संजय मोकिम के मुताबिक, नॉर्थ एशिया के टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़ती अस्थिरता और भारत के लार्जकैप शेयरों की बेहतर वैल्यूएशन के कारण निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय बाजार में दोबारा बढ़ रही है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विदेशी निवेश अचानक बड़े पैमाने पर भारत में आना शुरू हो जाएगा। ग्लोबल मैक्रो परिस्थितियों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को लेकर निवेशकों की चिंता अभी बनी हुई है।
इसलिए भारतीय बाजार के लिए घरेलू परिस्थितियां सकारात्मक होने के बावजूद विदेशी पूंजी के प्रवाह पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर बना रह सकता है।
IPO, QIP और ब्लॉक डील में बढ़ी गतिविधि
मोकिम ने भारतीय पूंजी बाजार में IPO, QIP और ब्लॉक डील्स के जरिए होने वाली गतिविधियों का भी उल्लेख किया। इन माध्यमों से बाजार में लगातार नए शेयरों की सप्लाई आ रही है।
फिलहाल नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने आने वाले निवेश की तुलना में ज्यादा दिखाई दे रही है। इससे छोटी अवधि में बाजार की लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, जेपी मॉर्गन के नजरिए से इसे केवल नकारात्मक संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मध्यम अवधि में ज्यादा कंपनियों का बाजार में आना और नए निवेश अवसर बनना बाजार के विस्तार के लिए सकारात्मक हो सकता है।
क्या भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म हो गए?
जेपी मॉर्गन का 27,000 का निफ्टी टारगेट निश्चित तौर पर बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे बाजार में एकतरफा तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता।
एक तरफ बेहतर घरेलू आर्थिक आंकड़े, कंपनियों के नतीजे और लार्जकैप शेयरों की आकर्षक वैल्यूएशन भारतीय बाजार के पक्ष में हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर एसेट्स की आकर्षकता और विदेशी निवेशकों के रुख जैसे जोखिम अभी भी मौजूद हैं।
इसलिए अगर घरेलू आर्थिक मजबूती जारी रहती है और ग्लोबल जोखिमों में कमी आती है, तो निफ्टी 50 के लिए 27,000 का लक्ष्य निवेशकों के लिए बाजार की संभावित दिशा का एक महत्वपूर्ण संकेत बन सकता है। निवेशकों को हालांकि किसी भी फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।


