India Russia Relations: भारत और रूस के बीच रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक बार फिर उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क देखने को मिला है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 24 अगस्त को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पुतिन को शुभकामनाएं दीं और उनका व्यक्तिगत संदेश भी सौंपा। बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और आने वाली महत्वपूर्ण शिखर बैठकों को लेकर चर्चा हुई।
इस मुलाकात के दौरान पुतिन ने भारत-रूस संबंधों को लेकर सकारात्मक बात कही। उन्होंने बताया कि इस साल दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है। खास बात यह रही कि रूसी राष्ट्रपति ने भारत-रूस रिश्तों के विकास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को भी अहम बताया।
पुतिन से मिले जयशंकर, मोदी का संदेश सौंपा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23-24 अगस्त के दो दिवसीय आधिकारिक रूस दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक में भी हिस्सा लिया। सोमवार को क्रेमलिन में पुतिन के साथ उनकी मुलाकात हुई।
मुलाकात की शुरुआत में जयशंकर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाओं के साथ आए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने पुतिन के लिए एक व्यक्तिगत संदेश भी दिया है, जिसे वह उन्हें सौंपना चाहते हैं।
जयशंकर ने इसके साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग काफी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की तस्वीर काफी मजबूत है।
पीएम मोदी को लेकर पुतिन ने कही ये बात
जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान पुतिन ने भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार का उल्लेख किया। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले साल दोनों देशों का व्यापार थोड़ा कम हुआ था, लेकिन इस साल इसमें बढ़ोतरी हो रही है।
पुतिन ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंधों के विकास पर पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से विशेष ध्यान देते हैं। रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बने संपर्क और रणनीतिक विश्वास को रेखांकित करती है।
पुतिन ने जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी को अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात होगी।
उर्वरक सप्लाई बढ़ाने पर रूस का बड़ा भरोसा
मुलाकात में उर्वरक भी अहम मुद्दा रहा। रूस भारत के कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। पुतिन ने कहा कि मॉस्को भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरक की आपूर्ति बढ़ा रहा है और आगे भी ऐसा करने के लिए तैयार है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उर्वरक की पर्याप्त और स्थिर उपलब्धता कृषि उत्पादन तथा किसानों की लागत पर सीधा असर डालती है। ऐसे में रूस की ओर से आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के साथ-साथ कृषि सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर भी जोर
जयशंकर ने पुतिन के साथ बातचीत में भारत-रूस आर्थिक साझेदारी के विस्तार का उल्लेख किया। दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से ऊर्जा क्षेत्र अहम रहा है, लेकिन अब सहयोग का दायरा व्यापार, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, तकनीक और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों तक बढ़ रहा है।
भारत और रूस की कोशिश अब आर्थिक संबंधों को ज्यादा व्यापक और संतुलित बनाने की है। दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी चर्चा में है। इसके लिए बाजार तक पहुंच आसान करने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने, भुगतान व्यवस्था में सुधार और कारोबारी स्तर पर संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर काम किया जा रहा है।
मोदी-पुतिन की अगली मुलाकात पर भी चर्चा
जयशंकर ने पुतिन को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी SCO शिखर सम्मेलन में उनसे मुलाकात की उम्मीद कर रहे हैं। इसके बाद मोदी ने भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन का स्वागत करने की इच्छा भी जताई है।
जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के लिए आपसी सुविधा के अनुसार वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन आयोजित करने की दिशा में भी आगे बढ़ा जा सकता है।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई महत्वपूर्ण मुलाकातें हो सकती हैं। SCO और BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों के अलावा द्विपक्षीय शिखर बैठक भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकती है।
भारत-रूस रिश्तों में क्यों अहम है यह मुलाकात?
जयशंकर और पुतिन की मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और रूस अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
दोनों देशों के रिश्ते केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं तकनीक समेत कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है।
हाल के वर्षों में ऊर्जा और आर्थिक सहयोग ने इस रिश्ते में खास महत्व हासिल किया है। वहीं परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, उर्वरक और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लगातार उच्चस्तरीय संपर्क भी इस रिश्ते की अहमियत को दिखाता है। भारत और रूस दोनों ही इस बात पर जोर देते रहे हैं कि द्विपक्षीय संबंधों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद स्थिर और व्यावहारिक बनाए रखा जाए।
डेनिस मंटुरोव से भी हुई अहम बातचीत
पुतिन से मुलाकात से पहले जयशंकर ने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ भी बातचीत की। दोनों ने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की और द्विपक्षीय व्यापार तथा आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
इस बैठक में आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। खास तौर पर बाजार तक पहुंच, व्यापारिक बाधाओं को कम करने, भुगतान व्यवस्था और कारोबारी संपर्क बढ़ाने जैसे विषय महत्वपूर्ण रहे।
जयशंकर की रूस यात्रा में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात भी कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
बदलती दुनिया में भारत-रूस की दोस्ती का नया अध्याय
जयशंकर-पुतिन की यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते अब पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बढ़ रहे हैं।
पुतिन की ओर से पीएम मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों की तारीफ और दोनों देशों के बढ़ते व्यापार का उल्लेख यह बताता है कि मॉस्को भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को कितना महत्व दे रहा है। वहीं जयशंकर का पुतिन को मोदी का व्यक्तिगत संदेश सौंपना भी दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की निरंतरता को दर्शाता है।
आने वाले समय में SCO और BRICS जैसे मंचों पर मोदी-पुतिन की संभावित मुलाकात तथा द्विपक्षीय वार्षिक शिखर सम्मेलन भारत-रूस संबंधों के लिए अहम साबित हो सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों का फोकस व्यापार बढ़ाने, ऊर्जा और उर्वरक सहयोग मजबूत करने तथा आर्थिक साझेदारी को और व्यापक बनाने पर दिखाई दे रहा है।


