Sugar Price in India: देश में चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 49 रुपये से बढ़कर 63 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई है। कुछ जगहों पर इसका खुदरा भाव 75 रुपये प्रति किलो तक बताया जा रहा है। ऐसे में त्योहारों के सीजन से पहले बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि, चीनी की कीमतों में आगे और तेजी जारी रहने की आशंका के बीच इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने राहत देने वाला बयान दिया है। संगठन का कहना है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है। बाजार में हालिया तेजी के पीछे मुख्य रूप से पैनिक बाइंग, सट्टा खरीदारी और उत्पादन अनुमान में कमी जैसे कारण रहे हैं।
ISMA के मुताबिक, सरकार के हालिया कदमों के असर से बाजार में सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है और आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।
एक महीने में करीब 29% बढ़ी चीनी की कीमत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत फिलहाल 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। करीब एक महीने पहले यह कीमत 48.73 रुपये प्रति किलो थी। यानी इस अवधि में चीनी लगभग 29 फीसदी महंगी हुई है।
सोमवार को कुछ बाजारों में चीनी का अधिकतम खुदरा भाव 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। वहीं, इसका मॉडल प्राइस करीब 65 रुपये प्रति किलो बताया गया है।
कीमतों में अचानक आई इस तेजी ने खासकर त्योहारों से पहले घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, ISMA का मानना है कि मौजूदा स्थिति को देश में चीनी की वास्तविक कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ISMA ने पैनिक बाइंग को बताया बड़ी वजह
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगावकर के मुताबिक, चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें पैनिक बाइंग और सट्टा खरीदारी प्रमुख हैं।
उनके अनुसार, बाजार में कुछ कारोबारियों की ओर से सप्लाई की कमी का माहौल बनने के बाद बड़े थोक खरीदारों ने जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर स्टॉक करना शुरू कर दिया। कुछ खरीदारों ने डेढ़ से दो महीने तक की जरूरत का स्टॉक पहले ही जमा कर लिया।
इसका असर यह हुआ कि चीनी का एक हिस्सा बाजार में सर्कुलेशन में रहने के बजाय गोदामों में जमा हो गया। इससे बाजार में अस्थायी तौर पर सप्लाई कम दिखाई देने लगी और कीमतों पर दबाव बढ़ा।
ISMA का कहना है कि इस स्थिति को आर्टिफिशियल शॉर्टेज के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, कुछ चीनी मिलों द्वारा स्टॉक रोकने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है और इस मामले की जांच सरकार की ओर से की जा रही है।
देश में चीनी की कमी है या नहीं?
ISMA के आंकड़ों के अनुसार, मार्केटिंग वर्ष 2025-26 में एथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई चीनी को घटाने के बाद देश का नेट चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है।
सीजन की शुरुआत में देश के पास करीब 50 लाख टन का ओपनिंग स्टॉक मौजूद था। वहीं, घरेलू स्तर पर हर साल चीनी की खपत करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।
ISMA का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक देश में लगभग 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक बच सकता है। संगठन के मुताबिक, यह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बफर है।
इसलिए संस्था का कहना है कि मौजूदा कीमतों में तेजी को चीनी की वास्तविक कमी से जोड़ना सही नहीं होगा।
उत्पादन अनुमान में भी आई बड़ी कटौती
इस सीजन में चीनी उत्पादन के शुरुआती अनुमान में भी कमी आई है। मौसम से जुड़ी चुनौतियों, महाराष्ट्र में पेराई दर में कमी और उत्तर प्रदेश में रेड-रॉट बीमारी जैसी समस्याओं का असर उत्पादन पर पड़ा है।
एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन से पहले ग्रॉस चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान करीब 345 लाख टन था, जिसे अब घटाकर लगभग 309 लाख टन किया गया है।
कम उत्पादन अनुमान ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। हालांकि, ISMA का कहना है कि ओपनिंग स्टॉक और अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक को देखते हुए घरेलू जरूरत पूरी करने में तत्काल कोई बड़ी समस्या नहीं है।
सरकार के इन दो फैसलों से मिल सकती है राहत
बढ़ती कीमतों और बाजार में बने असमंजस को देखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें सबसे अहम है 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देना।
इसके अलावा डीलरों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट भी लागू की गई है। ISMA के मुताबिक, इन उपायों का उद्देश्य बाजार में घबराहट कम करना और सप्लाई को सामान्य बनाए रखना है।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि व्यापारियों के लिए मौजूदा 400 टन की स्टॉक सीमा को घटाकर 200 टन किया जाना चाहिए। इससे अनावश्यक स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति पर लगाम लग सकती है।
एक्स-मिल कीमतों में पहले ही आई नरमी
सरकार के इन कदमों के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिली है।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में एक्स-मिल कीमतें फिलहाल करीब 55-56 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बताई जा रही हैं।
ISMA को उम्मीद है कि एक्स-मिल कीमतों में आई नरमी का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देगा। यानी आने वाले दिनों में ग्राहकों को चीनी के दाम में कुछ राहत मिल सकती है।
क्या एथेनॉल की वजह से बढ़ी चीनी की कीमत?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्ट किए जाने से घरेलू बाजार में सप्लाई कम हुई है।
ISMA ने इस दावे को खारिज किया है। संगठन के मुताबिक, एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को खाने योग्य चीनी की सप्लाई के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करने वाली वजह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
इस साल तीसरी तिमाही तक करीब 29 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई है। पूरे सीजन में यह आंकड़ा करीब 30 लाख टन रहने का अनुमान है।
ISMA के मुताबिक, ऐतिहासिक तौर पर भी एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन लगभग 20-40 लाख टन के दायरे में रहा है। इसलिए मौजूदा कीमतों में तेजी का पूरा कारण एथेनॉल डायवर्जन को बताना उचित नहीं है।
नए पेराई सीजन से बढ़ेगी सप्लाई
अगले मार्केटिंग वर्ष 2026-27 में चीनी की सप्लाई को लेकर भी उद्योग तैयारी कर रहा है। ISMA और NFCSF पेराई सीजन को सामान्य समय से करीब 10-15 दिन पहले शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई पहले ही शुरू होने की जानकारी दी गई है। नए सीजन की जल्दी शुरुआत और आयातित रॉ शुगर की उपलब्धता से अक्टूबर में चीनी उत्पादन करीब 10 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
आमतौर पर अक्टूबर में उत्पादन करीब 4 लाख टन के आसपास रहता है। ऐसे में यदि पेराई जल्दी शुरू होती है तो त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार में नई सप्लाई पहुंच सकती है।
अगले 7 दिनों में क्या होगा चीनी के दाम का रुख?
ISMA के बयान और बाजार में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों में नरमी की संभावना बनी हुई है। पैनिक बाइंग कम होने, स्टॉक सीमा लागू होने और शुल्क-मुक्त रॉ शुगर के आयात से बाजार में सप्लाई को लेकर भरोसा बढ़ सकता है।
हालांकि, खुदरा कीमतों में गिरावट कितनी और कितनी तेजी से आती है, यह स्थानीय सप्लाई, थोक कारोबारियों के स्टॉक और त्योहारों के दौरान मांग पर निर्भर करेगा।
फिलहाल ISMA का स्पष्ट संदेश यही है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है। इसलिए मौजूदा तेजी को लेकर घबराकर जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने के बजाय बाजार की सामान्य स्थिति लौटने का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
नोट: चीनी की कीमतें शहर, ब्रांड, गुणवत्ता और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। ऊपर दिए गए आंकड़े उपलब्ध उद्योग एवं सरकारी आंकड़ों पर आधारित हैं।


