भारत में लंबे समय तक खेल को एक “साइड ऑप्शन” माना जाता रहा है—पढ़ाई के साथ खेलने वाली चीज़। लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है। गुरुग्राम के Lancers International School में आयोजित SCORE 2026 इवेंट ने इसी बदलाव को केंद्र में रखकर एक नई तस्वीर पेश की—जहां खेल सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि एक पूरा करियर इकोसिस्टम बन चुका है।
इस कार्यक्रम का आयोजन International School Sports Organisation (ISSO) ने किया, और इसका उद्देश्य साफ था—छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को यह समझाना कि आज का स्पोर्ट्स सेक्टर कितनी तेजी से बदल रहा है और इसमें कितने नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
एक इवेंट नहीं, करियर की नई दिशा
SCORE 2026 की शुरुआत औपचारिक उद्घाटन और स्वागत भाषण के साथ हुई, लेकिन असली फोकस था—“स्पोर्ट्स को करियर के रूप में कैसे समझा जाए”।
कार्यक्रम में Remus D’Cruz, जो Apollo Tyres में ग्लोबल ब्रांड स्ट्रैटेजी हेड हैं, ने अपने कीनोट में साफ कहा कि आने वाले समय में स्पोर्ट्स इंडस्ट्री सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें ब्रांडिंग, मीडिया, टेक्नोलॉजी और डेटा का रोल बढ़ेगा।
उनकी बातों से एक बात स्पष्ट हुई—अगर कोई छात्र खुद खिलाड़ी नहीं भी बनता, तब भी उसके लिए इस सेक्टर में कई दरवाजे खुले हैं।
“Business of Sports”: खेल के पीछे की असली इंडस्ट्री
इवेंट का सबसे चर्चित हिस्सा रहा “Business of Sports” पैनल, जिसे Kala Anand (डायरेक्टर, KPMG India) ने मॉडरेट किया।
इस चर्चा में इंडस्ट्री के कई बड़े नाम शामिल हुए:
- Pablo Tachil – Salesforce
- Neel Shah – Dream Sports Foundation
- Gaurav Chaudhary
- Akbar Akhtar – GMR Group
इस पैनल में जो सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई, वह यह थी कि आज खेल एक “मल्टी-लेयर इंडस्ट्री” बन चुका है। इसमें सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि:
- स्पोर्ट्स मार्केटिंग
- इवेंट मैनेजमेंट
- डेटा एनालिटिक्स
- मीडिया और कंटेंट
- स्पॉन्सरशिप और ब्रांडिंग
जैसे कई सेक्टर जुड़े हुए हैं।
यानी, क्रिकेट या फुटबॉल देखने वाले करोड़ों लोगों के पीछे एक पूरी इकोनॉमी काम कर रही है—और वही असली अवसर है।
खेल + टेक्नोलॉजी = भविष्य की नई जॉब्स
दूसरा अहम सत्र “Sports Science & Tech” पर केंद्रित था, जिसने यह दिखाया कि आने वाले समय में खेल पूरी तरह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन होने वाला है।
इस पैनल में शामिल थे:
- Megha Gambhir – Stupa Sports
- Abhigyan Shekhar – Zupotsu
- Mudit Krishnani
- Kevin Sireau
- Aditi Chauhan
यहां चर्चा सिर्फ फिटनेस या ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रही। बात हुई:
- परफॉर्मेंस साइकोलॉजी
- डेटा आधारित ट्रेनिंग
- एआई और एनालिटिक्स
- स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग
- महिला और समावेशी खेल इकोसिस्टम
इससे एक साफ संकेत मिला कि भविष्य में “स्पोर्ट्स साइंटिस्ट”, “परफॉर्मेंस एनालिस्ट” और “स्पोर्ट्स टेक एक्सपर्ट” जैसी भूमिकाएं तेजी से बढ़ेंगी।
भारत में स्पोर्ट्स करियर: अब क्यों सही समय है?
अगर इस पूरे इवेंट को एक लाइन में समझें, तो यह साफ है कि भारत में स्पोर्ट्स सेक्टर अब एक “उभरती हुई इंडस्ट्री” बन चुका है।
इसके पीछे कई कारण हैं:
पहला—डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के कारण खेल अब हर स्क्रीन तक पहुंच चुका है।
दूसरा—आईपीएल जैसे लीग मॉडल ने दिखा दिया है कि खेल भी बड़ा बिजनेस हो सकता है।
तीसरा—सरकार और निजी सेक्टर दोनों इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रहे हैं।
SCORE 2026 में वक्ताओं ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास युवा आबादी का बड़ा फायदा है, लेकिन अगर इस ऊर्जा को सही दिशा नहीं दी गई, तो यह अवसर हाथ से निकल सकता है।
सिर्फ खिलाड़ी बनना ही रास्ता नहीं
इवेंट की सबसे अहम सीख यही रही कि “स्पोर्ट्स करियर = सिर्फ खिलाड़ी बनना” वाली सोच अब पुरानी हो चुकी है।
आज एक छात्र के पास विकल्प हैं:
- स्पोर्ट्स मैनेजर
- फिटनेस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट
- डेटा एनालिस्ट
- कमेंटेटर या कंटेंट क्रिएटर
- स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट
- टेक्नोलॉजी डेवलपर
यानी, अगर किसी को खेल पसंद है, तो उसे मैदान में उतरने की जरूरत नहीं—वह पर्दे के पीछे भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष: भारत में स्पोर्ट्स का “टर्निंग पॉइंट”
SCORE 2026 सिर्फ एक इवेंट नहीं था, बल्कि एक संकेत था कि भारत में स्पोर्ट्स सेक्टर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
International School Sports Organisation जैसे प्लेटफॉर्म अगर लगातार ऐसे प्रयास करते रहे, तो आने वाले वर्षों में स्पोर्ट्स करियर को लेकर धारणा पूरी तरह बदल सकती है।
आज के छात्र के लिए यह एक साफ मैसेज है—
अगर आप खेल से जुड़े हैं या उसमें रुचि रखते हैं, तो यह सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक मजबूत करियर विकल्प भी हो सकता है।
और शायद यही SCORE 2026 का सबसे बड़ा संदेश था—
खेल अब सिर्फ खेल नहीं रहा, यह एक पूरा भविष्य बन चुका है।
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