नई दिल्ली: भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने रेल यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। IRCTC ने ट्रेनों में अवैध रूप से भोजन पहुंचाने वाले 14 वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स को स्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है। इसके साथ ही इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आपराधिक मामलों की भी शुरुआत की गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म न केवल यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे थे, बल्कि साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय नुकसान का भी कारण बन सकते थे।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब देशभर में रेलवे ई-कैटरिंग सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और लाखों यात्री ऑनलाइन माध्यम से ट्रेन में भोजन ऑर्डर कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
IRCTC के अनुसार, कई निजी वेबसाइट और मोबाइल ऐप खुद को रेलवे की अधिकृत ई-कैटरिंग सेवा जैसा दिखाकर यात्रियों से ऑर्डर ले रहे थे। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से यात्रियों से PNR नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और ऑनलाइन भुगतान संबंधी जानकारियां ली जाती थीं।
जांच में पाया गया कि इनमें से कई प्लेटफॉर्म बिना किसी वैध अनुमति के काम कर रहे थे। कई मामलों में यात्रियों को भोजन नहीं मिला, जबकि भुगतान पहले ही लिया जा चुका था। शिकायत करने पर ग्राहक सहायता भी उपलब्ध नहीं थी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां यात्रियों के भरोसे के साथ खिलवाड़ करने के अलावा साइबर अपराधों को भी बढ़ावा देती हैं।
यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी था खतरा
IRCTC ने बताया कि इन अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कई भोजन विक्रेता भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की मंजूरी के बिना काम कर रहे थे।
खाने की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। कई रसोईघरों का कोई पंजीकरण नहीं था और वहां काम करने वाले कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान खराब गुणवत्ता वाला भोजन यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। फूड पॉइजनिंग, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
किन वेबसाइटों और ऐप्स पर लगा प्रतिबंध?
IRCTC द्वारा जिन वेबसाइटों और ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें शामिल हैं:
- railrestro.com
- railrestro.in
- railmitra.com
- travelkhana.com
- trainscafe.com
- dibrail.com
- railfood.net
- comesum.com
- travelerfood.com
- foodontrack.in
- ecatering.app
- khanaonline.in
- trainway.in
- railmeal.com
- trainmenu.com
रेलवे का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने से यात्रियों को बचना चाहिए और केवल अधिकृत माध्यमों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
साइबर धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधियों ने भी नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। रेलवे टिकट और भोजन सेवा से जुड़े फर्जी प्लेटफॉर्म यात्रियों को आसान टारगेट मानते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई यात्री अनधिकृत वेबसाइट पर अपना PNR, मोबाइल नंबर या बैंकिंग जानकारी साझा करता है, तो उसका डेटा गलत हाथों में पहुंच सकता है। इसके बाद फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक और बैंकिंग धोखाधड़ी की घटनाएं हो सकती हैं।
इसी वजह से IRCTC लगातार यात्रियों को केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म के उपयोग की सलाह देता रहा है।
केवल इन माध्यमों से ही ऑर्डर करें भोजन
IRCTC ने स्पष्ट किया है कि ट्रेन में भोजन ऑर्डर करने के लिए यात्रियों को केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए।
यात्री निम्नलिखित माध्यमों से सुरक्षित भोजन बुक कर सकते हैं:
- IRCTC की आधिकारिक ई-कैटरिंग वेबसाइट
- फूड ऑन ट्रैक (Food on Track) मोबाइल ऐप
- हेल्पलाइन नंबर 1323
इन प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर करने से भुगतान सुरक्षित रहता है और शिकायत निवारण की व्यवस्था भी उपलब्ध होती है।
Zomato, Swiggy और बड़े ब्रांड्स के साथ साझेदारी
रेलवे यात्रियों को बेहतर सेवा देने के लिए IRCTC ने कई बड़े फूड ब्रांड्स के साथ साझेदारी की हुई है। इनमें Zomato, Swiggy, Domino’s, Haldiram’s और KFC जैसे नाम शामिल हैं।
वर्तमान में यह सुविधा देश के 400 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 के दौरान प्रतिदिन औसतन 1.55 लाख से अधिक भोजन ऑर्डर किए गए। इससे साफ है कि रेलवे ई-कैटरिंग सेवा यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
यात्रियों के लिए क्या है सीख?
रेलवे की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किसी भी वेबसाइट या ऐप पर भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए।
विशेष रूप से रेलवे सेवाओं के मामले में केवल IRCTC के अधिकृत प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना चाहिए। इससे न केवल सुरक्षित भोजन मिलेगा बल्कि साइबर धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान से भी बचाव होगा।
रेलवे का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अवैध प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अभियान जारी रहेगा ताकि यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवाएं मिलती रहें।


