नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अब ग्रीन एनर्जी और भविष्य की टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन को रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिल गई है। यह ट्रेन उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन के जिन्द-सोनीपत सेक्शन पर चलाई जाएगी। रेलवे बोर्ड ने 22 मई 2026 को जारी पत्र के जरिए इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी दी है।
यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि भी मानी जा रही है। हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां हाइड्रोजन फ्यूल आधारित ट्रेनें कमर्शियल ऑपरेशन में हैं।
रेलवे बोर्ड ने जारी किया मंजूरी पत्र
रेल मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) और उत्तर रेलवे को आधिकारिक स्वीकृति पत्र भेजा है। यह मंजूरी 10 कोच वाले हाइड्रोजन ट्रेन सेट के लिए दी गई है।
रेलवे बोर्ड ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि ट्रेन को CCRS यानी Commissioner of Railway Safety की सुरक्षा प्रक्रिया और RDSO के तकनीकी परीक्षणों के आधार पर मंजूरी दी गई है।
हालांकि अभी तक इस ट्रेन के नियमित कमर्शियल संचालन की तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन रेलवे सूत्रों का मानना है कि जल्द ही इसका संचालन शुरू हो सकता है।
जिन्द-सोनीपत सेक्शन क्यों चुना गया?
रेलवे ने इस ट्रेन के लिए दिल्ली डिवीजन के जिन्द-सोनीपत सेक्शन को चुना है। इसके पीछे कई तकनीकी कारण बताए जा रहे हैं।
यह सेक्शन अपेक्षाकृत कम भीड़ वाला माना जाता है, जिससे नई तकनीक का परीक्षण और संचालन आसान रहेगा। इसके अलावा इस रूट पर पहले ही Hydrogen Fuel Cell आधारित DEMU ट्रेन का ट्रायल सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
RDSO की निगरानी में हुए इन ट्रायल्स में ट्रेन के इंजन, फ्यूल सेल, पावर सिस्टम और सुरक्षा मानकों की जांच की गई थी। सफल परीक्षण के बाद अब रेलवे बोर्ड ने इसे ऑपरेशन के लिए मंजूरी दी है।
75 KM प्रति घंटा होगी स्पीड
रेलवे बोर्ड के पत्र के अनुसार इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। शुरुआत में इसे नियंत्रित गति के साथ चलाया जाएगा ताकि तकनीकी प्रदर्शन और सुरक्षा की लगातार निगरानी की जा सके। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में तकनीकी सुधार के बाद इसकी स्पीड और क्षमता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।
दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन होगी भारत की ट्रेन
भारतीय रेलवे की यह परियोजना कई मायनों में खास है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन होगी जिसमें कुल 10 डिब्बे लगाए जाएंगे। इसके अलावा यह ट्रेन 2400 किलोवॉट क्षमता के साथ दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में भी शामिल होगी।
अभी तक जर्मनी और चीन जैसे देशों में कम डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन भारत ने सीधे बड़े ट्रेन सेट के साथ शुरुआत करने का फैसला लिया है।
Broad Gauge प्लेटफॉर्म पर विकसित हुई ट्रेन
भारत की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन Broad Gauge नेटवर्क के लिए विकसित की गई है। भारत में ज्यादातर रेलवे नेटवर्क Broad Gauge पर आधारित है, इसलिए यह तकनीक भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा सकती है।
रेलवे के लिए यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि यदि यह मॉडल सफल होता है तो डीजल ट्रेनों को धीरे-धीरे हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों से बदला जा सकता है।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन की जगह Hydrogen Fuel Cell Technology का इस्तेमाल किया जाता है।
इस तकनीक में हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली पैदा होती है। यही बिजली ट्रेन को चलाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रक्रिया में प्रदूषण के रूप में सिर्फ पानी और भाप निकलती है।
यानी यह ट्रेन पूरी तरह Zero Carbon Emission मॉडल पर आधारित होगी।
पर्यावरण के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
भारत सरकार और रेलवे दोनों अगले कुछ वर्षों में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। रेलवे पहले ही 2030 तक Net Zero Carbon Emitter बनने का लक्ष्य घोषित कर चुका है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को रेलवे की Green Mobility Strategy का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तकनीक सफल रहती है तो आने वाले समय में डीजल आधारित लोकल और DEMU ट्रेनों को हाइड्रोजन तकनीक से बदला जा सकता है।
किन देशों में पहले से चल रही हैं हाइड्रोजन ट्रेनें?
इस समय जर्मनी, जापान, चीन और स्वीडन जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं। जर्मनी ने दुनिया की पहली कमर्शियल हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू की थी। वहीं चीन और जापान भी तेजी से इस तकनीक पर काम कर रहे हैं।
अब भारत भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है, जो रेलवे टेक्नोलॉजी के लिहाज से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत के लिए क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भविष्य में भारत के लिए कई फायदे लेकर आ सकती हैं:
- डीजल पर निर्भरता कम होगी
- प्रदूषण घटेगा
- ऑपरेटिंग लागत में कमी आ सकती है
- Green Energy सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा
- रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा
इसके अलावा भारत में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत सरकार पहले ही बड़े निवेश की योजना पर काम कर रही है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि भारतीय रेलवे इस ट्रेन का कमर्शियल संचालन कब शुरू करता है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक शुरुआती चरण में सीमित संख्या में सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। इसके बाद प्रदर्शन और यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें शुरू करने की योजना बनाई जा सकती है।
यदि यह परियोजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे पूरी दुनिया के लिए Green Rail Technology का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
Also Read:


