UP Board Improvement Exam 2026 में यूपी बोर्ड ने परीक्षा कॉपियों की सुरक्षा के लिए भारतीय डाक विभाग के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। जानिए कैसे बदलेगी आंसर शीट ट्रांसपोर्ट व्यवस्था और छात्रों को क्या होगा फायदा।
UP Board Improvement Exam 2026: परीक्षा कॉपियों की सुरक्षा के लिए यूपी बोर्ड का बड़ा कदम
UP Board Improvement Exam 2026: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। हाल ही में आयोजित हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा 2026 के दौरान परिषद ने पहली बार भारतीय डाक विभाग के सहयोग से उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।
यदि यह प्रयोग सफल साबित होता है, तो वर्ष 2027 की नियमित यूपी बोर्ड परीक्षाओं में भी इसी व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। इससे लाखों विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और समयबद्ध मूल्यांकन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
भारतीय डाक विभाग को सौंपी गई उत्तर पुस्तिकाओं की जिम्मेदारी
यूपी बोर्ड ने परीक्षा सामग्री की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय डाक विभाग के साथ साझेदारी की है। नई व्यवस्था के तहत सभी 75 जिलों के जिला कलेक्शन सेंटर से उत्तर पुस्तिकाओं को राज्य के मुख्य संग्रह केंद्र सरकारी इंटर कॉलेज (GIC), प्रयागराज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डाक विभाग ने संभाली।
जिन जिलों में एक से अधिक परीक्षा केंद्र थे, वहां परीक्षा समाप्त होने के बाद शिक्षक और शिक्षा विभाग के कर्मचारी पहले उत्तर पुस्तिकाओं को जिला कलेक्शन सेंटर तक लेकर पहुंचे। इसके बाद आगे की पूरी परिवहन प्रक्रिया डाक विभाग ने संभाली।
28 जुलाई की कंपार्टमेंट परीक्षा में हुआ पायलट प्रोजेक्ट
यह नई व्यवस्था 28 जुलाई 2026 को आयोजित हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षाओं के दौरान पहली बार लागू की गई।
बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह जांचना था कि डाक विभाग के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं का सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन कितना प्रभावी साबित होता है।
यूपी बोर्ड सचिव ने क्या कहा?
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि पहली बार डाक विभाग ने एक जिले से दूसरे जिले तक उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन की जिम्मेदारी निभाई है।
उन्होंने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यदि परिणाम संतोषजनक रहे, तो अगले वर्ष आयोजित होने वाली नियमित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी।
स्कैनिंग के बाद डिजिटल प्रक्रिया से होगा मूल्यांकन
नई व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को प्रयागराज स्थित GIC में पहुंचने के बाद स्कैन किया गया।
इसके बाद डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर इन्हें प्रयागराज, मेरठ और वाराणसी स्थित मूल्यांकन केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षक मूल्यांकन पूरा करने के बाद विद्यार्थियों के अंक ऑनलाइन अपलोड करेंगे।
इस प्रक्रिया से उत्तर पुस्तिकाओं की ट्रैकिंग भी आसान होगी और रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
नई व्यवस्था से क्या होंगे फायदे?
यूपी बोर्ड का मानना है कि इस नई प्रणाली से कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
- उत्तर पुस्तिकाओं के खोने या चोरी होने का जोखिम कम होगा।
- परिवहन प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी।
- शिक्षकों एवं कर्मचारियों पर अतिरिक्त परिवहन जिम्मेदारी कम होगी।
- सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाला खर्च घट सकता है।
- मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध होगी।
- बड़े स्तर की बोर्ड परीक्षाओं में लॉजिस्टिक मैनेजमेंट बेहतर होगा।
पहले भी सामने आ चुके हैं सुरक्षा से जुड़े मामले
उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
मार्च 2024 में मुजफ्फरनगर में उत्तर पुस्तिकाएं ले जा रहे एक शिक्षक की पुलिस एस्कॉर्ट से जुड़े विवाद में मौत की घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया था।
इसके अलावा इस वर्ष कई स्थानों पर ऐसी खबरें भी सामने आईं कि कर्मचारी ई-रिक्शा, स्कूटर और मोटरसाइकिल से उत्तर पुस्तिकाएं ले जा रहे थे, जबकि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षित परिवहन व्यवस्था अनिवार्य थी।
इन्हीं घटनाओं को देखते हुए यूपी बोर्ड ने सुरक्षित और केंद्रीकृत परिवहन व्यवस्था पर काम शुरू किया है।
कितने छात्रों ने दी कंपार्टमेंट परीक्षा?
28 जुलाई 2026 को आयोजित यूपी बोर्ड कंपार्टमेंट एवं इम्प्रूवमेंट परीक्षा के लिए कुल 42,078 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।
इनमें—
- कुल पंजीकृत अभ्यर्थी: 42,078
- परीक्षा में शामिल हुए: 39,543
- अनुपस्थित रहे: 2,535
वहीं नियमित यूपी बोर्ड परीक्षा में हर वर्ष लगभग 50 लाख से अधिक विद्यार्थी और करीब 8,000 परीक्षा केंद्र शामिल होते हैं। ऐसे में उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित ढुलाई बोर्ड के लिए एक बड़ी चुनौती रहती है।
निष्कर्ष
यूपी बोर्ड द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के परिवहन में भारतीय डाक विभाग की भागीदारी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। यदि कंपार्टमेंट परीक्षा में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में लाखों विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तेज हो सकती है।


