India Trade Diversification Strategy: भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए दक्षिण अमेरिका पर फोकस बढ़ा रहा है। चिली, अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने की दिशा में अहम बातचीत होने वाली है। खासतौर पर चिली के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) और भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौते के विस्तार पर नजर है।
नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार में लगातार बदलते समीकरणों के बीच भारत अपनी ट्रेड डायवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजी को मजबूत कर रहा है। इसके तहत भारत दक्षिण अमेरिका के प्रमुख देशों चिली, अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ कारोबारी रिश्तों को और विस्तार देने की तैयारी में है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल 24 से 28 अगस्त के बीच इन देशों की यात्रा करेंगे।
इस दौरान अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ संयुक्त व्यापार बैठकों की अध्यक्षता की जाएगी, जबकि चिली के साथ प्रस्तावित व्यापक व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा होगी। भारत की नजर इन बाजारों में निर्यात के नए अवसर तलाशने के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स और जरूरी कच्चे माल की सुरक्षित सप्लाई पर भी है।
चिली के साथ व्यापार समझौता अंतिम चरण में
भारत और चिली के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कुछ ही मुद्दे अब लंबित हैं और उन्हें सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
चिली में होने वाली बैठकों में मार्केट एक्सेस और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। भारत और चिली के बीच साल 2006 से प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) लागू है। अब दोनों देश इसके दायरे को बढ़ाकर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
प्रस्तावित समझौते में डिजिटल सेवाओं, निवेश, MSME सहयोग और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किए जाने की संभावना है।
भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स क्यों हैं अहम?
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, सोलर पैनल, विंड टरबाइन और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक उद्योगों को बढ़ावा दे रहा है। इन क्षेत्रों के लिए कई तरह के क्रिटिकल मिनरल्स जरूरी होते हैं।
ऐसे में इन खनिजों की लगातार और भरोसेमंद सप्लाई भारत की आर्थिक और तकनीकी रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है। वैश्विक सप्लाई चेन में कुछ देशों का दबदबा होने के कारण भारत अलग-अलग संसाधन संपन्न देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है।
दक्षिण अमेरिका इस लिहाज से भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चिली जैसे देश खनिज संसाधनों से समृद्ध हैं। भारत व्यापार समझौतों के जरिए न सिर्फ आयात के स्रोतों को विविध बनाना चाहता है, बल्कि भविष्य के उद्योगों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को भी सुरक्षित करना चाहता है।
चिली क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
चिली लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई क्षेत्र यानी LAC में भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर अब तक चार दौर की बातचीत हो चुकी है। आखिरी दौर दिसंबर 2025 में हुआ था।
इसके बाद चिली में राष्ट्रपति चुनाव के बाद सरकार बदल गई। जोस एंटोनियो कास्ट के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव सरकार ने 11 मार्च 2026 को सत्ता संभाली। इसके बाद औपचारिक बातचीत आगे नहीं बढ़ी थी।
अब भारत की ओर से होने वाली उच्चस्तरीय यात्रा को इस प्रक्रिया को फिर गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार चिली की नई सरकार भी प्रस्तावित समझौते को लेकर सकारात्मक रुख रखती है।
अर्जेंटीना और ब्राजील पर भी भारत का फोकस
दक्षिण अमेरिका में भारत की रणनीति सिर्फ चिली तक सीमित नहीं है। अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ भी व्यापार बढ़ाने के नए रास्तों पर चर्चा होगी।
दोनों देश दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र के बड़े बाजार हैं और वहां भारतीय मूल के लोगों की भी मौजूदगी है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में विविधता लाने और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच भारत के लिए इन देशों का महत्व और बढ़ गया है।
भारत इन बाजारों में अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए नए अवसर तलाशने के साथ-साथ जरूरी कच्चे माल और संसाधनों की सप्लाई को भी मजबूत करना चाहता है।
मर्कोसुर के साथ व्यापार समझौता बढ़ाने की तैयारी
अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ बातचीत के दौरान भारत-मर्कोसुर प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) का दायरा बढ़ाने का मुद्दा भी उठ सकता है।
मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का प्रमुख व्यापारिक समूह है, जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं। भारत और मर्कोसुर के बीच PTA 1 जून 2009 से लागू है।
हालांकि मौजूदा समझौते का दायरा काफी सीमित है। इसमें करीब 450 टैरिफ लाइन यानी उत्पाद शामिल हैं। अब दोनों पक्ष इस समझौते को ज्यादा व्यापक बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
इसके लिए बातचीत शुरू करने से पहले जरूरी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा चल रही है।
ब्राजील के साथ चीनी विवाद भी अहम मुद्दा
भारत और ब्राजील के बीच व्यापारिक संबंधों के साथ कुछ व्यापारिक विवाद भी मौजूद हैं। इनमें WTO से जुड़ा चीनी व्यापार विवाद महत्वपूर्ण है।
ब्राजील ने भारत की गन्ना और चीनी क्षेत्र से जुड़ी घरेलू सहायता तथा चीनी निर्यात से संबंधित उपायों पर WTO में आपत्ति जताई है। उसका आरोप है कि भारत की कुछ नीतियां WTO के कृषि समझौते और सब्सिडी से संबंधित प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।
भारत ने इन आरोपों का विरोध किया है और कहा है कि उसकी चीनी क्षेत्र से जुड़ी नीतियां WTO के तहत उसकी प्रतिबद्धताओं और अधिकारों के अनुरूप हैं।
ऐसे में भारत-ब्राजील बातचीत में व्यापार बढ़ाने के साथ इन मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना बनी हुई है।
चिली, अर्जेंटीना और ब्राजील से कितना व्यापार करता है भारत?
दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ भारत का व्यापार तेजी से बढ़ा है। 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर काफी दिलचस्प है।
भारत-अर्जेंटीना व्यापार
2025-26 में भारत और अर्जेंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25.5 फीसदी बढ़कर 5.96 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे पहले यह करीब 4.75 अरब डॉलर था।
- भारत का निर्यात: 1.01 अरब डॉलर
- भारत का आयात: 4.95 अरब डॉलर
- कुल व्यापार: 5.96 अरब डॉलर
भारत-ब्राजील व्यापार
भारत और ब्राजील के बीच भी व्यापार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। 2025-26 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 23.48 फीसदी बढ़कर करीब 15 अरब डॉलर हो गया।
- भारत का निर्यात: 7 अरब डॉलर
- भारत का आयात: 8 अरब डॉलर
- कुल व्यापार: 15 अरब डॉलर
भारत-चिली व्यापार
चिली के साथ भारत का व्यापार सबसे तेज गति से बढ़ा। 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 66.45 फीसदी बढ़कर 6.25 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले यह करीब 3.75 अरब डॉलर था।
- भारत का निर्यात: 1.22 अरब डॉलर
- भारत का आयात: 5.03 अरब डॉलर
- कुल व्यापार: 6.25 अरब डॉलर
भारत की रणनीति में दक्षिण अमेरिका क्यों महत्वपूर्ण?
भारत लंबे समय से अपने व्यापार को कुछ चुनिंदा बाजारों पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाने की कोशिश कर रहा है। दक्षिण अमेरिका इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चिली, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों के साथ बेहतर व्यापार समझौते से भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिल सकते हैं। वहीं भारत को जरूरी खनिज, कृषि उत्पाद और अन्य कच्चे माल की सप्लाई के नए स्रोत भी मिल सकते हैं।
खासकर क्रिटिकल मिनरल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए यह रणनीति आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
आगे क्या होगा?
वाणिज्य सचिव की 24 से 28 अगस्त की यात्रा के दौरान चिली, अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ कई अहम व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। चिली के साथ CEPA बातचीत को आगे बढ़ाना, अर्जेंटीना और ब्राजील के साथ द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार और मर्कोसुर के साथ मौजूदा PTA का दायरा बढ़ाना भारत के प्रमुख एजेंडे में रह सकता है।
अगर इन वार्ताओं में ठोस प्रगति होती है, तो इससे भारत को नए निर्यात बाजार, जरूरी खनिजों की बेहतर सप्लाई और वैश्विक व्यापार में अधिक विविधता हासिल करने में मदद मिल सकती है।


