देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में नए बैंक खाते खोलने की रफ्तार जानबूझकर धीमी रखी। पहली नजर में यह फैसला हैरान करने वाला लग सकता है, क्योंकि आमतौर पर बैंक ज्यादा से ज्यादा नए ग्राहक जोड़कर अपनी जमा राशि (Deposits) बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन HDFC बैंक की रणनीति कुछ अलग थी। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसका फोकस केवल ग्राहक संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकिंग सिस्टम तैयार करने पर था।
बैंक का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग के तेजी से बढ़ते दौर में केवल तेजी से अकाउंट खोलना पर्याप्त नहीं है। यदि बैंकिंग सिस्टम में फर्जी या संदिग्ध खाते शामिल हो जाएं, तो इससे ग्राहकों, बैंक और पूरे वित्तीय तंत्र के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है। इसी कारण HDFC बैंक ने विस्तार की गति कम करते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
नए खाते खोलने की रफ्तार क्यों घटाई?
HDFC बैंक के प्रबंध निदेशक और CEO शशिधर जगदीशन ने तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों से बातचीत में बताया कि हाल के वर्षों में कई धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए किया गया। डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराधों में बढ़ोतरी को देखते हुए बैंक ने नए ग्राहकों को जोड़ने की प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बनाने का फैसला किया।
बैंक ने कहा कि उसका उद्देश्य सिर्फ अधिक खाते खोलना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि हर नया ग्राहक पूरी तरह सत्यापित हो और उसका खाता किसी भी संदिग्ध गतिविधि के लिए इस्तेमाल न हो सके।
मजबूत किए गए ऑनबोर्डिंग सिस्टम
HDFC बैंक ने नए ग्राहकों की जांच प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया। इसके लिए बैंक ने आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया।
मुख्य बदलावों में शामिल हैं:
- एडवांस एल्गोरिदम आधारित ग्राहक सत्यापन।
- Rule-Based Risk Assessment System।
- संभावित संदिग्ध खातों की पहले से पहचान करने की तकनीक।
- KYC और ग्राहक सत्यापन प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना।
- डिजिटल ऑनबोर्डिंग सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा जांच।
इन तकनीकों की मदद से बैंक अब ऐसे खातों की पहचान शुरुआती चरण में ही कर सकता है, जिनमें भविष्य में धोखाधड़ी का जोखिम हो सकता है।
तीन वर्षों तक सुरक्षा पर रहा पूरा फोकस
HDFC बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान नए ग्राहकों को जोड़ने की रफ्तार इसी रणनीति के तहत अपेक्षाकृत धीमी रही।
इस दौरान बैंक ने:
- ग्राहक संख्या बढ़ाने की बजाय सिस्टम को मजबूत किया।
- फ्रॉड डिटेक्शन मैकेनिज्म विकसित किया।
- डिजिटल सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाया।
- ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया।
बैंक का कहना है कि यह अस्थायी रणनीति थी, जिसका उद्देश्य भविष्य में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना था।
CASA डिपॉजिट क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
बैंकिंग कारोबार में CASA (Current Account Saving Account) सबसे कम लागत पर मिलने वाला फंड माना जाता है।
इन्हीं जमा राशियों का उपयोग बैंक:
- ग्राहकों को होम लोन देने में,
- बिजनेस लोन जारी करने में,
- पर्सनल लोन उपलब्ध कराने में,
- और अन्य बैंकिंग गतिविधियों के लिए करता है।
यदि बैंक के पास पर्याप्त CASA डिपॉजिट होते हैं, तो उसे बाजार से ऊंची ब्याज दर पर धन जुटाने की आवश्यकता कम पड़ती है। यही कारण है कि लगभग हर बैंक नए ग्राहकों को जोड़ने और CASA बढ़ाने पर विशेष जोर देता है।
अब फिर बढ़ेगी नए ग्राहकों को जोड़ने की रफ्तार
HDFC बैंक का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का काम अब काफी हद तक पूरा हो चुका है। बैंक को भरोसा है कि उसकी नई तकनीकी प्रणाली फर्जी और संदिग्ध खातों की पहचान पहले से कहीं बेहतर तरीके से कर सकती है।
इसी वजह से बैंक अब दोबारा नए ग्राहकों को तेजी से जोड़ने की योजना बना रहा है। हालांकि बैंक का कहना है कि इस बार विस्तार की गति बढ़ेगी, लेकिन सुरक्षा और ग्राहक सत्यापन के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
डिजिटल बैंकिंग में सुरक्षा बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
आज अधिकांश बैंकिंग सेवाएं मोबाइल ऐप और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से उपलब्ध हैं। ऐसे में साइबर फ्रॉड, फर्जी खाते और डिजिटल वित्तीय अपराध लगातार नई चुनौती बनते जा रहे हैं। HDFC बैंक का मानना है कि लंबे समय में सुरक्षित ग्राहक आधार तैयार करना केवल तेज विस्तार से अधिक महत्वपूर्ण है।
बैंक की यह रणनीति दिखाती है कि भविष्य की बैंकिंग केवल अधिक ग्राहकों की संख्या पर नहीं, बल्कि भरोसेमंद और सुरक्षित बैंकिंग इकोसिस्टम बनाने पर आधारित होगी।
निष्कर्ष
HDFC बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में नए खाते खोलने की रफ्तार इसलिए धीमी रखी क्योंकि उसका उद्देश्य केवल ग्राहक संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना था। आधुनिक एल्गोरिदम, सख्त KYC प्रक्रिया और जोखिम पहचान प्रणाली विकसित करने के बाद अब बैंक दोबारा तेज गति से नए ग्राहकों को जोड़ने की तैयारी कर रहा है। यह रणनीति बताती है कि डिजिटल बैंकिंग के दौर में सुरक्षा और भरोसा ही किसी बैंक की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।


