नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताते हुए कहा है कि वैश्विक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि उन्होंने साफ चेतावनी दी कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक विकास के लिए बड़ा जोखिम बन सकते हैं।
दूरदर्शन को दिए एक इंटरव्यू में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार और आरबीआई दोनों स्थिति के अनुसार जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
Highlights
- RBI गवर्नर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बताया मजबूत
- कच्चे तेल की कीमतों और कमजोर मानसून को बताया सबसे बड़ा जोखिम
- पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता
- भारतीय रुपया अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर
- अगस्त में होने वाली MPC बैठक पर बाजार की नजर
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद मजबूत बनी हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका असर कई देशों की मुद्राओं पर पड़ा है और अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हुआ है।
इसके बावजूद भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। उनके मुताबिक यह भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और बेहतर बाहरी वित्तीय स्थिति का संकेत है।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था कई मजबूत स्तंभों के सहारे आगे बढ़ रही है, जिससे वैश्विक संकट का असर सीमित रहने की उम्मीद है।
इन वजहों से मिल रही है अर्थव्यवस्था को मजबूती
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे कई अहम कारण हैं।
- सेवा क्षेत्र का लगातार बढ़ता निर्यात
- विदेशों में रहने वाले भारतीयों से रिकॉर्ड रेमिटेंस
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में मजबूती
- नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA)
- मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार
- बाहरी क्षेत्र की बेहतर स्थिति
उन्होंने कहा कि ये सभी कारक भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत बनाए रखने में मदद कर रहे हैं और भविष्य में निर्यात को भी गति मिलेगी।
सरकार के कदमों का भी मिलेगा फायदा
संजय मल्होत्रा ने कहा कि सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश के नियम आसान किए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का भी देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ताएं सफल होने पर भारत के निर्यात और विदेशी निवेश को नई मजबूती मिल सकती है।
RBI गवर्नर ने किन दो बड़े जोखिमों की चेतावनी दी?
1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो:
- आयात बिल बढ़ेगा
- चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है
- पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन महंगा हो सकता है
- परिवहन लागत बढ़ेगी
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है
2. कमजोर मानसून
भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो:
- फसलों का उत्पादन घट सकता है
- खाद्यान्न की कीमतें बढ़ सकती हैं
- ग्रामीण मांग कमजोर पड़ सकती है
- खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा रहेगा
आरबीआई का मानना है कि ये दोनों कारक आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक विकास की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल महंगाई नियंत्रण में
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिलहाल खुदरा महंगाई लगभग 4% के आसपास बनी हुई है, जो केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के अनुरूप है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- जून में खुदरा महंगाई (CPI) 4.38% रही।
- यह आरबीआई के 2% से 6% के लक्ष्य दायरे के भीतर है।
- आरबीआई का दीर्घकालिक महंगाई लक्ष्य 4% है।
हाल के महीनों में महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां रही हैं, न कि मांग में तेज उछाल।
रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा है।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि फिलहाल उसका फोकस आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने पर है। यदि वैश्विक हालात बिगड़ते हैं या महंगाई बढ़ती है तो भविष्य की मौद्रिक नीति में बदलाव संभव है।
अगस्त की MPC बैठक पर बाजार की नजर
अब निवेशकों और बाजार की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक पर है, जो 3 से 5 अगस्त के बीच आयोजित होगी।
इस बैठक में इन मुद्दों पर खास फोकस रहेगा:
- महंगाई की नई स्थिति
- कच्चे तेल की कीमतों का असर
- वैश्विक आर्थिक माहौल
- मानसून की प्रगति
- ब्याज दरों में बदलाव की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई नियंत्रित रहती है और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर होती हैं, तो आरबीआई आगे चलकर विकास को समर्थन देने वाले कदमों पर विचार कर सकता है।
निष्कर्ष
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का संदेश साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है और सेवा निर्यात, एफडीआई, रेमिटेंस तथा व्यापार समझौते इसे मजबूती दे रहे हैं। हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून जैसे जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई, ब्याज दरों और आर्थिक विकास की दिशा काफी हद तक इन कारकों पर निर्भर करेगी।


