Iran-US Tension: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर दिखाई दे रहा है। बीते एक सप्ताह में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 10% से अधिक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और उनके समझौते की अब कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले सप्ताह में ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं, जिसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
ट्रंप के हस्ताक्षर पर ईरान का तीखा हमला
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर शांति समझौतों का लगातार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बावजूद अमेरिका ने कई बार सैन्य कार्रवाई की, जिससे यह साबित हो गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और उनकी प्रतिबद्धताओं का कोई महत्व नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बनाकर क्षेत्र में युद्ध का माहौल पैदा कर रहा है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि हमले जारी रहे तो ईरान ऐसा जवाब देगा जिसे अमेरिका लंबे समय तक याद रखेगा।
एक सप्ताह में 10% से ज्यादा उछला कच्चा तेल
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के बाजार पर देखने को मिला है। निवेशकों की चिंता बढ़ने से शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को तेल की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई।
- WTI Crude: 4.48% की तेजी के साथ 82.49 डॉलर प्रति बैरल
- Brent Crude: 4.59% की बढ़त के साथ 88.10 डॉलर प्रति बैरल
पूरे सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 10% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो अगले सप्ताह कीमतों में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
होर्मूज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा खतरा
दुनिया के लगभग 20% समुद्री कच्चे तेल की सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के जरिए होती है। ऐसे में इस जलमार्ग पर किसी भी तरह का सैन्य संकट पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि उस पर हमले जारी रहे तो वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल और गैस की आवाजाही रोक सकता है। दूसरी ओर अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर निगरानी और प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
The repeated breaches of the agreement by the Great Satan [the US] regarding the MOU signed by the Presidents of Iran and the US have once again laid bare a fundamental truth: the signature of the US President is utterly worthless and devoid of credibility.
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) July 18, 2026 भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। हालांकि देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता अभी भी काफी अधिक है।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
- भारत का तेल आयात बिल बढ़ सकता है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
- महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि हो सकती है।
- उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
भारत इस समय रूस, वेनेजुएला और अन्य देशों से भी तेल खरीद रहा है, लेकिन वैश्विक कीमतों में तेजी आने पर सस्ता आयात करना मुश्किल हो जाता है।
अगले सप्ताह बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?
कमोडिटी बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निवेशकों की नजर इन प्रमुख घटनाओं पर रहेगी—
- अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में कोई नया घटनाक्रम।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में जहाजों की आवाजाही की स्थिति।
- ओपेक+ देशों की संभावित प्रतिक्रिया।
- अमेरिका की नई प्रतिबंध नीति या सैन्य कार्रवाई।
- वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई और इन्वेंट्री से जुड़े आंकड़े।
यदि तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ सकता है, जबकि स्थिति सामान्य होने पर कीमतों में कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।


