नई दिल्ली: भारत के बड़े कारोबारी परिवारों में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि अगली पीढ़ी के लिए बिजनेस की कमान संभालना लगभग तय होता है। लेकिन 31,000 करोड़ रुपये से अधिक मार्केट कैप वाली एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल नंदा ने इस सोच से अलग संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उनकी बेटी नव्या नवेली नंदा को कंपनी में कोई पद सिर्फ इसलिए नहीं मिल सकता क्योंकि वह नंदा परिवार से आती हैं। कंपनी में किसी भी भूमिका के लिए उन्हें अपनी क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर खुद को साबित करना होगा।
निखिल नंदा का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में फैमिली-ओन्ड बिजनेस ग्रुप्स में उत्तराधिकार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। कई बड़ी कंपनियां अब पारिवारिक विरासत के साथ-साथ प्रोफेशनल मैनेजमेंट और योग्यता आधारित नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे माहौल में निखिल नंदा की टिप्पणी केवल उनकी बेटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान निखिल नंदा ने एस्कॉर्ट्स कुबोटा के भविष्य, नेतृत्व और उत्तराधिकार से जुड़े सवालों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल कंपनी को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि संगठन आने वाली कई पीढ़ियों तक मजबूत बना रहे। उनके मुताबिक किसी भी बिजनेस की वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब वह अपने संस्थापकों और वर्तमान नेतृत्व से आगे निकलकर लंबे समय तक टिकाऊ विकास करता रहे।
उन्होंने कहा कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव बहुत गहरा है। उनकी इच्छा है कि यह संगठन अगले 100 या 200 वर्षों तक भी मजबूत स्थिति में बना रहे। नंदा ने बताया कि जापान की कुबोटा कंपनी का इतिहास 137 वर्षों से भी अधिक पुराना है, जबकि भारत में एस्कॉर्ट्स की यात्रा 82 वर्षों से जारी है। ऐसे में उनकी सोच केवल वर्तमान वित्तीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक संस्थागत निर्माण पर केंद्रित है।
निखिल नंदा ने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत शक्ति, पद या सार्वजनिक पहचान की विशेष इच्छा नहीं है। उनके अनुसार उन्हें सबसे अधिक संतुष्टि तब मिलती है जब संगठन में काम करने वाले लोग आगे बढ़ते हैं, बड़ी जिम्मेदारियां संभालते हैं और कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। यही वजह है कि वे नेतृत्व को व्यक्तिगत नियंत्रण के बजाय संस्थागत विकास के नजरिए से देखते हैं।
विरासत नहीं, काबिलियत होगी असली पहचान
बातचीत के दौरान जब उनसे विशेष रूप से नव्या नवेली नंदा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी बेटी की बिजनेस और निवेश की दुनिया में रुचि बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि किसी को नेतृत्व की भूमिका का अधिकार नहीं दे सकती।
निखिल नंदा ने कहा कि एस्कॉर्ट्स कुबोटा एक सूचीबद्ध कंपनी है और ऐसी कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानदंड बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। शेयरधारक, रेगुलेटर और बाजार सभी प्रमोटर परिवार के सदस्यों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शन और योग्यता के आधार पर करते हैं। इसलिए अगर नव्या भविष्य में कंपनी में कोई भूमिका निभाना चाहती हैं तो उन्हें अपनी क्षमता साबित करनी होगी।
उनके शब्दों में, सिर्फ नंदा सरनेम होने से किसी व्यक्ति को पद नहीं मिल जाता। कंपनी में जगह बनाने के लिए मेहनत, प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता दिखानी होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि नव्या में यह क्षमता मौजूद है और वह समय के साथ खुद को साबित कर सकती हैं।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत में कई कारोबारी परिवारों को उत्तराधिकार से जुड़े विवादों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में निखिल नंदा का मेरिट आधारित दृष्टिकोण निवेशकों और बाजार दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
नव्या नवेली नंदा की बात करें तो वह बॉलीवुड के सबसे चर्चित परिवारों में से एक से आती हैं। वह श्वेता बच्चन नंदा और निखिल नंदा की बेटी हैं। श्वेता, महान अभिनेता अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की बेटी हैं। इसी कारण नव्या लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रही हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी पहचान केवल सेलिब्रिटी परिवार के सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि एक युवा उद्यमी और बिजनेस प्रोफेशनल के रूप में बनाने की कोशिश की है।
हाल ही में उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) से अपना MBA पूरा किया है। IIM-A देश के सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में गिना जाता है और यहां से शिक्षा प्राप्त करना कॉर्पोरेट जगत में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इसके अलावा नव्या को वैश्विक टेक कंपनी Meta के साथ काम करने का अनुभव भी प्राप्त है, जिसने उन्हें आधुनिक बिजनेस और डिजिटल इकोनॉमी को समझने का अवसर दिया।
हालांकि निखिल नंदा का मानना है कि अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां नव्या को और अनुभव प्राप्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल टेक्नोलॉजी और कोडिंग से जुड़ी क्षमताओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार आज का बिजनेस वातावरण तेजी से डिजिटल होता जा रहा है और आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी की समझ नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल कोडिंग और तकनीकी क्षमताओं के क्षेत्र में नव्या को अभी और सीखना होगा। हालांकि उन्हें भरोसा है कि वह समय के साथ इन क्षेत्रों में भी खुद को विकसित कर लेंगी। नंदा के मुताबिक नव्या डिजिटल मार्केटिंग, आधुनिक बिजनेस मॉडल और नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं को समझने जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज दुनिया भर में फैमिली बिजनेस समूहों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तराधिकार को लेकर है। केवल परिवार का सदस्य होना अब पर्याप्त नहीं माना जाता। निवेशक चाहते हैं कि नेतृत्व की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जो बाजार, टेक्नोलॉजी और बदलते कारोबारी माहौल को समझता हो। यही कारण है कि कई बड़े बिजनेस समूह अब अगली पीढ़ी को विदेशों और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाने के बाद भी उन्हें सीधे शीर्ष पद नहीं सौंपते।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा का मामला भी इसी बदलाव का उदाहरण माना जा सकता है। कंपनी कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और रेलवे उपकरण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। भारतीय कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में कंपनी के नेतृत्व से जुड़ा हर फैसला निवेशकों और बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
नव्या नवेली नंदा ने हाल ही में IIM अहमदाबाद में अपने दो वर्षों के MBA सफर को पूरा किया है। इस अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें कैंपस जीवन, दोस्तों और यादगार पलों की झलक दिखाई दी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह ऐसी जगह है जिसने उन्हें उससे कहीं अधिक दिया है जितना वह कभी वापस दे सकती हैं। इस भावनात्मक संदेश को उनके फॉलोअर्स ने काफी पसंद किया।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नव्या कब और किस भूमिका में एस्कॉर्ट्स कुबोटा से जुड़ेंगी। लेकिन निखिल नंदा के बयान से इतना जरूर साफ हो गया है कि कंपनी में उनका भविष्य केवल पारिवारिक विरासत पर नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों और पेशेवर क्षमता पर निर्भर करेगा।
भारतीय कॉर्पोरेट जगत में जहां अक्सर उत्तराधिकार को लेकर बहस होती रहती है, वहीं निखिल नंदा का यह संदेश एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। उनका मानना है कि किसी भी संगठन की दीर्घकालिक सफलता के लिए योग्यता, जवाबदेही और प्रदर्शन को प्राथमिकता देना जरूरी है। यही सोच आने वाले समय में एस्कॉर्ट्स कुबोटा की नेतृत्व संस्कृति को भी परिभाषित कर सकती है।


