Success Story of Abdul Rais: संघर्ष, मेहनत और सही समय पर लिए गए फैसले किसी भी इंसान की जिंदगी बदल सकते हैं। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के रहने वाले अब्दुल रईस इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। कभी ठेले पर फल बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले रईस आज करोड़ों रुपये के कारोबार के मालिक हैं। 5 लाख रुपये के लोन से शुरू हुई उनकी नई यात्रा ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां उनका सालाना कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
नई दिल्ली। भारत में लाखों लोग छोटे कारोबार से अपनी जिंदगी की शुरुआत करते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही लोग अपने सपनों को बड़े बिजनेस में बदल पाते हैं। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के रहने वाले अब्दुल रईस उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया और संघर्षों को सफलता में बदल दिया।
आज उनका नाम बुरहानपुर के सफल कारोबारियों में लिया जाता है। उनकी कंपनी “नीलम फ्रूट” न सिर्फ स्थानीय बाजार में पहचान बना चुकी है, बल्कि कई राज्यों से फल मंगाकर बड़े स्तर पर कारोबार भी कर रही है। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और जोखिम उठाने की कहानी छिपी हुई है।
30 साल पहले ठेले से हुई थी शुरुआत
अब्दुल रईस का सफर करीब तीन दशक पहले शुरू हुआ था। उस समय उनके पास न बड़ा निवेश था और न ही कोई आधुनिक सुविधा। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने सड़क किनारे ठेले पर फल बेचना शुरू किया।
शुरुआती दौर आसान नहीं था। कई बार ऐसा होता था कि पूरा दिन गुजर जाता, लेकिन बिक्री बेहद कम होती। आमदनी इतनी नहीं होती थी कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे।
फलों का कारोबार मौसम पर काफी निर्भर करता है। बारिश के दिनों में ग्राहकों की संख्या घट जाती थी और कई बार कारोबार लगभग ठप हो जाता था। ऐसे समय में अधिकांश लोग कारोबार छोड़ देते हैं, लेकिन रईस ने धैर्य बनाए रखा।
जब 5 लाख रुपये का लोन बना टर्निंग पॉइंट
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। सीमित संसाधनों के कारण विस्तार करना आसान नहीं था। ऐसे में परिवार और रिश्तेदारों की मदद से उन्होंने करीब 5 लाख रुपये का लोन जुटाया।
यही वह फैसला था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। इस रकम का उपयोग उन्होंने कारोबार बढ़ाने, अधिक मात्रा में माल खरीदने और सप्लाई चेन मजबूत करने में किया। धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ने लगा और बिक्री में लगातार इजाफा होने लगा।
छोटे स्तर पर शुरू हुआ कारोबार अब संगठित रूप लेने लगा था। उन्होंने सिर्फ फल बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सप्लाई नेटवर्क बनाने पर भी काम किया।
‘नीलम फ्रूट’ बना भरोसे का नाम
समय के साथ उनका कारोबार “नीलम फ्रूट” के नाम से पहचान बनाने लगा। बुरहानपुर और आसपास के इलाकों में अच्छी गुणवत्ता वाले फलों के लिए ग्राहक उनकी दुकान पर आने लगे।
रईस ने कारोबार में एक सिद्धांत अपनाया—गुणवत्ता से समझौता नहीं। यही कारण रहा कि ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ता गया। एक बार जो ग्राहक उनकी दुकान से फल खरीदता, वह दोबारा भी वहीं पहुंचता।
आज उनकी दुकान पर आम, सेब, अनार, जामुन, चीकू, पपीता, मौसमी और अनानास समेत कई प्रकार के फल उपलब्ध रहते हैं।
10 राज्यों से आता है माल
कारोबार बढ़ने के साथ रईस ने सप्लाई नेटवर्क को मजबूत किया। आज वह भारत के करीब 10 राज्यों से फल मंगवाते हैं।
फलों की खरीद, परिवहन और समय पर डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया पर उनकी नजर रहती है। उनका लक्ष्य रहता है कि ग्राहकों को हमेशा ताजे और अच्छी गुणवत्ता वाले फल मिलें।
यह नेटवर्क ही उनके कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बन गया है। स्थानीय बाजारों के अलावा छोटे व्यापारी भी उनसे थोक में फल खरीदते हैं और आगे बेचते हैं।
हर दिन पहुंचती हैं कई गाड़ियां
आज स्थिति यह है कि उनकी दुकान पर प्रतिदिन 2 से 3 ट्रक या बड़ी गाड़ियां फलों की खेप लेकर पहुंचती हैं। यह किसी छोटे कारोबारी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
कारोबार के विस्तार के साथ उन्होंने रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। वर्तमान में करीब 15 लोग सीधे तौर पर उनके व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और अपनी आजीविका चला रहे हैं।
3 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्दुल रईस का सालाना टर्नओवर करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। एक समय जिस व्यक्ति को ठेले पर फल बेचने के लिए संघर्ष करना पड़ता था, आज वही करोड़ों रुपये के कारोबार का संचालन कर रहा है।
उनकी सफलता यह साबित करती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़ी शुरुआत जरूरी नहीं होती। सही दिशा में लगातार प्रयास और धैर्य इंसान को किसी भी मुकाम तक पहुंचा सकते हैं।
युवाओं के लिए क्या है सीख?
अब्दुल रईस की कहानी सिर्फ एक कारोबारी की सफलता नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं।
उनकी यात्रा से तीन बड़ी सीख मिलती हैं—
- छोटे स्तर से शुरुआत करने में कोई बुराई नहीं है।
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना जरूरी है।
- सही समय पर लिया गया वित्तीय निर्णय जिंदगी बदल सकता है।
निष्कर्ष
अब्दुल रईस की सफलता की कहानी बताती है कि मेहनत, लगन और सही रणनीति से किसी भी छोटे कारोबार को बड़े उद्यम में बदला जा सकता है। ठेले पर फल बेचने से शुरू हुआ उनका सफर आज 3 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार तक पहुंच चुका है। यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अवसर हर किसी के लिए मौजूद हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और लगातार मेहनत करने की होती है।


