ई-कॉमर्स कंपनियों की गलत प्रथाओं पर सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की। छोटे व्यापारियों पर बढ़ते खतरे को लेकर जताई चिंता।
ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी पर चिंता जताते हुए Praveen Khandelwal ने केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों की अनुचित गतिविधियां भारत के रिटेल ट्रेड सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
Jan Vishwas Bill 2.0 का स्वागत
Praveen Khandelwal ने Jan Vishwas Bill 2.0 के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह सरकार के trust-based governance और ease of doing business के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में यह कदम व्यापारियों और उद्यमियों के विश्वास को मजबूत करेगा।
विदेशी फंडेड कंपनियों पर आरोप
खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां:
- अनुचित प्रतिस्पर्धा कर रही हैं
- बाजार में असंतुलन पैदा कर रही हैं
- छोटे व्यापारियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही हैं
भारत में करीब 9 करोड़ व्यापारी हैं, जो देश की सप्लाई चेन और रोजगार का बड़ा हिस्सा हैं।
किन प्रथाओं पर उठे सवाल
उन्होंने जिन प्रमुख समस्याओं का जिक्र किया, उनमें शामिल हैं:
- Predatory pricing (लागत से कम कीमत पर बिक्री)
- Deep discounting
- Dark patterns (भ्रामक डिजिटल रणनीतियां)
- Inventory-led मॉडल को marketplace दिखाना
- चुनिंदा विक्रेताओं को प्राथमिकता देना
- Dark stores का तेजी से विस्तार
उनके अनुसार ये सभी गतिविधियां anti-competitive हैं और निष्पक्ष बाजार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं।
लेवल प्लेइंग फील्ड की मांग
Praveen Khandelwal ने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच संतुलन जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन कंपनियों को बिना नियंत्रण के काम करने दिया गया, तो:
- छोटे और मध्यम व्यापारी खत्म हो सकते हैं
- बाजार में एकाधिकार (monopoly) बढ़ सकता है
National E-commerce Policy लागू करने की मांग
खंडेलवाल ने सरकार से मांग की कि:
- जल्द से जल्द National E-commerce Policy लागू की जाए
- सख्त नियम और निगरानी तंत्र बनाया जाए
- गलत प्रथाओं पर कड़ी कार्रवाई हो
National Retail Development Council का प्रस्ताव
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एक National Retail Development Council बनाया जाए, जिससे:
- व्यापारियों को नीति निर्माण में भागीदारी मिले
- उनकी समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से हो
निष्कर्ष
Praveen Khandelwal का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में ई-कॉमर्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने साफ कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और घरेलू व्यापार की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आने वाले समय में सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है, यह पूरे रिटेल सेक्टर के लिए अहम होगा।
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