नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य टकराव ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊपर धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी दर्ज की जा रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार 11 जून 2026 को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
इसके बावजूद उपभोक्ताओं की चिंता कम नहीं हुई है, क्योंकि पिछले महीने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले दिनों में भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
पिछले महीने चार बार बढ़ चुके हैं दाम
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद मई 2026 में तेल कंपनियों ने महज 11 दिनों के भीतर चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी।
15 मई को पेट्रोल लगभग 3 रुपये और डीजल 3.29 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया। इसके बाद 19 मई और 23 मई को भी दोनों ईंधनों की कीमतों में वृद्धि की गई। 25 मई को फिर एक बार बड़ा संशोधन किया गया, जिसके बाद पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हुआ।
तब से लेकर अब तक कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल को देखते हुए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
देश के प्रमुख शहरों में क्या हैं ताजा रेट?
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| नोएडा | 102.12 | 97.56 |
| चंडीगढ़ | 101.51 | 89.47 |
| लखनऊ | 101.89 | 95.36 |
| पटना | 113.37 | 99.36 |
| रांची | 105.26 | 100.49 |
| भोपाल | 114.57 | 99.64 |
लखनऊ में पेट्रोल की कीमत 101 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बनी हुई है जबकि डीजल भी 95 रुपये प्रति लीटर के पार है। उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में पिछले महीने की बढ़ोतरी का असर अब भी दिखाई दे रहा है।
क्यों महंगा हो रहा है कच्चा तेल?
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में तेल बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों का है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
तेल व्यापारियों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो समुद्री आपूर्ति मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की खरीदारी बढ़ रही है और कीमतें ऊपर जा रही हैं।
गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 94.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यह स्तर पिछले कुछ महीनों के मुकाबले काफी ऊंचा माना जा रहा है।
भारत पर कितना पड़ सकता है असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है।
यदि क्रूड लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है तो सरकार और तेल कंपनियों दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन की लागत बढ़ जाती है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का अनुमान है कि मौजूदा स्तर पर तेल कंपनियों को प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है। यदि कीमतों में लगातार तेजी बनी रही तो खुदरा ईंधन दरों की समीक्षा की जा सकती है।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल वाहन चालकों को ही प्रभावित नहीं करतीं। इनका असर पूरे अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है। इससे फल, सब्जियां, खाद्यान्न, सीमेंट, स्टील और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बन सकता है। वहीं पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से निजी वाहन चलाने वालों का मासिक बजट प्रभावित होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ईंधन कीमतों में नई बढ़ोतरी होती है तो महंगाई दर पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
क्या भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार है?
हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया था कि देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की कोई कमी नहीं है।
उनके अनुसार भारत के पास लगभग 76 से 80 दिनों की जरूरत के बराबर ईंधन भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक होने पर रणनीतिक भंडार का उपयोग भी किया जा सकता है।
मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई थी कि कच्चे तेल की मौजूदा तेजी लंबे समय तक नहीं टिकेगी और बाजार में स्थिरता लौटने पर कीमतों में नरमी आ सकती है।
आगे क्या देखना होगा?
आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है। वहीं संघर्ष बढ़ने की स्थिति में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल को देखते हुए उपभोक्ताओं और उद्योग जगत दोनों की नजर तेल कंपनियों के अगले फैसले पर बनी हुई है।
फिलहाल वाहन चालकों के लिए राहत यही है कि 11 जून 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें भविष्य में नई चुनौती पैदा कर सकती हैं।


