नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान नरमी देखने को मिली है। मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल 93 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 91 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद देशभर के वाहन चालकों को राहत नहीं मिली है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने रविवार, 7 जून 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—हर दिन सुबह 6 बजे ईंधन की नई कीमतें जारी करती हैं। हालांकि पिछले कई दिनों से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है तो पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं।
11 दिनों में चार बार बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम
मई 2026 के दौरान पेट्रोलियम कंपनियों ने लगातार कई बार कीमतों में बढ़ोतरी की थी। विधानसभा चुनावों के बाद 15 मई से 25 मई के बीच चार चरणों में पेट्रोल और डीजल दोनों महंगे किए गए थे।
15 मई को पेट्रोल में 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.29 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद 19 मई और 23 मई को भी कीमतों में वृद्धि हुई। 25 मई को फिर पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया।
इन चार बढ़ोतरी के बाद देशभर में ईंधन की कीमतें कई शहरों में रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गईं। हालांकि पिछले कुछ दिनों से दाम स्थिर हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को अभी तक किसी राहत का इंतजार है।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमत
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये तथा डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो नोएडा में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.56 रुपये प्रति लीटर है। लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| नोएडा | 102.12 | 95.56 |
| चंडीगढ़ | 101.51 | 89.47 |
| लखनऊ | 101.89 | 95.36 |
| पटना | 113.37 | 99.36 |
| रांची | 105.26 | 100.49 |
| भोपाल | 114.57 | 99.64 |
क्रूड ऑयल सस्ता होने के बावजूद क्यों नहीं घट रहे दाम?
ऊपरी तौर पर देखने पर लगता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने से पेट्रोल और डीजल भी सस्ते हो जाने चाहिए। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे काफी अलग है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। तेल कंपनियां केवल मौजूदा स्पॉट प्राइस पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि पहले से किए गए आयात अनुबंध, डॉलर-रुपया विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और विपणन मार्जिन जैसे कई कारकों को ध्यान में रखती हैं।
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और वैट (VAT) भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का पूरा लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाता।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
ऊर्जा बाजार से जुड़े विश्लेषकों का अनुमान है कि हाल के महीनों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ाई है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की बिक्री पर कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हुआ है।
हालांकि कंपनियों ने आधिकारिक रूप से किसी नुकसान का आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची आयात लागत और वैश्विक अस्थिरता के कारण कीमतों में कटौती करने का फैसला फिलहाल आसान नहीं है।
इस सप्ताह कैसा रहा क्रूड ऑयल बाजार?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सप्ताह नरमी का रुख देखने को मिला। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 93.09 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इसी दौरान WTI क्रूड में भी करीब 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 90.54 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक मांग को लेकर चिंता, कुछ क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने की संभावना और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण कीमतों में दबाव बना हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है।
आगे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि ब्रेंट क्रूड लगातार 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है और डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी कमजोरी नहीं आती है तो आने वाले हफ्तों में तेल कंपनियों पर कीमतों में राहत देने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि अंतिम फैसला तेल विपणन कंपनियों और सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को कीमतों में तत्काल कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी नरमी लंबे समय में राहत का रास्ता जरूर खोल सकती है।
स्रोत: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार डेटा।


