नई दिल्ली: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi का मानना है कि आने वाले महीनों में कमोडिटी बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ब्रोकरेज के अनुसार, अगले 6 से 12 महीनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा और Brent Crude 60-65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। वहीं, सोना और चांदी में भी फिलहाल कमजोरी जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय सही मौके का इंतजार करने की सलाह दी गई है।
60-65 डॉलर तक आ सकता है कच्चा तेल
Citi के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज मैक्स लेटन का कहना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पहले की तुलना में कम हो रहा है। यदि ईरान से जुड़े कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ सकती है।
इसके अलावा चीन की ओर से मांग अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है, जबकि अन्य प्रमुख उत्पादक देशों का उत्पादन बढ़ रहा है। ऐसे में बाजार में कच्चे तेल की अधिक आपूर्ति की स्थिति बन सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव रहेगा।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो साल के अंत तक Brent Crude की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ सकती है।
तेल में तेजी आए तो मुनाफावसूली करें
मैक्स लेटन का कहना है कि यदि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में किसी कारण तेजी आती है, तो निवेशकों को इसे नई खरीदारी का मौका नहीं बल्कि मुनाफावसूली (Profit Booking) का अवसर मानना चाहिए।
सोने में अभी और कमजोरी संभव
Citi का मानना है कि पिछले 18 से 24 महीनों में सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के पीछे निवेशकों की मजबूत खरीदारी सबसे बड़ा कारण रही। अब यह खरीदारी धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है, जिससे आने वाले कुछ सप्ताह तक सोने पर दबाव बना रह सकता है।
मैक्स लेटन के अनुसार, ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट और मजबूत अमेरिकी डॉलर फिलहाल सोने के लिए नकारात्मक संकेत हैं। इसलिए अभी खरीदारी में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए।
हालांकि, उनका मानना है कि यदि अगले दो महीनों में सोने की कीमतों में गिरावट आती है, तो वह निवेशकों के लिए बेहतर एंट्री का मौका हो सकता है। Citi को उम्मीद है कि साल की चौथी तिमाही में ब्याज दरों और महंगाई में नरमी आने पर सोने को दोबारा सहारा मिल सकता है।
चांदी में भी फिलहाल सीमित रह सकती है तेजी
ब्रोकरेज के मुताबिक, चांदी की चाल भी फिलहाल सोने के अनुरूप रह सकती है। हाल की तेजी का बड़ा कारण निवेशकों की खरीदारी रही है, जबकि औद्योगिक मांग उतनी मजबूत नहीं रही।
हालांकि, सोलर एनर्जी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से लंबी अवधि में चांदी की मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है। लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों के कारण उद्योग वैकल्पिक धातुओं का उपयोग बढ़ा सकते हैं, जिससे निकट अवधि में चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
- कच्चे तेल में लंबी अवधि तक दबाव रहने की संभावना।
- Brent Crude के 60-65 डॉलर प्रति बैरल तक आने का अनुमान।
- सोना और चांदी में फिलहाल जल्दबाजी में खरीदारी से बचने की सलाह।
- अगले 1-2 महीनों में गिरावट आने पर सोने में निवेश का बेहतर मौका बन सकता है।
- चांदी में लंबी अवधि का आउटलुक सकारात्मक, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव संभव।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए विचार और अनुमान Citi एवं उसके विशेषज्ञों के हैं। NewsJagran किसी भी निवेश सलाह की जिम्मेदारी नहीं लेता। शेयर बाजार, कमोडिटी या किसी भी निवेश से जुड़ा निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


