Champat Rai Ram Mandir Trust: अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में SIT की क्लोजर/अंतिम रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय पर कोई आरोप सिद्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद उनकी ट्रस्ट में वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि 3 सितंबर को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में इस मुद्दे पर प्रस्ताव आ सकता है। हालांकि, वापसी के लिए ट्रस्टियों के बीच पर्याप्त समर्थन जरूरी होगा।
3 सितंबर की बैठक पर सबकी नजर
राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक से पहले एक नौ पन्नों के पत्र को लेकर हलचल बढ़ गई है। इस बैठक में ट्रस्ट के पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी CEO के चयन पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके लिए तीन नामों पर विचार किया जा रहा है और सूत्रों के मुताबिक किसी रिटायर्ड नौकरशाह को प्राथमिकता मिल सकती है।
इसी बीच चंपत राय की संभावित वापसी का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। राय राम मंदिर ट्रस्ट में महासचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। कथित चढ़ावा चोरी विवाद के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
अब SIT की अंतिम रिपोर्ट में उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं होने की बात को उनके समर्थक वापसी के पक्ष में अहम आधार बता रहे हैं।
2 तिहाई ट्रस्टियों का समर्थन जरूरी
चंपत राय की वापसी केवल चर्चा या प्रस्ताव से तय नहीं होगी। इसके लिए ट्रस्ट के भीतर जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के फैसले के लिए ट्रस्टियों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।
यही वजह है कि 3 सितंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर प्रस्ताव आता है तो यह देखना अहम होगा कि कितने ट्रस्टी राय के पक्ष में मतदान करते हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में उनकी वापसी का औपचारिक प्रस्ताव रखा जाएगा या नहीं। चंपत राय ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है।
18 अगस्त के पत्र ने बढ़ाई हलचल
सोशल मीडिया पर 18 अगस्त की तारीख वाला एक पत्र सामने आने के बाद राय की वापसी की चर्चा और तेज हो गई। यह पत्र सार्वजनिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन राय के करीबी लोगों का दावा है कि इसे चंपत राय ने लिखा है।
हालांकि, राय ने न तो इस पत्र की पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है।
पत्र में मंदिर निर्माण और मंदिर परिसर के प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र होने की बात कही जा रही है। इसमें मंदिर निर्माण समिति के तत्कालीन चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को भी प्रमुखता से बताया गया है।
नृपेंद्र मिश्रा ने अटकलों को किया खारिज
पत्र से जुड़ी चर्चाओं के बीच नृपेंद्र मिश्रा ने उन अटकलों को खारिज किया है कि इस दस्तावेज के जरिए उन पर किसी तरह की जिम्मेदारी डालने की कोशिश की गई है।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है और न ही उन्हें उसके बारे में जानकारी है। मिश्रा ने यह भी कहा कि अगर ऐसा कोई दस्तावेज है भी, तो उसे किसी व्यक्ति पर दोष मढ़ने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने ट्रस्ट के भीतर मतभेद होने की धारणा पैदा करने की कोशिशों पर भी सवाल उठाया।
मंदिर निर्माण में L&T की भूमिका का जिक्र
सामने आई जानकारी के मुताबिक, पत्र में मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चयन का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि नृपेंद्र मिश्रा के सुझाव पर L&T को मंदिर निर्माण से जुड़े काम के लिए चुना गया था।
वहीं, मंदिर परिसर में अन्य इमारतों के डिजाइन और निर्माण के लिए नोएडा स्थित डिजाइन एसोसिएट को चुने जाने का जिक्र भी किया गया है।
पत्र में यह दावा किए जाने की बात सामने आई है कि मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले निर्माण समिति की मंजूरी के बाद ही लिए जाते थे।
CEO पद के लिए तीन नामों पर विचार
राम मंदिर ट्रस्ट अब अपने कामकाज को और व्यवस्थित करने के लिए CEO नियुक्त करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, इसके लिए तीन संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जा रहा है।
ट्रस्ट के काम की प्रकृति को देखते हुए रिटायर्ड नौकरशाह को इस पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। CEO की नियुक्ति से ट्रस्ट के प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने की उम्मीद है।
संतों के बीच भी उठ रहा वापसी का मुद्दा
चंपत राय की संभावित वापसी का मुद्दा केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है। अयोध्या के संतों के एक वर्ग के बीच भी इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
राय का समर्थन करने वाले लोग SIT की अंतिम रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं। उनका तर्क है कि रिपोर्ट में राय को सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया गया है। इसी आधार पर उनके समर्थक मानते हैं कि उन्हें दोबारा ट्रस्ट की जिम्मेदारी में भूमिका दी जा सकती है।
राय के करीबी एक पदाधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि उन्होंने SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद अपना पक्ष रखने की बात कही थी।
अभी तस्वीर साफ नहीं
फिलहाल चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 3 सितंबर की बैठक में क्या उनके नाम पर औपचारिक प्रस्ताव आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अगर प्रस्ताव आता है तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उन्हें वापसी के लिए जरूरी दो-तिहाई ट्रस्टियों का समर्थन मिल पाता है। वहीं, CEO की नियुक्ति और ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में होने वाले बदलाव भी बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे मामले में चंपत राय की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। उनकी चुप्पी के बीच फिलहाल वापसी की चर्चा अटकलों पर ही आधारित है और अंतिम स्थिति ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।


