भोपाल (मध्य प्रदेश) — हाल ही में एक ऐसा वायरल वीडियो सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं। एक छात्र का दावा है कि उसने यूनिवर्सिटी के मेस के खाने में छिपकली पाई, लेकिन मेस का स्टाफ कह रहा है कि यह छिपकली नहीं बल्कि शिमला मिर्च (Capsicum) है। स्टाफ के एक सदस्य ने इसे साबित करने के लिए उस चीज़ का स्वाद तक चखा!
📰 क्या हुआ सच में?
UIT RGPV Bhopal: A student allegedly claimed a lizard in his mess food.
When he complained, the staff denied it and said it was capsicum, and later ate the lizard to prove their point
https://t.co/Wa6uBFIf5Y
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 22, 2026 वीडियो में दिखता है कि छात्र अपने खाने में कुछ अजीब चीज़ देखकर परेशान होता है और मेस कर्मचारियों से कहता है:
💬 “भाई साहब, ये क्या है? छिपकली लग रही थी।”
लेकिन कर्मचारी उसे कहते हैं:
✔️ “भाई, ये शिमला मिर्च है।”
और फिर वह उस चीज़ को तालू में रखकर चख भी लेता है, यह साबित करने के लिए कि वह छिपकली नहीं है।
📈 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस वायरल क्लिप पर कई तरह के मज़ेदार और चुटील टिप्पणियाँ की हैं:
- कुछ यूज़र्स ने मज़ाक में कहा कि “साक्ष्य को खा देना भी एक नई डिफेंस रणनीति है।”
- दूसरे यूज़र्स ने कहा कि “क्या सच में शिमला मिर्च थी या वीडियो एक सर्कस जैसा बन गया?”
- कई लोग इस बात पर आश्चर्य जताते हैं कि स्टाफ ने इतनी अजीब प्रतिक्रिया क्यों दी।
🍲 भोजन की स्वच्छता पर बहस फिर ताज़ा
यह वही जगह नहीं है जहाँ खाने की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हों। भारत के कई विश्वविद्यालय और कॉलेजों में पिछले साल भी खाने में छिपकली, कीड़े‑मकोड़े या अन्य दोषपूर्ण सामग्री मिलने के आरोप सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर:
🔹 एक अन्य मामले में बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय के हॉस्टल के खाने में छिपकली निकलने की तस्वीरें वायरल हुईं थीं। प्रशासन ने उन आरोपों से इनकार भी किया था।
🔹 पिछले साल भोपाल की एक यूनिवर्सिटी‑मेस में भी छात्राओं की थाली में छिपकली और इल्ली पाए जाने के आरोप के कारण छात्रों ने हंगामा किया था और कार्रवाई की गई थी।
ऐसे मामलों की बार‑बार रिपोर्टिंग से छात्रों और अभिभावकों में खाने की हाइजीन, पोषण और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
🧼 स्वच्छता क्यों ज़रूरी?
छात्रावास के मेस में भोजन ग्रहण करने वाले दहाईयों या सैकड़ों विद्यार्थी होते हैं। किसी भी तरह की अस्वच्छता से फूड पॉइजनिंग जैसे गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे पैदा हो सकते हैं — जैसा कि देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी देखा गया है।
🧠 निष्कर्ष
यह वीडियो चाहे मज़ाकिया लगे या आश्चर्यजनक, लेकिन इससे एक बात साफ़ होती है —
👉 यूनिवर्सिटी मेस का खाना स्वच्छ और सुरक्षित होना चाहिए।
👉 खान‑पान की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी, छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान और पारदर्शिता ज़रूरी है।
जब खाने में “छिपकली” जैसे विवाद उत्पन्न हों, तो सिर्फ़ बहस नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई और खाद्य सुरक्षा मानकों को सख़्ती से पालन करना चाहिए।
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Author: Namam Sharma
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Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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