🔴 बड़ी खबर
देश के जाने-माने उद्योगपति Anil Ambani ने Supreme Court of India में एक अहम हलफनामा दाखिल करते हुए खुद को “भगोड़ा” मानने से साफ इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने ग्रुप की कंपनियों के जरिए बैंकों और लेंडर्स को ₹3.45 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम चुका दी है।
📌 क्या है पूरा मामला?
यह मामला कर्ज, बैंक लोन और कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा है, जिसमें जांच एजेंसियां पहले से ही जांच कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में अनिल अंबानी ने कहा कि:
- उन्हें कभी भी “fugitive economic offender” घोषित नहीं किया गया
- उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिया है कि वे बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे
- वे जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं
💰 ₹3.45 लाख करोड़ भुगतान का दावा
अनिल अंबानी ने अपने बचाव में बड़ा आंकड़ा पेश किया:
- कुल भुगतान: ₹3.44–₹3.45 लाख करोड़+
- जिसमें:
- ₹2.45 लाख करोड़ से ज्यादा मूलधन
- ₹93,000 करोड़ से ज्यादा ब्याज
- सरकार को टैक्स और अन्य भुगतान: ₹1 लाख करोड़+
👉 यह दावा उनके ऊपर लगे वित्तीय आरोपों के बीच काफी अहम माना जा रहा है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच एजेंसियों (CBI, ED) के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि जांच में “धीमी गति” और “हिचकिचाहट” दिखाई दे रही है।
👉 कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मामले को तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
🏦 लेंडर्स कमेटी का प्रस्ताव
अनिल अंबानी ने सुझाव दिया कि:
- SBI और Bank of Baroda के नेतृत्व में एक lenders committee बनाई जाए
- यह कमेटी तय करे कि अभी कितना कर्ज बाकी है
- फिर एक time-bound repayment plan बनाया जाए
👉 इससे कर्ज समाधान को structured तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
🔎 ‘फरार’ केस से तुलना क्यों?
इस मामले में एक और बड़ा मुद्दा सामने आया—
- कोर्ट में “Sterling Biotech / Sandesara case” का हवाला दिया गया
- उस केस में भी एकमुश्त सेटलमेंट के बाद मामलों को बंद किया गया था
👉 अनिल अंबानी की तरफ से इसी तरह के समाधान की मांग की जा रही है।
📊 क्यों अहम है यह मामला?
यह केस सिर्फ एक कारोबारी विवाद नहीं है, बल्कि:
- भारत के बैंकिंग सिस्टम पर असर डालता है
- बड़े कॉर्पोरेट लोन और डिफॉल्ट के मुद्दे को उजागर करता है
- जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है
🧠 क्या आगे हो सकता है?
आने वाले समय में:
- सुप्रीम कोर्ट इस पर बड़ा फैसला दे सकता है
- लेंडर्स कमेटी बन सकती है
- कर्ज निपटान का नया मॉडल सामने आ सकता है
👉 यह मामला भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए मिसाल भी बन सकता है।
📌 निष्कर्ष
Anil Ambani ने साफ किया है कि वह “भगोड़ा” नहीं हैं और उन्होंने बड़े पैमाने पर कर्ज चुकाया है। अब नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आगे की जांच पर टिकी है।
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Author: Namam Sharma
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Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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