Ramdeo Agrawal on Stock Market: शेयर बाजार में लगातार पांच दिनों की गिरावट के बीच मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने निवेशकों को बड़ा संदेश दिया है। उनका कहना है कि फिलहाल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम महंगे वैल्यूएशन नहीं, बल्कि बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी और रुपये पर बढ़ता दबाव है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट अच्छी कंपनियों में निवेश बढ़ाने का अवसर हो सकती है।
Highlights
- बाजार के लिए सबसे बड़ा रिस्क बना क्रूड ऑयल और कमजोर रुपया
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की वापसी फिलहाल मुश्किल
- क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार होने पर बाजार पर बढ़ सकता है दबाव
- बाजार की गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बताया
- Zepto, Jio और NSE जैसे बड़े IPO से बढ़ सकती है बिकवाली
बाजार की सबसे बड़ी चिंता अब वैल्यूएशन नहीं
मनीकंट्रोल से बातचीत में रामदेव अग्रवाल ने कहा कि कुछ समय पहले तक निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उनके मुताबिक, वर्तमान समय में जियोपॉलिटिकल तनाव बाजार की दिशा तय कर रहा है।
मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है। यदि रुपये में कमजोरी बनी रहती है तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के भारतीय बाजार में दोबारा बड़े पैमाने पर निवेश करने की संभावना कम रहेगी।
क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार गया तो बढ़ेगा दबाव
रामदेव अग्रवाल का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली जाती है, तो भारतीय शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है।
महंगा कच्चा तेल भारत के लिए कई मोर्चों पर चुनौती पैदा करता है—
- आयात बिल बढ़ता है।
- चालू खाते (Current Account Deficit) का घाटा बढ़ता है।
- महंगाई पर दबाव बढ़ता है।
- रुपये में कमजोरी आ सकती है।
- विदेशी निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है।
इन सभी कारणों का असर शेयर बाजार की धारणा (Market Sentiment) पर पड़ता है।
गिरावट में अच्छे शेयर खरीदने का सही समय
हालिया गिरावट को लेकर उन्होंने निवेशकों को घबराने की बजाय अवसर तलाशने की सलाह दी। उनका कहना है कि शेयर बाजार हमेशा एक दिशा में नहीं चलता। समय-समय पर करेक्शन आते रहते हैं और ऐसे समय में मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर मिल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की ग्रोथ स्टोरी अब भी मजबूत बनी हुई है। दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की आर्थिक वृद्धि बेहतर है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
विदेशी निवेशकों की वापसी क्यों मुश्किल?
रामदेव अग्रवाल के अनुसार, रुपये में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार में आक्रामक खरीदारी नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केवल करेंट अकाउंट डेफिसिट ही नहीं, बल्कि अब कैपिटल अकाउंट पर भी दबाव दिखाई देने लगा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
बड़े IPO भी बना सकते हैं दबाव
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई बड़े IPO बाजार में दस्तक देने वाले हैं। इनमें Zepto, Jio और NSE जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशकों को नए IPO में निवेश करने के लिए अपने मौजूदा पोर्टफोलियो से कुछ शेयर बेचने पड़ सकते हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त बिकवाली देखने को मिल सकती है और निकट अवधि में दबाव बढ़ सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद रामदेव अग्रवाल भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा कि देश में मानसून की स्थिति बेहतर हो रही है, कंपनियों के तिमाही नतीजे (Earnings Growth) मजबूत दिखाई दे रहे हैं और घरेलू अर्थव्यवस्था अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि निवेशकों को रुपये और कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर रखनी चाहिए क्योंकि आने वाले महीनों में यही दोनों फैक्टर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
रामदेव अग्रवाल का मानना है कि मौजूदा बाजार में घबराकर निवेश से बाहर निकलने की जरूरत नहीं है। यदि किसी कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं और उसका कारोबार लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है, तो बाजार की गिरावट ऐसे शेयरों में निवेश बढ़ाने का अवसर बन सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी आगाह किया कि यदि क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो बाजार में निकट अवधि की अस्थिरता जारी रह सकती है।


