China Aluminium Foil: चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से आने वाले सस्ते एल्युमिनियम फॉयल पर भारत का सख्त रुख जारी, घरेलू उद्योग को मिली बड़ी राहत
नई दिल्ली। भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को सस्ते विदेशी आयात से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से आयात होने वाले एल्युमिनियम फॉयल पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी को 15 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से 10 जून 2026 को जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा ड्यूटी तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक सरकार इसे वापस लेने या संशोधित करने का कोई नया आदेश जारी नहीं करती।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत में एल्युमिनियम उत्पादकों ने लंबे समय से शिकायत की है कि कुछ देशों से बेहद कम कीमत पर आने वाला एल्युमिनियम फॉयल घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि ऐसे आयात पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर पड़ सकती है और निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
भारत का यह कदम चीन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चीन दुनिया के सबसे बड़े एल्युमिनियम उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। वहीं इंडोनेशिया, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, वह भी इस फैसले से प्रभावित देशों की सूची में शामिल है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया?
वित्त मंत्रालय ने 16 सितंबर 2021 की अधिसूचना संख्या 51/2021-कस्टम्स (ADD) में संशोधन करते हुए मौजूदा ड्यूटी की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) द्वारा चलाए जा रहे सनसेट रिव्यू के दौरान लिया गया है।
DGTR ने 29 सितंबर 2025 को इस मामले में सनसेट रिव्यू शुरू किया था। किसी भी एंटी-डंपिंग ड्यूटी की अवधि समाप्त होने से पहले यह जांच की जाती है कि यदि ड्यूटी हटा दी जाए तो क्या घरेलू उद्योग को फिर से नुकसान पहुंचने की संभावना है। इसी प्रक्रिया को सनसेट रिव्यू कहा जाता है।
सरकार का मानना है कि जब तक समीक्षा पूरी नहीं हो जाती और अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आ जाता, तब तक मौजूदा सुरक्षा उपायों को जारी रखना जरूरी है। यही कारण है कि ड्यूटी को 15 दिसंबर 2026 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
किन उत्पादों पर लागू होगी ड्यूटी?
जांच के दायरे में 80 माइक्रोन या उससे कम मोटाई वाला एल्युमिनियम फॉयल शामिल है। इस प्रकार का फॉयल कई उद्योगों में इस्तेमाल किया जाता है।
फूड पैकेजिंग, फार्मास्यूटिकल पैकेजिंग, घरेलू उपयोग, औद्योगिक पैकेजिंग और कई विनिर्माण क्षेत्रों में एल्युमिनियम फॉयल की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में भी FMCG, दवा और पैकेजिंग उद्योगों के विस्तार के साथ इसकी खपत बढ़ी है।
सरकार का कहना है कि यदि विदेशी कंपनियां लागत से कम कीमत पर उत्पाद बेचती हैं तो भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो सकता है। इसलिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी को एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जाता है।
चीन समेत चार देशों से आयात पर असर
सरकारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से आने वाले एल्युमिनियम फॉयल पर लागू रहेगा।
इन देशों में चीन सबसे बड़ा निर्यातक माना जाता है। पिछले कई वर्षों से भारत सहित कई देशों ने चीन पर कम कीमतों पर उत्पाद बेचकर स्थानीय उद्योगों को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं। अमेरिका, यूरोपीय संघ और कई अन्य देशों ने भी विभिन्न उत्पादों पर चीन के खिलाफ एंटी-डंपिंग कार्रवाई की है।
भारत का यह कदम भी इसी व्यापक व्यापार नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत घरेलू उद्योगों को अनुचित विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने की कोशिश की जाती है।
इंडोनेशिया भी एल्युमिनियम और धातु आधारित उत्पादों के वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इस देश से होने वाले आयात पर भी इस फैसले का असर पड़ेगा।
हिंदाल्को और अन्य भारतीय कंपनियों को कैसे होगा फायदा?
इस मामले में घरेलू उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख कंपनियों में हिंदाल्को इंडस्ट्रीज और एसआरएफ अलटेक शामिल हैं। इन कंपनियों ने DGTR के समक्ष यह तर्क रखा था कि सस्ते आयात के कारण भारतीय उत्पादकों की बिक्री, बाजार हिस्सेदारी और लाभप्रदता प्रभावित होती है।
भारतीय कंपनियों का कहना है कि विदेशी उत्पादकों को कुछ मामलों में सरकारी सहायता और बड़े पैमाने पर उत्पादन का लाभ मिलता है, जिससे वे कम कीमत पर माल बेच पाते हैं। ऐसे में भारतीय निर्माताओं के लिए समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जाता है।
ड्यूटी जारी रहने से घरेलू कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, क्षमता विस्तार करने और नए निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
मेक इन इंडिया रणनीति के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। सरकार का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और देश में उत्पादन बढ़ाना है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी को इसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जब घरेलू उद्योग को विदेशी डंपिंग से सुरक्षा मिलती है, तब कंपनियां नए निवेश करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक उत्साहित होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि धातु, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादों जैसे क्षेत्रों में ऐसे कदम भारत के विनिर्माण आधार को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
व्यापार और निवेशकों के लिए क्या संकेत?
निवेशकों के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एल्युमिनियम क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर इसका असर पड़ सकता है। यदि घरेलू कंपनियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से राहत मिलती है तो उनके मार्जिन और बाजार हिस्सेदारी में सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि अंतिम तस्वीर DGTR की समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि ड्यूटी हटाने से उद्योग को नुकसान हो सकता है, तो सरकार भविष्य में भी इसे जारी रख सकती है।
दूसरी ओर यदि समीक्षा में अलग निष्कर्ष सामने आते हैं तो ड्यूटी संरचना में बदलाव भी संभव है। इसलिए उद्योग जगत की नजर अब DGTR की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
आगे क्या होगा?
DGTR वर्तमान में मामले की विस्तृत समीक्षा कर रहा है। समीक्षा प्रक्रिया के तहत 28 अप्रैल 2026 को सभी संबंधित पक्षों की सुनवाई भी की जा चुकी है। अब जांच रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
तब तक चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से आयात होने वाले एल्युमिनियम फॉयल पर मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू रहेगी। इससे भारतीय उद्योग को अस्थायी राहत मिलेगी और सरकार को समीक्षा पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
भारत सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि वह घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए व्यापारिक उपायों का इस्तेमाल जारी रखेगी। ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा तेजी से बदल रही है, यह फैसला भारतीय एल्युमिनियम उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्रोत: वित्त मंत्रालय अधिसूचना (10 जून 2026), DGTR Sunset Review Notification, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, WTO Anti-Dumping Framework


