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Mutual Fund Return: क्या म्यूचुअल फंड सच में 12-15% रिटर्न देते हैं? SEBI के आंकड़ों ने खोली पोल

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/25 at 11:51 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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Mutual Fund Return: म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर अक्सर कहा जाता है कि लंबे समय में 12 से 15 फीसदी सालाना रिटर्न आसानी से मिल सकता है। SIP हो या Lumpsum Investment, सोशल मीडिया और निवेश से जुड़ी चर्चाओं में ऐसे आंकड़े खूब सुनने को मिलते हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड रिटर्न को लेकर एक बात समझना बेहद जरूरी है—12-15 फीसदी कोई गारंटीड रिटर्न नहीं है।

Contents
700 से ज्यादा स्कीमों ने दिया निगेटिव रिटर्न10% से ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीमें भी घटींतो क्या 12-15% रिटर्न की उम्मीद गलत है?SIP में भी रिटर्न की कोई गारंटी नहींLumpsum निवेश में भी यही नियम लागूम्यूचुअल फंड उद्योग में फिर भी बढ़ रहा भरोसाSIP में भी लगातार बढ़ रहा निवेशनिवेशकों को क्या समझना चाहिए?निष्कर्ष

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में बड़ी संख्या में म्यूचुअल फंड स्कीमों का प्रदर्शन कमजोर रहा। उपलब्ध आंकड़ों में 1,841 स्कीमों के प्रदर्शन को देखा गया, जिनमें 731 स्कीमों ने निगेटिव रिटर्न दिया। यानी करीब 40 फीसदी स्कीमें इस अवधि में नुकसान में रहीं।

दूसरी तरफ, 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीमों की संख्या सिर्फ 198 रही। इससे साफ है कि किसी भी एक साल में पूरे म्यूचुअल फंड बाजार से 12-15 फीसदी रिटर्न की उम्मीद करना सही तस्वीर नहीं दिखाता।

SEBI की आधिकारिक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री रिपोर्ट और आंकड़े उद्योग के आकार तथा स्कीमों के प्रदर्शन को ट्रैक करते हैं।

700 से ज्यादा स्कीमों ने दिया निगेटिव रिटर्न

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात निगेटिव रिटर्न देने वाली स्कीमों की संख्या है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 243 स्कीमें निगेटिव रिटर्न में थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 731 हो गई।

यानी एक साल के भीतर निगेटिव रिटर्न वाली स्कीमों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई। इसका मतलब यह नहीं है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करना खराब है। बल्कि यह बताता है कि म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार की परिस्थितियों और चुनी गई स्कीम पर निर्भर करता है।

इक्विटी फंड विशेष रूप से शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं। अगर बाजार में तेज गिरावट आती है, तो कई इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों के NAV पर भी दबाव पड़ सकता है।

10% से ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीमें भी घटीं

SEBI के आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2024-25 में 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न देने वाली 304 स्कीमें थीं। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 198 रह गई।

यानी एक साल में 10 फीसदी से अधिक रिटर्न देने वाली स्कीमों की संख्या में करीब 35 फीसदी की कमी आई।

वहीं, 10 फीसदी या उससे ज्यादा नुकसान वाली स्कीमों की संख्या 30 से बढ़कर 93 हो गई। यह आंकड़ा बताता है कि बाजार की परिस्थितियों का म्यूचुअल फंड प्रदर्शन पर कितना असर पड़ सकता है।

सालाना रिटर्न2024-252025-26
10% या अधिक नुकसान3093
-10% से -5%41146
-5% से 0%172492
0% से 5%218373
5% से 10%852539
10% से अधिक304198

तो क्या 12-15% रिटर्न की उम्मीद गलत है?

पूरी तरह गलत भी नहीं, लेकिन इसे गारंटी मानना बड़ी गलती हो सकती है।

म्यूचुअल फंड में रिटर्न कई चीजों पर निर्भर करता है। इसमें फंड की कैटेगरी, निवेश की अवधि, बाजार की स्थिति, पोर्टफोलियो में शामिल शेयर और फंड मैनेजर की रणनीति जैसी चीजें महत्वपूर्ण हैं।

उदाहरण के लिए, किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड ने पिछले 10 वर्षों में अच्छा प्रदर्शन किया है तो इसका यह मतलब नहीं है कि अगले 10 वर्षों में भी उसे हर साल 12-15 फीसदी रिटर्न ही मिलेगा।

इसी तरह, किसी एक साल में निगेटिव रिटर्न आने का मतलब यह भी नहीं है कि निवेश लंबे समय में नुकसान में ही रहेगा।

म्यूचुअल फंड में रिटर्न को साल-दर-साल देखने के बजाय निवेश की अवधि और संबंधित स्कीम के ऐतिहासिक प्रदर्शन को व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।

SIP में भी रिटर्न की कोई गारंटी नहीं

SIP यानी Systematic Investment Plan को अक्सर बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने का बेहतर तरीका माना जाता है, क्योंकि इसमें निवेश एकमुश्त करने के बजाय नियमित अंतराल पर किया जाता है।

लेकिन SIP का मतलब यह नहीं है कि निवेशक को हर साल 12 या 15 फीसदी रिटर्न मिलेगा।

SIP में बाजार गिरने पर उसी रकम से ज्यादा यूनिट खरीदी जा सकती हैं और बाजार बढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं। लंबे समय में यह निवेश की औसत लागत को संतुलित करने में मदद कर सकता है। फिर भी SIP भी बाजार से जुड़ा निवेश है और इसमें नुकसान की संभावना बनी रहती है।

इसलिए SIP को फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह निश्चित ब्याज देने वाला उत्पाद समझना सही नहीं होगा।

Lumpsum निवेश में भी यही नियम लागू

Lumpsum यानी एकमुश्त निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बाजार का समय और भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर कोई निवेशक बाजार के ऊंचे स्तर पर बड़ी रकम निवेश करता है और उसके बाद बाजार में गिरावट आती है, तो पोर्टफोलियो का मूल्य कम हो सकता है।

इसके विपरीत, लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर बाजार के अलग-अलग चक्रों का असर कम हो सकता है।

यही वजह है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी स्कीम ने पिछले साल कितना रिटर्न दिया। निवेशक को रिस्क, फंड कैटेगरी, निवेश अवधि, खर्च और पोर्टफोलियो जैसी चीजों पर भी ध्यान देना चाहिए।

म्यूचुअल फंड उद्योग में फिर भी बढ़ रहा भरोसा

दिलचस्प बात यह है कि कमजोर प्रदर्शन वाली स्कीमों की संख्या बढ़ने के बावजूद म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

SEBI के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2021 में म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल AUM करीब 31.43 लाख करोड़ रुपये था। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर करीब 85.59 लाख करोड़ रुपये हो गया।

यानी कुछ वर्षों में इंडस्ट्री के आकार में जबरदस्त विस्तार हुआ है। SEBI के आधिकारिक आंकड़े भी लगातार बढ़ते म्यूचुअल फंड फोलियो और AUM को दर्शाते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में यूनिक म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या भी बढ़कर करीब 6.1 करोड़ हो गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 5.4 करोड़ थी।

कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या भी बढ़कर करीब 27.4 करोड़ पहुंच गई।

SIP में भी लगातार बढ़ रहा निवेश

म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में SIP का बढ़ता चलन भी शामिल है।

वित्त वर्ष 2025-26 में योगदान करने वाले SIP खातों की संख्या 10.05 करोड़ से बढ़कर 10.45 करोड़ हो गई।

इसी दौरान औसत मासिक नेट SIP योगदान करीब 25.8 फीसदी बढ़कर 16,413 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले करीब 13,052 करोड़ रुपये था।

SIP AUM भी करीब 13.35 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 15.11 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इससे पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा निवेशक नियमित निवेश की रणनीति पर भरोसा बनाए हुए हैं।

निवेशकों को क्या समझना चाहिए?

SEBI के ये आंकड़े निवेशकों को डराने के लिए नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड निवेश की वास्तविकता समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

सबसे पहली बात यह है कि म्यूचुअल फंड में 12-15 फीसदी रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। किसी स्कीम का पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है।

दूसरी बात, केवल एक साल के रिटर्न के आधार पर किसी फंड को अच्छा या खराब मानना भी उचित नहीं है। खासकर इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की अवधि लंबी होने पर तस्वीर अलग हो सकती है।

तीसरी बात, निवेशक को अपनी जोखिम लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से फंड चुनना चाहिए। किसी दूसरे निवेशक को मिले शानदार रिटर्न को देखकर उसी स्कीम में बिना रिसर्च के पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है।

निष्कर्ष

म्यूचुअल फंड ने लंबे समय में कई निवेशकों को संपत्ति बनाने का मौका दिया है, लेकिन 12-15 फीसदी सालाना रिटर्न को निश्चित मान लेना सही नहीं है। SEBI के 2025-26 के आंकड़े दिखाते हैं कि एक ही अवधि में सैकड़ों स्कीमों ने निगेटिव रिटर्न दिया, जबकि 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीमों की संख्या 200 से भी कम रही।

इसलिए SIP हो या Lumpsum, निवेशकों को रिटर्न के आंकड़े के साथ जोखिम, निवेश अवधि और अपने वित्तीय लक्ष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में गिरावट आना निवेश का हिस्सा है और केवल एक कमजोर साल देखकर घबराकर निवेश बंद करना भी जरूरी नहीं है।

डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले संबंधित स्कीम के दस्तावेज और जोखिम कारकों को ध्यान से पढ़ें।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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