India Russia Trade: भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में करीब 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 60 अरब डॉलर पहुंच गया है। यानी महज पांच साल में दोनों देशों का व्यापार करीब चार गुना बढ़ा है। हालांकि, इस दौरान भारत और रूस के बीच व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ा है।
इसी बीच रूस ने भारत को भरोसा दिया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद ऊर्जा और उर्वरकों की सप्लाई में किसी तरह की बड़ी रुकावट नहीं आने दी जाएगी। रूस का यह आश्वासन भारत के लिए खास तौर पर अहम है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल और कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरकों की नियमित आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है।
पुतिन से मिले एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों रूस की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। सोमवार को मॉस्को में उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके शीर्ष सहयोगियों से मुलाकात की। जयशंकर ने रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की।
इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, विज्ञान, तकनीक और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 12-13 सितंबर को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन के नई दिल्ली आने की उम्मीद है। भारत और रूस इस दौरान अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दे सकते हैं।
रूस ने भारत को दिया सप्लाई का भरोसा
राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक में ऊर्जा और उर्वरकों की आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुख रहा। रूस ने भारत को आश्वासन दिया कि पश्चिम एशिया में पैदा हुई परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सप्लाई जारी रखी जाएगी।
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाई जा रही है।
भारत के लिए यह भरोसा महत्वपूर्ण है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच ऊर्जा और कृषि इनपुट की आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में रूस से नियमित सप्लाई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है।
5 साल में करीब चार गुना बढ़ा भारत-रूस व्यापार
भारत और रूस के आर्थिक रिश्तों में सबसे बड़ा बदलाव द्विपक्षीय व्यापार में देखने को मिला है। जयशंकर ने 27वीं IRIGC-TEC बैठक में बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार 2021-22 में करीब 13 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर हो गया।
इस तरह करीब पांच साल में भारत-रूस व्यापार लगभग चार गुना हो गया है।
इस तेज बढ़ोतरी में रूस से भारत को होने वाला ऊर्जा आयात महत्वपूर्ण रहा है। इसके अलावा उर्वरक और अन्य उत्पादों का व्यापार भी दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों का अहम हिस्सा है।
लेकिन बढ़ता व्यापार घाटा बड़ी चुनौती
व्यापार बढ़ने के साथ भारत के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन काफी बढ़ गया है।
जयशंकर के अनुसार, व्यापार घाटा करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। भारत के लिए इस असंतुलन को कम करना अब प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
भारत चाहता है कि रूस के साथ व्यापार में भारतीय निर्यात को भी बढ़ावा मिले, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार अधिक संतुलित हो सके।
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का साझा लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल रूस से आयात बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भारत से रूस को निर्यात भी बढ़ाना होगा।
इसके लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने तथा भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में नए अवसर खुल सकते हैं।
पेमेंट सिस्टम और व्यापार में आसानी पर जोर
जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस आर्थिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच दोनों देशों के लिए सुरक्षित और सुचारू भुगतान व्यवस्था पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें कारोबार के लिए सही वातावरण तैयार कर सकती हैं, लेकिन वास्तविक व्यापार, निवेश, इनोवेशन और रोजगार का निर्माण निजी क्षेत्र करता है।
इसलिए दोनों देशों के कारोबारियों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
ऊर्जा से आगे बढ़ रही साझेदारी
भारत और रूस के आर्थिक रिश्ते अब केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, तकनीक, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं और इससे नए आर्थिक अवसर भी पैदा हो रहे हैं। भारत अपनी सप्लाई चेन में जोखिम कम करने और विविधता लाने पर ध्यान दे रहा है।
ऐसे माहौल में रूस के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।
आगे क्या है भारत-रूस संबंधों की दिशा?
भारत और रूस के सामने आने वाले वर्षों में दो बड़ी प्राथमिकताएं हैं—पहली, ऊर्जा और उर्वरकों जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को स्थिर रखना और दूसरी, व्यापार असंतुलन को कम करते हुए भारतीय निर्यात बढ़ाना।
अगर दोनों देश बाजार पहुंच, भुगतान व्यवस्था और व्यापारिक बाधाओं से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में सफल रहते हैं, तो 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है।
पश्चिम एशिया संकट और बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच रूस का भारत को सप्लाई जारी रखने का भरोसा दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों का संकेत है। आने वाले महीनों में पुतिन की भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों से इस साझेदारी को और गति मिलने की उम्मीद है।


