Semiconductor Manufacturing Rules: भारत में सेमीकंडक्टर और ऑटोमोटिव पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अगले दो महीनों के भीतर जरूरी नियमों में बदलाव किए जाएंगे, ताकि कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने में किसी तरह की परेशानी न हो।
नई दिल्ली: भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़ी इंडस्ट्री को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने विदेशी और घरेलू कंपनियों की चिंताओं को दूर करने के लिए नियमों और मंजूरी की प्रक्रियाओं को आसान बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, अगले 60 दिनों में इस दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
गोयल ने टोक्यो में निक्केई एशिया के साथ बातचीत में बताया कि हाल ही में उन्होंने दो ऐसी कंपनियों से मुलाकात की, जो भारत में सेमीकंडक्टर और ऑटोमोटिव पार्ट्स का उत्पादन शुरू करने की इच्छुक हैं। कंपनियों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर चर्चा की गई और उन्हें समाधान का भरोसा दिया गया।
60 दिनों में बदलेंगे मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नियम
पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव करेगी। इसका उद्देश्य कंपनियों की जरूरतों के मुताबिक ऐसा कारोबारी माहौल तैयार करना है, जिससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में अनावश्यक अड़चनें कम हों।
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जो कंपनियां भारत में निवेश कर उत्पादन शुरू करना चाहती हैं, उन्हें नियमों और मंजूरी की जटिल प्रक्रिया के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।
यह कदम खास तौर पर सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव पार्ट्स और अन्य रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में भारत वैश्विक कंपनियों को चीन के विकल्प के तौर पर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
BIS के नियम और अप्रूवल प्रक्रिया होगी आसान
गोयल के मुताबिक, सरकार ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के मौजूदा फ्रेमवर्क को काफी आसान बनाया है। साथ ही, अलग-अलग मंजूरियों की प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर काम किया जा रहा है।
इसका फायदा उन सप्लायर्स को भी मिल सकता है जो मौजूदा नियमों के दायरे में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। सरकार का प्रयास है कि नियमों को इस तरह तैयार किया जाए कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ उनकी सप्लाई चेन को भी आसानी से काम करने का अवसर मिले।
सरकार का मानना है कि भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने के लिए सिर्फ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कंपोनेंट, उपकरण, सप्लायर और अन्य सहायक उद्योगों का मजबूत नेटवर्क भी जरूरी है।
सस्ते आयात से घरेलू कंपनियों को खतरा
पीयूष गोयल ने यह भी संकेत दिया कि सरकार घरेलू उद्योग को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने को लेकर सतर्क है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में कंपनियों की मांग दूसरे देशों से सामान के आयात को लेकर हो सकती है।
अगर किसी उत्पाद को बहुत कम कीमत पर भारतीय बाजार में उतारा जाता है, तो इससे घरेलू मैन्युफैक्चरर्स के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। ऐसी स्थिति को प्रिडेटरी प्राइसिंग के तौर पर देखा जा सकता है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ वह विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करे और दूसरी तरफ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के हितों की भी रक्षा करे।
‘प्लस वन’ डेस्टिनेशन तक सीमित नहीं रहना चाहता भारत
भारत को लंबे समय से वैश्विक कंपनियों के लिए ‘China Plus One’ रणनीति के तहत एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता रहा है। इस रणनीति में कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दूसरे देशों में भी मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार करती हैं।
हालांकि, पीयूष गोयल ने इस धारणा को खारिज किया कि भारत सिर्फ एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन के तौर पर अपनी भूमिका देख रहा है। सरकार का लक्ष्य भारत में ऐसा मजबूत औद्योगिक और तकनीकी इकोसिस्टम तैयार करना है, जो लंबे समय में वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके।
Semiconductor 2.0 को मिली मंजूरी
सरकार ने भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए Semicon 2.0 को भी मंजूरी दी है। यह पहल देश में सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पीयूष गोयल के मुताबिक, सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अगले डेढ़ साल में सेमीकंडक्टर और इससे जुड़ी इंडस्ट्री में करीब 50 अरब डॉलर के निवेश की योजना पर काम कर रही है।
इस निवेश से भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डिजाइन, कंपोनेंट और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आगे Semiconductor 3.0 की भी तैयारी
पीयूष गोयल ने कहा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की योजना को एक लंबे सफर के तौर पर देखा जा रहा है। Semicon 2.0 के बाद जरूरत के मुताबिक Semiconductor 3.0 की दिशा में भी आगे बढ़ा जाएगा।
सरकार का फोकस केवल चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और इससे जुड़े तकनीकी उद्योगों का पूरा इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
भारत के लिए क्यों अहम है सेमीकंडक्टर सेक्टर?
सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, कार, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की बुनियाद हैं। दुनिया में चिप की सप्लाई को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत इस सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है।
अगर अगले 60 दिनों में नियमों को आसान बनाने के साथ मंजूरी की प्रक्रिया में भी सुधार होता है, तो इससे भारत में निवेश करने की इच्छुक कंपनियों का भरोसा बढ़ सकता है। इससे देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की सरकार की कोशिशों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

