Gold Price Outlook: सोने की कीमतों में तेजी के पीछे इस समय कई बड़े वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। कमजोर अमेरिकी डॉलर, सरकारी कर्ज को लेकर बढ़ती चिंता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने गोल्ड को मजबूत सपोर्ट दिया है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि 2026 में सोने की कीमतें किस स्तर तक पहुंच सकती हैं।
Gold Price Today: 17 जुलाई के बाद से ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत में 17 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे सबसे अहम वजहों में से एक ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ (Debasement Trade) है। निवेशक बढ़ते सरकारी कर्ज, राजकोषीय घाटे और वैश्विक बाजार में बढ़ती लिक्विडिटी के संभावित असर से बचने के लिए सोने को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
क्या है ‘डिबेसमेंट ट्रेड’?
डिबेसमेंट ट्रेड का मतलब ऐसी रणनीति से है, जिसमें निवेशक मुद्रा की वैल्यू में संभावित गिरावट और बढ़ते सरकारी कर्ज के जोखिम से बचने के लिए सोना जैसे हार्ड एसेट में निवेश बढ़ाते हैं।
अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में बढ़ती गतिविधियां भी इस ट्रेंड को प्रभावित कर रही हैं। अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लिक्विडिटी सपोर्ट के लिए बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन बढ़ाए जाने से बाजार में नकदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है। वहीं बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने पर बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों, जैसे सोने की, निवेशकों के बीच आकर्षकता बढ़ जाती है।
अमेरिका में बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ रही है। अमेरिकी कर्ज के करीब 40 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचने के बीच बाजार की नजर सरकार की लंबी अवधि की फिस्कल पॉलिसी पर बनी हुई है।
भू-राजनीतिक तनाव से भी मिल रहा सोने को सपोर्ट
सोने की तेजी में जियोपॉलिटिकल रिस्क भी अहम भूमिका निभा रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और लगातार कई सत्रों में 93 डॉलर के आसपास या उससे ऊपर कारोबार ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक जोखिम को लेकर चिंता बढ़ाई है।
ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं, क्योंकि इसे लंबे समय से सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट माना जाता है।
कमजोर डॉलर ने भी बढ़ाई सोने की चमक
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी सोने की कीमतों के लिए एक और बड़ा सपोर्ट फैक्टर है। डॉलर इंडेक्स करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचने से दूसरी करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता और आकर्षक हो जाता है।
आमतौर पर डॉलर और सोने के बीच विपरीत संबंध देखा जाता है। डॉलर कमजोर होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ सकती है, जिससे इसकी कीमतों को सहारा मिलता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी सोने को अपने विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल कर रहे हैं। इसके पीछे रिजर्व को डायवर्सिफाई करना और वैश्विक आर्थिक व भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच पोर्टफोलियो को मजबूत बनाना प्रमुख वजहों में शामिल है।
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी ने सोने की लंबी अवधि की मांग को मजबूत किया है। ऊंची कीमतों के बावजूद फिजिकल गोल्ड की मांग बनी हुई है, जबकि निवेश से जुड़ी मांग में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
Gold ETF में भी लौटा निवेश
सोने से जुड़े ग्लोबल ETF में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। जुलाई में ग्लोबल गोल्ड ETF में करीब 3 अरब डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ। इससे लंबे समय से जारी आउटफ्लो का सिलसिला खत्म हुआ और यह संकेत मिला कि संस्थागत निवेशकों की नजर एक बार फिर सोने पर मजबूत हुई है।
अगस्त में भी निवेशकों का फोकस फिस्कल डेफिसिट, करेंसी की स्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार की अस्थिरता जैसे जोखिमों से बचाव पर बना हुआ है।
हालांकि, सोने में आगे भी तेजी की राह पूरी तरह एकतरफा नहीं मानी जा सकती। अमेरिकी डॉलर में तेज उछाल या बॉन्ड यील्ड में बड़ी बढ़ोतरी होने पर सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
2026 में कहां तक जा सकते हैं सोने के भाव?
सोने को लेकर कई प्रमुख ग्लोबल संस्थानों ने 2026 के लिए मजबूत अनुमान दिए हैं। अलग-अलग अनुमान इस बात का संकेत देते हैं कि बाजार में सोने को लेकर दीर्घकालिक तेजी की उम्मीद बनी हुई है।
| संस्था | 2026 के लिए अनुमान |
|---|---|
| J.P. Morgan | 6,000 डॉलर प्रति औंस |
| Goldman Sachs | 5,400 डॉलर प्रति औंस |
| Metals Focus | 5,000 डॉलर प्रति औंस |
| Deutsche Bank | 4,800 डॉलर प्रति औंस |
| HSBC | 4,750 डॉलर प्रति औंस |
| ING | 4,600 डॉलर प्रति औंस |
इन अनुमानों में सबसे ऊंचा लक्ष्य J.P. Morgan का 6,000 डॉलर प्रति औंस है, जबकि ING का अनुमान 4,600 डॉलर प्रति औंस है। इससे साफ है कि अलग-अलग संस्थानों के अनुमान में अंतर है और वास्तविक कीमतें अमेरिकी मौद्रिक नीति, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेंगी।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सोने में तेजी देखकर केवल कीमत बढ़ने की उम्मीद में एकमुश्त बड़ा निवेश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता के हिसाब से फैसला लेना चाहिए।
अगर वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में नरमी, डॉलर में कमजोरी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो सोने को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, डॉलर मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर सोने में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष: सोने की मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं, बल्कि कमजोर डॉलर, बढ़ता सरकारी कर्ज, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ETF में बढ़ता निवेश और भू-राजनीतिक अनिश्चितता जैसे कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। 2026 के लिए प्रमुख संस्थानों के अनुमान 4,600 से 6,000 डॉलर प्रति औंस तक हैं, लेकिन ये अनुमान निश्चित लक्ष्य नहीं हैं और बाजार की परिस्थितियों के साथ बदल सकते हैं।
डिस्क्लेमर: newsjagran.in पर प्रकाशित यह सामग्री केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए बाजार संबंधी अनुमान और विचार संबंधित विशेषज्ञों या संस्थानों के हैं। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें तथा प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह लें।


