TCS Share Price Today: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने पोर्शे की कंसल्टिंग कंपनी MHP में 100% हिस्सेदारी खरीदने का बड़ा फैसला किया है। करीब ₹3,573 करोड़ के इस अधिग्रहण के साथ पोर्शे ने TCS और MHP के साथ 5 साल के लिए लगभग ₹14,000 करोड़ का रणनीतिक समझौता भी किया है। इसके बावजूद मंगलवार को TCS के शेयर में गिरावट देखने को मिली। ब्रोकरेज कंपनियों ने डील के फायदे के साथ-साथ MHP के घटते रेवेन्यू और इंटीग्रेशन से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जताई है।
शुरुआती तेजी के बाद TCS के शेयर में गिरावट
25 अगस्त, मंगलवार को शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद TCS के शेयर में शुरुआती बढ़त के बाद दबाव देखने को मिला। कंपनी का शेयर NSE पर करीब 0.7% गिरकर ₹2,268 के आसपास कारोबार करता नजर आया।
TCS के लिए यह साल अब तक चुनौतीपूर्ण रहा है। 2026 में अब तक कंपनी के शेयर में करीब 29.2% की गिरावट आ चुकी है। ऐसे में पोर्शे के साथ हुई बड़ी डील से निवेशकों को उम्मीद जरूर है, लेकिन ब्रोकरेज हाउस इस अधिग्रहण के तत्काल वित्तीय प्रभाव को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
TCS-MHP डील में क्या है खास?
TCS ने जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता कंपनी पोर्शे की कंसल्टिंग सहायक कंपनी MHP Management- und IT-Beratung GmbH में 100% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह अधिग्रहण करीब 320 मिलियन यूरो यानी लगभग ₹3,573 करोड़ में हुआ है।
इस अधिग्रहण के अलावा पोर्शे ने TCS और MHP के साथ करीब 5 साल का रणनीतिक समझौता भी किया है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग ₹14,000 करोड़ बताई गई है।
इस डील से TCS को यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े कारोबार को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
फिर क्यों गिरा TCS का शेयर?
बड़ी डील के बावजूद शेयर में गिरावट की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की MHP के कारोबार और भविष्य की कमाई को लेकर चिंता मानी जा रही है।
MHP का रेवेन्यू 2024 में करीब 830 मिलियन यूरो था, जो 2025 में घटकर लगभग 742 मिलियन यूरो रह गया। यानी कंपनी के कारोबार में गिरावट आई है।
TCS के लिए चुनौती यह होगी कि वह MHP के मौजूदा कारोबार को स्थिर करने के साथ-साथ उसे अपने ग्लोबल ऑपरेशंस के साथ कितनी प्रभावी तरीके से इंटीग्रेट कर पाती है। इसी वजह से ब्रोकरेज कंपनियां इस डील को लंबी अवधि के लिहाज से सकारात्मक मानते हुए भी कुछ जोखिमों की ओर इशारा कर रही हैं।
Citi ने क्यों दी Sell रेटिंग?
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi ने TCS पर अपनी Sell रेटिंग बरकरार रखी है। Citi का टारगेट प्राइस ₹1,825 है, जो शेयर के मौजूदा स्तर से करीब 20% नीचे है।
Citi के मुताबिक MHP के रेवेन्यू में आई गिरावट चिंता का विषय है। ब्रोकरेज का मानना है कि कम होते कारोबार के बीच MHP का अधिग्रहण TCS के लिए एक ऐसी चुनौती हो सकती है, जिसे दूर करने में समय लगेगा।
यानी पोर्शे के साथ लंबी अवधि का कॉन्ट्रैक्ट TCS के लिए सकारात्मक है, लेकिन MHP की मौजूदा वित्तीय स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
HSBC की राय क्या है?
वहीं HSBC ने TCS के शेयर पर Hold रेटिंग बरकरार रखी है। HSBC का टारगेट प्राइस ₹2,350 है।
ब्रोकरेज के मुताबिक इस डील से TCS की यूरोपीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में पहुंच मजबूत होगी। हालांकि, कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) पर तुरंत कोई बड़ा सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
HSBC ने यह भी संकेत दिया है कि MHP और TCS के कारोबार का इंटीग्रेशन आसान नहीं होगा। दोनों कंपनियों के ऑपरेशंस और बिजनेस मॉडल में तालमेल बैठाना TCS मैनेजमेंट के लिए अहम चुनौती रहेगा।
क्या करती है MHP?
MHP एक ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग कंपनी है। कंपनी के पास 4,500 से ज्यादा कर्मचारी हैं और यह ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े कई क्षेत्रों में काम करती है।
MHP की प्रमुख विशेषज्ञताओं में:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी
- SAP
- मैन्युफैक्चरिंग डिजिटलाइजेशन
- ऑटोमोटिव कंसल्टिंग
शामिल हैं।
TCS के लिए यह अधिग्रहण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑटोमोबाइल कंपनियां तेजी से सॉफ्टवेयर, AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो रही हैं।
भारतीय IT सेक्टर के सामने भी बड़ी चुनौती
TCS का यह अधिग्रहण ऐसे समय हुआ है जब भारतीय IT कंपनियां वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च में सुस्ती और जेनेरेटिव AI से होने वाले बदलावों का सामना कर रही हैं।
कंपनियां अब पारंपरिक IT सर्विसेज के साथ AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा खर्च कर रही हैं। ऐसे माहौल में TCS के लिए MHP को अपने कारोबार में सफलतापूर्वक शामिल करना और उसके रेवेन्यू को दोबारा बढ़ाना काफी महत्वपूर्ण होगा।
लंबी अवधि में मिल सकता है फायदा, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं
पोर्शे के साथ 5 साल का रणनीतिक समझौता TCS के लिए लंबी अवधि में मजबूत रेवेन्यू विजिबिलिटी दे सकता है। यूरोप के ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर में MHP की मौजूदगी भी TCS के लिए नए अवसर खोल सकती है।
हालांकि, निवेशकों के सामने फिलहाल दो बड़े सवाल हैं—MHP के घटते रेवेन्यू को TCS कैसे संभालेगी और दोनों कंपनियों का इंटीग्रेशन कितनी तेजी से सफल होगा।
यही वजह है कि पोर्शे के साथ बड़ी डील के बावजूद बाजार ने TCS के शेयर पर तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाली तिमाहियों में यह अधिग्रहण TCS की ग्रोथ और कमाई में कितना योगदान देता है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता।


