American Dream: अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई करना लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए बेहतर करियर और भविष्य का रास्ता माना जाता रहा है। लेकिन अब इस ‘अमेरिकन ड्रीम’ को लेकर तस्वीर कुछ बदलती नजर आ रही है। अमेरिका के कॉलेजों में भारतीय छात्रों के अंडरग्रेजुएट आवेदन में 15% की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी संस्थानों में कुल अंडरग्रेजुएट आवेदन बढ़े हैं।
आवेदनों में यह कमी सिर्फ छात्रों की पसंद में बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि इमिग्रेशन पॉलिसी, स्टूडेंट वीजा नियमों और अमेरिका में पढ़ाई के बाद काम करने के विकल्पों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता भी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की गिरावट
अमेरिका में 1,100 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाली गैर-लाभकारी संस्था Common App के आंकड़ों के मुताबिक, 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए भारतीय छात्रों के अंडरग्रेजुएट आवेदनों में 15% की कमी आई है।
Common App के अनुसार, 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय अंडरग्रेजुएट आवेदनों में कुल मिलाकर करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई थी। संस्था ने इसे अपने रिकॉर्ड में अंतरराष्ट्रीय आवेदनों की सबसे बड़ी गिरावट बताया है। वहीं भारत से आने वाले आवेदनों में 15% की कमी खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े स्रोतों में शामिल है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक सत्र में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिकी संस्थानों में दाखिला लिया था।
वीजा नियमों में बदलाव से बढ़ी चिंता
भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच चिंता की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों में प्रस्तावित और लागू होने वाले बदलाव हैं।
अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी स्टूडेंट और एक्सचेंज विजिटर वीजा धारकों के लिए मौजूदा “Duration of Status” (D/S) व्यवस्था में बदलाव कर निश्चित अवधि वाला स्टे सिस्टम लागू करने की दिशा में बढ़ रहा है। यह बदलाव 15 सितंबर से प्रभावी होने वाला है।
मौजूदा व्यवस्था में F-1 छात्र सामान्य तौर पर अपने अधिकृत शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि तक अमेरिका में रह सकते हैं, बशर्ते वे वीजा की शर्तों का पालन करते रहें। नए सिस्टम में अमेरिका में प्रवेश करने वाले छात्रों को एक निश्चित “Admit Until Date” मिल सकती है।
इस बदलाव से छात्रों के लिए अपने इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो सकती है।
यूनिवर्सिटीज छात्रों को दे रही हैं अमेरिका लौटने की सलाह
नए नियमों को लेकर कई अमेरिकी यूनिवर्सिटीज अपने अंतरराष्ट्रीय छात्रों और स्कॉलर्स को एडवाइजरी जारी कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Harvard के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय ने F-1 और J-1 छात्रों तथा J-1 स्कॉलर्स को नए नियम लागू होने से पहले अमेरिका में रहने की सलाह दी है। इसकी वजह यह है कि नियम लागू होने के समय अमेरिका में मौजूद छात्रों और उसके बाद अमेरिका में प्रवेश करने वाले छात्रों पर अलग-अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं।
पीटीआई के अनुसार, कुछ अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों ने भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को यात्रा और अपने इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
Columbia University ने छात्रों को 8 सितंबर को कक्षाएं शुरू होने से पहले न्यूयॉर्क लौटने की सलाह दी है। यह सलाह 15 सितंबर से प्रस्तावित नए इमिग्रेशन नियमों की समयसीमा से जुड़ी बताई गई है।
15 सितंबर के बाद अमेरिका जाने वालों के लिए क्या बदलेगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, जो छात्र नए नियम लागू होने से पहले ही अमेरिका में मौजूद हैं, उनके I-94 रिकॉर्ड पर मौजूदा D/S (Duration of Status) व्यवस्था बनी रह सकती है।
इसके विपरीत, 15 सितंबर के बाद अमेरिका में प्रवेश करने वाले छात्रों को निश्चित अवधि के आधार पर रहने की अनुमति मिल सकती है। ऐसे में छात्रों को अपने कार्यक्रम की अवधि, स्टेटस और अमेरिका में रहने की वैधता को लेकर अधिक सावधानी बरतनी होगी।
यह बदलाव खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो पढ़ाई के दौरान या उसके बाद अमेरिका से बाहर यात्रा करने की योजना बना रहे हैं।
F-1 छात्रों का ग्रेस पीरियड भी चिंता का विषय
अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को मिलने वाला ग्रेस पीरियड भी चर्चा में है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत F-1 छात्रों को आम तौर पर पढ़ाई या अधिकृत गतिविधि खत्म होने के बाद 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है। वहीं J-1 छात्रों के लिए यह अवधि सामान्य तौर पर 30 दिन होती है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों में F-1 छात्रों के ग्रेस पीरियड को 60 दिन से घटाकर 30 दिन किए जाने का प्रावधान शामिल है। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को अमेरिका में अपने अगले कदम—जैसे नौकरी, आगे की पढ़ाई या देश छोड़ने—का फैसला अपेक्षाकृत कम समय में करना पड़ सकता है।
OPT को लेकर भी भारतीय छात्रों की चिंता
भारतीय छात्रों के लिए सिर्फ वीजा नियम ही चिंता का विषय नहीं हैं। अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने का मौका देने वाला Optional Practical Training (OPT) भी महत्वपूर्ण है।
OPT के जरिए पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्र अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में अमेरिका में काम का अनुभव हासिल कर सकते हैं। भारतीय छात्रों के लिए यह कार्यक्रम इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी डिग्री के बाद नौकरी का अनुभव उनके करियर और आगे के इमिग्रेशन विकल्पों को प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन विदेशी छात्रों द्वारा OPT के इस्तेमाल पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिकी शिक्षा की कुल लागत भारतीय छात्रों समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए काफी बढ़ सकती है।
हालांकि, ऐसे प्रस्तावों को लागू किए जाने से पहले उनकी अंतिम शर्तों और आधिकारिक स्थिति को देखना जरूरी होगा।
अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या घटने का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आवेदन में गिरावट का असर सिर्फ यूनिवर्सिटीज तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 2025-26 में अनुमानित 11.69 लाख से घटकर 2026-27 में करीब 10.57 लाख रह सकती है।
अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिकी यूनिवर्सिटीज की फीस के साथ-साथ आवास, भोजन, परिवहन और अन्य स्थानीय सेवाओं पर भी बड़ी रकम खर्च करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फॉल 2025-26 के दौरान अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने स्थानीय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया था। 2026-27 में यह योगदान घटकर लगभग 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
क्या भारतीय छात्रों का अमेरिका से मोहभंग हो रहा है?
भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की गिरावट को सीधे तौर पर अमेरिका से पूरी तरह मोहभंग कहना जल्दबाजी होगी। अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज अब भी भारतीय छात्रों के लिए आकर्षक हैं।
लेकिन आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि अमेरिकी शिक्षा चुनने से पहले छात्र अब सिर्फ यूनिवर्सिटी की रैंकिंग और करियर संभावनाओं पर ही विचार नहीं कर रहे हैं। वीजा नियम, इमिग्रेशन की अनिश्चितता, पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसर और संभावित अतिरिक्त लागत भी उनके फैसले को प्रभावित कर रहे हैं।
ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि नए इमिग्रेशन नियम और OPT से जुड़े प्रस्ताव भारतीय छात्रों की अमेरिका जाने की इच्छा पर कितना असर डालते हैं। फिलहाल, आवेदन में आई 15% की गिरावट इस बात का संकेत जरूर है कि भारतीय छात्रों के लिए ‘अमेरिकन ड्रीम’ अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सावधानी से लिया जाने वाला फैसला बन गया है।


