IPO Allotment: किसी आईपीओ के कई गुना सब्सक्राइब होने पर शेयर मिलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, सही तरीके से आवेदन करने, कट-ऑफ प्राइस चुनने, UPI मैंडेट समय पर अप्रूव करने और आवेदन की जानकारी जांचने जैसे कदम आपको तकनीकी गड़बड़ी से बचा सकते हैं।
IPO Allotment: आईपीओ में निवेश करने वाले ज्यादातर रिटेल निवेशकों की कोशिश होती है कि उन्हें कम से कम एक लॉट का अलॉटमेंट मिल जाए। लेकिन जब कोई इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हो जाता है, तो हर निवेशक को शेयर मिलना संभव नहीं होता। खासकर रिटेल कैटेगरी में जब वैध आवेदनों की संख्या उपलब्ध शेयरों से बहुत ज्यादा हो जाती है, तब अलॉटमेंट तय नियमों के आधार पर किया जाता है।
ऐसे में कोई ऐसा फॉर्मूला नहीं है, जो 100 फीसदी अलॉटमेंट की गारंटी दे सके। लेकिन कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी एप्लीकेशन को सही रख सकते हैं और उन गलतियों से बच सकते हैं, जिनकी वजह से आवेदन खारिज हो सकता है।
आइए जानते हैं आईपीओ में अलॉटमेंट के लिए आवेदन करते समय किन 7 बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. एक PAN से एक ही वैध आवेदन करें
आईपीओ में अलॉटमेंट पाने के लिए सबसे पहले आवेदन की वैधता पर ध्यान देना जरूरी है। एक ही PAN से कई आवेदन करने की कोशिश करना सही रणनीति नहीं है। अगर एक ही निवेशक की कई एप्लीकेशन नियमों के तहत डुप्लीकेट या मल्टीपल एप्लीकेशन मानी जाती हैं, तो आवेदन खारिज हो सकता है।
इसलिए यह सोचकर एक ही PAN से कई आवेदन न करें कि इससे शेयर मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। इससे फायदा होने के बजाय आवेदन रद्द होने का जोखिम बढ़ सकता है।
2. परिवार के दूसरे सदस्य अलग PAN से आवेदन कर सकते हैं
अगर परिवार में पति-पत्नी या अन्य पात्र सदस्य भी किसी IPO में निवेश करना चाहते हैं, तो वे अपने अलग PAN और अपने डीमैट अकाउंट से आवेदन कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, पति और पत्नी के पास अलग-अलग PAN, डीमैट और बैंक अकाउंट हैं, तो दोनों अपने-अपने नाम से आवेदन कर सकते हैं। इस तरह हर निवेशक का आवेदन स्वतंत्र होता है।
हालांकि, सिर्फ किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से आवेदन डालना ही पर्याप्त नहीं है। आवेदन से जुड़े PAN, डीमैट और बैंक विवरण सही होने चाहिए और संबंधित निवेशक की जानकारी के अनुरूप होने चाहिए।
3. ज्यादा लॉट के लिए आवेदन करना हमेशा ज्यादा फायदा नहीं देता
आईपीओ को लेकर एक आम धारणा है कि 1 लॉट के बजाय 5 या 10 लॉट के लिए आवेदन करने से शेयर मिलने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाएगी। ओवरसब्सक्राइब्ड रिटेल IPO में ऐसा जरूरी नहीं है।
जब रिटेल कैटेगरी में उपलब्ध शेयरों की तुलना में वैध आवेदन बहुत ज्यादा हो जाते हैं, तो अलॉटमेंट तय नियमों के अनुसार किया जाता है। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में निवेशकों को न्यूनतम लॉट देने के लिए लॉटरी जैसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसलिए केवल ज्यादा लॉट के लिए आवेदन करना अलॉटमेंट की गारंटी नहीं है। आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उस IPO में रिटेल कैटेगरी का सब्सक्रिप्शन कितना है और अलॉटमेंट किस आधार पर होने की संभावना है।
4. कट-ऑफ प्राइस का विकल्प समझदारी से चुनें
रिटेल निवेशकों के लिए कट-ऑफ प्राइस का विकल्प काफी महत्वपूर्ण है। कट-ऑफ चुनने का मतलब है कि निवेशक अंतिम रूप से तय होने वाले इश्यू प्राइस पर शेयर खरीदने के लिए तैयार है।
मान लीजिए किसी IPO का प्राइस बैंड ₹100 से ₹110 है और आपने ₹105 की बोली लगाई। अगर कंपनी का अंतिम इश्यू प्राइस ₹110 तय होता है, तो आपकी बोली उस अंतिम कीमत से कम होने के कारण अलॉटमेंट के लिए पात्र नहीं हो सकती।
कट-ऑफ विकल्प चुनने पर ऐसी स्थिति से बचने में मदद मिलती है। खासकर ऐसे IPO में जहां प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर बोली आने की संभावना हो, रिटेल निवेशकों को आवेदन करते समय इस विकल्प को समझकर इस्तेमाल करना चाहिए।
5. UPI मैंडेट समय पर अप्रूव करना न भूलें
IPO के लिए आवेदन करने के बाद काम खत्म नहीं हो जाता। अगर आपने UPI के जरिए आवेदन किया है, तो UPI मैंडेट को समय पर अप्रूव करना भी जरूरी है।
आवेदन करने के बाद आपके UPI ऐप पर मैंडेट रिक्वेस्ट आ सकती है। इसमें IPO के लिए जरूरी राशि ब्लॉक करने की अनुमति होती है। अगर निवेशक तय समय के भीतर मैंडेट स्वीकार नहीं करता या किसी वजह से मैंडेट फेल हो जाता है, तो आवेदन प्रभावित हो सकता है।
इसलिए IPO के लिए आवेदन करने के बाद अपने UPI ऐप, बैंक अकाउंट और संबंधित नोटिफिकेशन पर नजर रखें। आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय आवेदन और मैंडेट की स्थिति पहले ही जांच लेना बेहतर है।
6. आवेदन जमा करने से पहले सभी जानकारी जांच लें
आईपीओ आवेदन में छोटी-सी गलती भी परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए आवेदन सबमिट करने से पहले नाम, PAN, डीमैट अकाउंट और बैंक से जुड़ी जानकारी को ध्यान से जांचना चाहिए।
यह भी सुनिश्चित करें कि आवेदन में दिए गए विवरण सही हैं और संबंधित निवेशक के रिकॉर्ड से मेल खाते हैं। बैंक अकाउंट और UPI से जुड़ी जानकारी में भी किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए।
आवेदन करने के बाद बोली की स्थिति भी जांच लें। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आपकी एप्लीकेशन सही तरीके से दर्ज हुई है या नहीं।
7. सिर्फ GMP नहीं, रिटेल सब्सक्रिप्शन भी देखें
आईपीओ में आवेदन करने से पहले सिर्फ GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम देखकर फैसला करना सही तरीका नहीं है। GMP बाजार की अनौपचारिक धारणा को दिखा सकता है, लेकिन यह न तो लिस्टिंग गेन की गारंटी है और न ही शेयर अलॉटमेंट की।
अलॉटमेंट के नजरिए से रिटेल कैटेगरी का सब्सक्रिप्शन भी महत्वपूर्ण है। अगर किसी IPO में रिटेल कैटेगरी सिर्फ कुछ गुना सब्सक्राइब होती है, तो स्थिति अलग हो सकती है। वहीं, अगर रिटेल हिस्से में दर्जनों या सैकड़ों गुना आवेदन आ जाएं, तो अलॉटमेंट की संभावना काफी कम हो सकती है।
इसके अलावा कंपनी का कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज, वैल्यूएशन, IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल और भविष्य की संभावनाएं भी देखनी चाहिए।
एक आसान उदाहरण से समझें अलॉटमेंट का खेल
मान लीजिए किसी IPO में रिटेल निवेशकों के लिए 1 लाख लॉट उपलब्ध हैं। वहीं, पूरे इश्यू के दौरान 10 लाख वैध रिटेल आवेदन प्राप्त होते हैं।
ऐसी स्थिति में हर आवेदक को शेयर देना संभव नहीं होगा। अगर नियमों के अनुसार न्यूनतम लॉट के आधार पर अलॉटमेंट किया जाता है, तो बड़ी संख्या में निवेशकों के बीच चयन की प्रक्रिया करनी पड़ सकती है।
यानी आपका आवेदन पूरी तरह सही होने के बावजूद जरूरी नहीं कि आपको शेयर मिल ही जाएं। यही वजह है कि ओवरसब्सक्राइब्ड IPO में अलॉटमेंट को लेकर किसी शॉर्टकट या पक्के फॉर्मूले पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
क्या एक ही IPO में परिवार के कई लोग आवेदन करें?
अगर परिवार के अलग-अलग सदस्यों के पास अपने वैध PAN, डीमैट और बैंक अकाउंट हैं और वे खुद निवेश करना चाहते हैं, तो वे अपने-अपने नाम से आवेदन कर सकते हैं। इससे अलग-अलग निवेशकों के स्वतंत्र आवेदन होते हैं।
लेकिन किसी अन्य व्यक्ति की जानकारी का गलत इस्तेमाल करके आवेदन करना या एक ही निवेशक के कई आवेदन डालना सही तरीका नहीं है। हमेशा वैध और सही विवरण के साथ ही आवेदन करना चाहिए।
IPO Allotment के लिए इन बातों का रखें ध्यान
आईपीओ में शेयर अलॉटमेंट पाने का कोई गारंटीड तरीका नहीं है। खासकर जब इश्यू बहुत ज्यादा ओवरसब्सक्राइब हो जाए, तब अलॉटमेंट उपलब्ध शेयरों और वैध आवेदनों की संख्या के साथ-साथ लागू अलॉटमेंट नियमों पर निर्भर करता है।
फिर भी निवेशक इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- एक PAN से कई आवेदन करने से बचें।
- परिवार के पात्र सदस्य अपने अलग PAN और डीमैट अकाउंट से आवेदन कर सकते हैं।
- ज्यादा लॉट के लिए आवेदन को अलॉटमेंट की गारंटी न समझें।
- रिटेल निवेशक जरूरत के अनुसार कट-ऑफ प्राइस विकल्प पर विचार करें।
- UPI मैंडेट समय पर अप्रूव करें।
- आवेदन में PAN, बैंक और डीमैट से जुड़ी जानकारी दोबारा जांचें।
- IPO का रिटेल सब्सक्रिप्शन, कंपनी की वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन जरूर देखें।
- केवल GMP के आधार पर निवेश का फैसला न लें।
निष्कर्ष
IPO में अलॉटमेंट पाने के लिए सबसे जरूरी चीज सही और वैध आवेदन है। एक ही PAN से कई आवेदन करना, UPI मैंडेट को नजरअंदाज करना या आवेदन में गलत जानकारी भरना आपके अलॉटमेंट के मौके को प्रभावित कर सकता है।
वहीं, ओवरसब्सक्राइब्ड IPO में सही आवेदन करने के बाद भी शेयर मिलना तय नहीं होता। इसलिए निवेशकों को अलॉटमेंट पाने की कोशिश के साथ कंपनी के बिजनेस, वित्तीय प्रदर्शन और वैल्यूएशन का भी आकलन करना चाहिए। आखिरकार, IPO में सिर्फ शेयर मिलना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सही कंपनी में सही कीमत पर निवेश करना ज्यादा मायने रखता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी IPO में निवेश करने से पहले कंपनी के दस्तावेजों, जोखिमों और वित्तीय स्थिति का अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


