Crude Oil Price: वेस्ट एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बावजूद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.85% फिसलकर 93 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.6% गिरकर 85.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार की नजर अब अमेरिका की ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति और आगे उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर है।
ब्रेंट और WTI में आई गिरावट
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वेस्ट एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड में 1.85% की गिरावट दर्ज की गई और इसकी कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 1.6% कमजोर होकर 85.71 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।
बाजार में इस समय अमेरिका की आगे की रणनीति को लेकर भी सतर्कता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर ट्रेडर्स की नजर थी, जिसमें ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की योजना से जुड़े कदमों पर चर्चा होने की उम्मीद थी।
कई महीनों से ऊंचे स्तर पर बना हुआ है कच्चा तेल
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण पिछले कई महीनों से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। जनवरी से जून के बीच ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 87 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह औसत करीब 71 डॉलर प्रति बैरल था।
यानी एक साल के भीतर औसत कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। संघर्ष के दौरान अप्रैल के अंत में ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा है।
खाड़ी से तेल सप्लाई पर असर
वेस्ट एशिया में जारी सैन्य तनाव का असर सिर्फ तेल की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि सप्लाई और शिपिंग रूट पर भी पड़ा है। अरब की खाड़ी से कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही प्रभावित होने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
तेल की सप्लाई में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट की आशंका बाजार को कीमतों के प्रति संवेदनशील बनाए हुए है। हालांकि, सोमवार की गिरावट से संकेत मिलता है कि फिलहाल ट्रेडर्स भू-राजनीतिक जोखिम के साथ-साथ संभावित सप्लाई और डिमांड को भी ध्यान में रख रहे हैं।
इटली ने बढ़ाई डीजल टैक्स कटौती की अवधि
युद्ध के कारण बढ़े ईंधन खर्च का असर यूरोपीय देशों में भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इटली ने डीजल पर टैक्स में कटौती की अवधि को एक दिन और बढ़ाकर बुधवार तक कर दिया है।
इटली की सरकार का उद्देश्य युद्ध के कारण बढ़े ईंधन खर्च से आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत देना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाईवे डीजल और अनलेडेड पेट्रोल की कीमत क्रमशः 2.203 यूरो और 2.087 यूरो प्रति लीटर थी।
सऊदी अरब को बदलना पड़ा तेल निर्यात का रास्ता
वेस्ट एशिया के तनाव का असर सऊदी अरब के तेल निर्यात पर भी पड़ा है। यमन के हूथी विद्रोहियों की ओर से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को धमकी दिए जाने के बाद सऊदी अरब को अपने कुछ तेल कार्गो के रास्ते में बदलाव करना पड़ा।
कुछ कार्गो को सीधे लाल सागर के रास्ते भेजने के बजाय अफ्रीका के आसपास से या मिस्र के सिदी केरीर बंदरगाह के जरिए भेजा जा रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ रहा है और परिवहन लागत भी ज्यादा हो रही है।
इसका असर एशिया को होने वाले सऊदी तेल निर्यात पर पड़ा है। दूसरी तरफ यूरोपीय रिफाइनरों को अपेक्षाकृत आसानी से डिलीवरी मिलने का फायदा मिल रहा है।
ईरान में बड़ी गैस खोज का दावा
इसी बीच ईरान ने अपने दक्षिणी फार्स प्रांत में प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार मिलने की जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से अधिक प्राकृतिक गैस की खोज हुई है, जिसमें करीब 5.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस को निकाला जा सकने की संभावना बताई गई है।
ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद के मुताबिक, इस खोज से मिलने वाले कंडेनसेट का मूल्य अरबों डॉलर हो सकता है। हालांकि, मौजूदा प्रतिबंधों और युद्ध के कारण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के चलते इस गैस भंडार को विकसित करने में कई साल लग सकते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध का भी एनर्जी मार्केट पर असर
उधर, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर भी ऊर्जा बाजार पर बना हुआ है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने ब्लैक सी से अनाज की ढुलाई को लेकर रूस के सामने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन मॉस्को ने इसे ठुकरा दिया।
इस बीच दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खबरें आती रही हैं। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है।
आगे कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
कच्चे तेल की कीमतों की दिशा अब मुख्य रूप से वेस्ट एशिया में संघर्ष की स्थिति, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल सप्लाई रूट की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि तनाव बढ़ता है और प्रमुख शिपिंग रूट प्रभावित होते हैं, तो सप्लाई में कमी की आशंका कीमतों को फिर ऊपर ले जा सकती है।
वहीं, अगर सप्लाई सामान्य रहती है और बाजार में मांग को लेकर दबाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है। फिलहाल ट्रेडर्स भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ अमेरिका के अगले कदमों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
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