Onion Price Hike Kanda Express: देश में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई बड़े शहरों में प्याज का भाव राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर पहुंच गया है। कीमतों पर नियंत्रण रखने और महंगे शहरों में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाने का फैसला किया है। इस ट्रेन के जरिए दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों में प्याज की खेप पहुंचाई जाएगी।
प्याज की कीमतों में तेजी ऐसे समय में आई है, जब खाद्य महंगाई आम परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ा रही है। सरकार का मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करना है। इसके लिए नासिक से देश के उन प्रमुख शहरों तक सप्लाई बढ़ाई जाएगी, जहां प्याज राष्ट्रीय औसत से महंगा बिक रहा है।
आज से शुरू होगी ‘कांदा एक्सप्रेस’
प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार नासिक से कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्याज की सप्लाई बढ़ाने की तैयारी में है। महाराष्ट्र का नासिक देश के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां से प्याज की बड़ी खेप रेल के जरिए उन बाजारों तक भेजी जाएगी, जहां कीमतें ज्यादा हैं।
इस पहल का उद्देश्य सिर्फ प्याज को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि उन इलाकों में सप्लाई का दबाव बढ़ाना भी है, जहां खुदरा कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि बाजार में अतिरिक्त प्याज पहुंचने से कीमतों पर दबाव कम होगा।
कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बाजार में कम कीमत पर प्याज की उपलब्धता बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। सरकार को आशंका है कि कुछ कारोबारी सीमित सप्लाई का फायदा उठाकर प्याज की कीमतों में कृत्रिम तेजी ला सकते हैं।
ऐसे में सरकारी हस्तक्षेप के जरिए बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि आने वाले महीनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसानों और सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
अगर यह स्टॉक समय पर बाजार में पहुंचता है, तो सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है और प्याज की कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है।
देश में कितना महंगा हुआ प्याज?
प्याज की कीमतों में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। शनिवार को देश में प्याज का औसत भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 45 फीसदी अधिक है।
वहीं, पिछले एक महीने में प्याज की कीमत करीब 19 फीसदी बढ़ी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख शहरों में प्याज का खुदरा भाव राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक चल रहा है।
दिल्ली में प्याज 65 रुपये किलो
राजधानी दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में दिल्ली में प्याज लगभग 35 रुपये किलो बिक रहा था। यानी सालाना आधार पर कीमत में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
चेन्नई में भी बढ़ी कीमत
चेन्नई में प्याज का भाव करीब 58 रुपये प्रति किलो बताया गया है। पिछले साल इसी समय यहां प्याज लगभग 33 रुपये किलो था। दक्षिण भारत के कुछ अन्य बाजारों में भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
कोच्चि और गुवाहाटी में सप्लाई बढ़ाने पर जोर
केरल और असम के कुछ इलाकों में भी प्याज सामान्य से महंगा बिक रहा है। यही वजह है कि सरकार ने दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे बाजारों में सप्लाई बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।
महाराष्ट्र में कम हो सकता है प्याज का उत्पादन
प्याज की कीमतों में तेजी की एक वजह महाराष्ट्र में उत्पादन को लेकर जताई जा रही आशंका भी है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल महाराष्ट्र में प्याज का उत्पादन करीब 5 से 7 फीसदी घट सकता है।
हालांकि, कृषि मंत्रालय का अनुमान इससे अलग तस्वीर पेश करता है। मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल प्याज उत्पादन करीब 307 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के उत्पादन के लगभग बराबर है।
इसका मतलब है कि देश के कुल उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं है। हालांकि, महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्य में उत्पादन घटने से कुछ समय के लिए स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
सरकार के कदम से क्या होगा असर?
कांदा एक्सप्रेस के जरिए बड़े शहरों में प्याज की अतिरिक्त सप्लाई पहुंचने से बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है। सामान्य तौर पर जब किसी वस्तु की मांग के मुकाबले सप्लाई कम होती है तो उसकी कीमत बढ़ने लगती है। ऐसे में सरकार की कोशिश अतिरिक्त सप्लाई के जरिए इस दबाव को कम करने की है।
अगर नासिक से नियमित और पर्याप्त मात्रा में प्याज दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे बाजारों तक पहुंचता है, तो खुदरा कीमतों में नरमी आने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, प्याज की कीमतों पर मौसम, उत्पादन, मंडी आवक, भंडारण और परिवहन लागत जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए केवल अतिरिक्त सप्लाई से कीमतें कितनी और कितने समय में नीचे आएंगी, यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
आम लोगों को कब मिलेगी राहत?
सरकार की ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य उन शहरों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना है, जहां इसकी कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। अगर सरकारी स्टॉक और किसानों से उपलब्ध प्याज तेजी से बाजार में पहुंचता है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
फिलहाल सरकार की नजर प्याज की कीमतों और बाजार में इसकी उपलब्धता पर बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में उत्पादन, आवक और सप्लाई की स्थिति यह तय करेगी कि प्याज के दाम किस दिशा में जाते हैं।


