India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर सैद्धांतिक रूप से लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब समझौते के कानूनी और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है।
सर्जियो गोर ने शनिवार को आयोजित द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बात की। उन्होंने खास तौर पर उन खबरों के बीच स्थिति स्पष्ट की, जिनमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही जा रही है।
अमेरिकी राजदूत ने स्पष्ट किया कि 100 फीसदी टैरिफ वाला प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस की ओर से आगे बढ़ाया जा रहा बिल है, इसे सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या व्हाइट हाउस की मौजूदा टैरिफ नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में लगभग सब तय
सर्जियो गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक स्तर पर डील के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों पर काम पूरा हो चुका है।
अब कुछ टेक्स्ट और कानूनी भाषा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यही वजह है कि समझौते की औपचारिक घोषणा में थोड़ा समय लग सकता है।
गोर ने बताया कि अमेरिका समझौते के कुछ हिस्सों के टेक्स्ट को दोबारा व्यवस्थित कर रहा है। उनके मुताबिक, देरी का मुख्य कारण किसी बड़े नीतिगत मतभेद के बजाय कानूनी और तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देना है।
उन्होंने भारत-अमेरिका रिश्तों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
100% टैरिफ पर अमेरिकी दूत ने क्या कहा?
भारत के लिए सबसे अहम मुद्दों में से एक रूस से कच्चे तेल की खरीद और उस पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई है। अमेरिकी कांग्रेस में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है।
इस पर सर्जियो गोर ने कहा कि इस प्रस्ताव और राष्ट्रपति ट्रंप के रुख के बीच अंतर करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संबंधित बिल को अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन मिला है। हालांकि, इसे सीधे व्हाइट हाउस की ओर से पेश की गई नीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
गोर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बिल का भारत पर असर पड़ सकता है। यानी अगर भविष्य में यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है और भारत इसके दायरे में आता है, तो भारतीय कारोबार और ऊर्जा आयात पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप का रुख
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं और इस मुद्दे को लेकर उनका रुख गंभीर है।
गोर के मुताबिक, अमेरिका के लिए यह महत्वपूर्ण है कि किसी न किसी स्तर पर युद्ध समाप्त हो और दोनों पक्षों के बीच समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।
उन्होंने कहा कि लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच रूस-यूक्रेन संघर्ष का असर वैश्विक राजनीति और व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे में अमेरिका इस युद्ध को समाप्त करने को महत्वपूर्ण मानता है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता रहा है। अगर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भविष्य में अतिरिक्त टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इसका असर भारत के आयात बिल और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।
अक्टूबर में फिर भारत आएंगे मार्को रुबियो
भारत-अमेरिका रिश्तों की अहमियत का जिक्र करते हुए सर्जियो गोर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि रुबियो मई में भारत में कई दिनों तक रहे थे और अब अक्टूबर में एक बार फिर भारत आने वाले हैं। गोर ने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते उच्चस्तरीय संपर्क का संकेत बताया।
अमेरिका की ओर से शीर्ष अधिकारियों की लगातार भारत यात्राएं इस बात का संकेत देती हैं कि वॉशिंगटन भारत को अपनी रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण स्थान देता है।
भारत के लिए भी अमेरिका एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार है। ऐसे में ट्रेड डील के साथ-साथ रक्षा, टेक्नोलॉजी, निवेश, ऊर्जा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
ट्रंप और मोदी की दोस्ती का भी किया जिक्र
सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि दोनों नेता तेजी से फैसले लेने और कार्रवाई करने की प्रवृत्ति रखते हैं। गोर के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के मन में प्रधानमंत्री मोदी के लिए काफी सम्मान है।
अमेरिकी राजदूत ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब ट्रंप सत्ता से बाहर थे, तब दुनिया के कई नेताओं और लोगों ने उनकी आलोचना की थी। लेकिन भारत और प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा नहीं किया।
गोर ने संकेत दिया कि ट्रंप इस बात को याद रखते हैं और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी दोस्ती को विशेष महत्व देते हैं।
उनके मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच विश्वास ही इस रिश्ते की एक महत्वपूर्ण वजह है। यह व्यक्तिगत संबंध भारत-अमेरिका के व्यापक रणनीतिक रिश्तों को भी मजबूती देने में भूमिका निभा सकते हैं।
चीन और पाकिस्तान पर भी अमेरिका ने दिया संकेत
भारत-अमेरिका संबंधों के साथ चीन और पाकिस्तान से जुड़े सवाल पर भी सर्जियो गोर ने अमेरिका का रुख स्पष्ट किया।
जब उनसे अमेरिका-चीन संबंधों और भारत के पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने पड़ोसियों को चुन नहीं सकता।
उनका कहना था कि अमेरिका के दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध हैं और वास्तविकता यह है कि उसे मौजूद सरकारों के साथ काम करना पड़ता है।
इस बयान को भारत के संदर्भ में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि अमेरिका एक तरफ भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान और अन्य देशों के साथ भी अपने कूटनीतिक संबंध बनाए रखता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ट्रेड डील?
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने से दोनों देशों के कारोबार और निवेश संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर खुल सकते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
ट्रेड डील का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, कृषि और सर्विस सेक्टर शामिल हैं।
भारत लंबे समय से अपने निर्यात बाजारों को मजबूत करने और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापक व्यापार समझौता भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, अमेरिका भी चीन पर अपनी सप्लाई चेन निर्भरता कम करने के लिए भारत जैसे बड़े बाजार और मैन्युफैक्चरिंग हब के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है।
100% टैरिफ का मुद्दा अभी क्यों अहम है?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के लगभग अंतिम चरण में पहुंचने की खबर के बावजूद रूस से तेल खरीद पर संभावित 100 फीसदी टैरिफ का मुद्दा भारतीय पक्ष के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत के लिए रूस एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है। इसलिए अमेरिका की ओर से रूस से जुड़े व्यापार पर किसी भी तरह की अतिरिक्त कार्रवाई का सीधा या अप्रत्यक्ष असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि, सर्जियो गोर के बयान से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में चर्चा हो रहे प्रस्ताव को फिलहाल सीधे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसलिए इस मामले में आगे आने वाले विधायी और प्रशासनिक फैसलों पर नजर रखना जरूरी होगा।
आगे क्या होगा?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया कब पूरी होती है और दोनों सरकारें औपचारिक घोषणा कब करती हैं।
अमेरिकी राजदूत के बयान से संकेत मिलता है कि बातचीत अब शुरुआती चरण में नहीं, बल्कि अंतिम चरण में है। यदि बचे हुए कानूनी और तकनीकी मुद्दों पर सहमति जल्दी बनती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को औपचारिक रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
फिलहाल भारत के लिए दो बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं—पहली, अमेरिका के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप मिलना और दूसरी, रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी कांग्रेस के प्रस्ताव का भविष्य।
इन दोनों मुद्दों पर आने वाले फैसले भारत के निर्यात, आयात लागत, ऊर्जा बाजार और अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच पर असर डाल सकते हैं।


