भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर रही। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए, जबकि व्यापक बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
दिनभर के कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बढ़ती महंगाई की आशंका, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सावधानी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। हालांकि ऑटो सेक्टर ने बेहतर तिमाही नतीजों के दम पर कुछ मजबूती दिखाई।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी रही गिरावट?
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,391.39 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स 76,515.10 के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान 76,151.98 तक फिसल गया। दूसरी ओर, निफ्टी 23,904.80 पर खुला और दिन में 23,807.20 के निचले स्तर तक पहुंच गया।
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली
निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे—
- नेस्ले इंडिया
- श्रीराम फाइनेंस
- ग्रासिम
- बजाज फाइनेंस
- इंडिगो
- सिप्ला
- जेएसडब्ल्यू स्टील
- टाटा स्टील
- रिलायंस इंडस्ट्रीज
वहीं, बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयर रहे—
- एसबीआई लाइफ
- बजाज ऑटो
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M)
- टीसीएस
- टाटा कंज्यूमर
- आइशर मोटर्स
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव
गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी बिकवाली हावी रही।
- निफ्टी मिडकैप 100 करीब 1% टूटा।
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई।
इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी।
सेक्टरवार प्रदर्शन कैसा रहा?
लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे।
सबसे ज्यादा गिरने वाले सेक्टर
- निफ्टी रियल्टी : -1.8%
- निफ्टी ऑयल एंड गैस : -1%
- निफ्टी इंफ्रा : -1%
- निफ्टी पीएसयू बैंक : -1%
- निफ्टी एनर्जी : -1%
- निफ्टी मेटल : -0.7%
- निफ्टी फार्मा : -0.4%
- निफ्टी एफएमसीजी : -0.4%
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : -0.4%
बढ़त वाले सेक्टर
- निफ्टी ऑटो : +0.7%
- निफ्टी मीडिया : +0.22%
ऑटो कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने इस सेक्टर को बाजार की गिरावट से बचाए रखा।
एक दिन में निवेशकों के ₹3 लाख करोड़ डूबे
गुरुवार की गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 477 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह करीब 480 लाख करोड़ रुपये था।
इस तरह केवल एक दिन में निवेशकों की संपत्ति में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई।
चार दिनों में सेंसेक्स 1,760 अंक टूटा
यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा जब बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ।
पिछले चार कारोबारी दिनों में—
- सेंसेक्स करीब 1,760 अंक (2.3%) टूटा।
- निफ्टी लगभग 465 अंक (करीब 2%) गिरा।
इसी अवधि में निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट की वजह क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा गहरा गया है।
ऊंचे कच्चे तेल के दाम भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि इससे आयात बिल बढ़ता है, महंगाई पर दबाव आता है और कंपनियों की लागत भी बढ़ती है। इसके अलावा, निवेशकों को यह आशंका भी है कि प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं, जिससे उभरते बाजारों में निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
हालिया आर्थिक संकेतकों में थोक महंगाई (WPI) में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों में नरमी के संकेत भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
आगे बाजार की दिशा कैसी रह सकती है?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे मजबूत हैं और जिनका कारोबार स्थिर है, उनमें निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है।


