Nifty Outlook: घरेलू शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी हफ्तों से जारी गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब सोमवार, 7 सितंबर के कारोबार पर है। शुक्रवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद निफ्टी ने मामूली रिकवरी जरूर दिखाई, लेकिन इंडेक्स अभी भी 24,000 के अहम स्तर से नीचे है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निफ्टी सोमवार को 24,000 का स्तर पार कर पाएगा?
शुक्रवार को निफ्टी 24 अंक की बढ़त के साथ 23,897 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे सप्ताह के आधार पर इंडेक्स में करीब 1.15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह लगातार चौथा सप्ताह रहा जब निफ्टी लाल निशान में बंद हुआ। ऐसे में बाजार की मौजूदा दिशा को लेकर एक्सपर्ट्स अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
24,000-24,200 जोन सबसे अहम
HDFC Securities के विनय राजानी के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,000 से 24,200 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस जोन है। अगर इंडेक्स इस क्षेत्र के ऊपर मजबूती के साथ टिकने में कामयाब होता है, तो बाजार में शॉर्ट टर्म रिकवरी की उम्मीद बढ़ सकती है।
वहीं, 24,000-24,200 के जोन में बार-बार बिकवाली आने पर निफ्टी पर दबाव बना रह सकता है। नीचे की तरफ 23,800 एक महत्वपूर्ण स्तर है। इसके टूटने पर इंडेक्स के 23,600 तक फिसलने की आशंका बढ़ सकती है।
पूरे सप्ताह बाजार पर रही बिकवाली की पकड़
पिछला कारोबारी सप्ताह घरेलू बाजार के लिए काफी कमजोर रहा। सप्ताह की शुरुआत से ही ऊंचे स्तरों पर बिकवाली देखने को मिली। बीच सप्ताह में बाजार तेज गैप-डाउन के साथ खुला, जिसके बाद खरीदारों ने गिरावट को संभालने की कोशिश की।
हालांकि, ऊपरी स्तरों पर खरीदारी टिक नहीं पाई और बाजार में मुनाफावसूली फिर हावी हो गई। इसके चलते निफ्टी लगातार दबाव में रहा और सप्ताह के अंत तक इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई।
इन निफ्टी शेयरों में दिखी बड़ी हलचल
निफ्टी 50 के शेयरों में शुक्रवार को प्रदर्शन मिला-जुला रहा। SBI Life, Tata Steel और HDFC Life प्रमुख तेजी वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर HCL Tech, Bharti Airtel और Maruti पर दबाव देखने को मिला।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो Metals, Financial Services और Cement में मजबूती दिखाई दी। वहीं Realty, Healthcare और Chemicals से जुड़े शेयरों में कमजोरी रही।
ब्रॉडर मार्केट में भी कोई स्पष्ट तेजी नहीं रही। Nifty Midcap 100 में करीब 0.25 फीसदी की गिरावट आई, जबकि Nifty Smallcap 100 लगभग 0.22 फीसदी मजबूत रहा।
रुपये में भी आई मजबूती
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने पिछले सप्ताह बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के दौरान रुपया करीब 1 फीसदी मजबूत हुआ और शुक्रवार को लगभग 94.50 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि, बाजार के लिए रुपये की चाल के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। ऊंचा क्रूड आयात बिल रुपये और भारतीय शेयर बाजार दोनों पर दबाव डाल सकता है।
क्रूड और वेस्ट एशिया पर रहेगी नजर
आने वाले सप्ताह में ग्लोबल संकेत बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में नरमी से बाजार को कुछ राहत मिली है।
लेकिन दूसरी तरफ ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा वेस्ट एशिया में जारी तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
ऐसे में सोमवार को कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों, वेस्ट एशिया से जुड़ी खबरों, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर खास नजर रहेगी।
ये ग्लोबल आंकड़े भी तय करेंगे बाजार की दिशा
Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, आने वाले सप्ताह में कई महत्वपूर्ण ग्लोबल और घरेलू आंकड़े बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
इनमें अमेरिका का ISM Services PMI, ECB की पॉलिसी से जुड़े संकेत, OPEC की मंथली ऑयल मार्केट रिपोर्ट और भारत के फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़े शामिल हैं।
अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को दिशा मिल सकती है।
Angel One ने बताया अहम सपोर्ट
Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,750-23,600 का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है।
अगर निफ्टी इस जोन के नीचे डेली क्लोज देता है, तो कमजोरी बढ़ सकती है और इंडेक्स 23,450-23,400 के स्तर तक फिसल सकता है।
वहीं ऊपर की तरफ 24,000-24,050 शुरुआती रेजिस्टेंस है। इसके बाद 24,150-24,200 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा।
इसका मतलब है कि सोमवार के कारोबार में 24,000 के आसपास निफ्टी की चाल काफी अहम होगी। इस स्तर के ऊपर मजबूती बाजार में सेंटीमेंट सुधारने का संकेत दे सकती है।
50-EMA के नीचे कारोबार कर रहा निफ्टी
LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी अभी प्रति घंटे के चार्ट पर 50-EMA के नीचे कारोबार कर रहा है। इससे शॉर्ट टर्म ट्रेंड में कमजोरी का संकेत मिल रहा है।
उनका मानना है कि जब तक निफ्टी 24,000-24,200 के नीचे रहता है, तब तक तेजी पर बिकवाली की रणनीति प्रभावी रह सकती है।
नीचे की तरफ 23,830 और 23,700 तत्काल सपोर्ट के रूप में काम कर सकते हैं। इन स्तरों के टूटने पर बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
बैंकिंग इंडेक्स में भी नहीं दिख रही साफ दिशा
बैंकिंग इंडेक्स भी लंबे समय से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। करीब 24 कारोबारी सत्रों से इंडेक्स में कोई स्पष्ट ब्रेकआउट नहीं देखने को मिला है।
शुक्रवार को बैंकिंग इंडेक्स लगभग सपाट रहा और 0.02 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।
SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, 56,900-56,800 का जोन अहम सपोर्ट है। जब तक इंडेक्स इस स्तर के ऊपर बना रहता है, कंसोलिडेशन जारी रह सकता है।
ऊपर की तरफ 57,800-57,900 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन है। अगर बैंकिंग इंडेक्स 57,900 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देता है, तो इसमें तेजी की नई चाल देखने को मिल सकती है। वहीं 56,800 के नीचे गिरावट आने पर कंसोलिडेशन खत्म होकर कमजोरी बढ़ सकती है।
IPO बाजार में जारी रहेगी हलचल
जहां सेकेंडरी मार्केट में निवेशक सावधानी बरत रहे हैं, वहीं प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। अगले सप्ताह 11 मेनबोर्ड IPO बाजार में दस्तक देने की तैयारी में हैं।
इन कंपनियों के जरिए कुल मिलाकर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने की तैयारी है। इसके अलावा कई कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग भी अगले सप्ताह होने वाली है।
इस तरह 7 सितंबर से शुरू होने वाला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। एक तरफ निफ्टी के सामने 24,000 का अहम रेजिस्टेंस है, वहीं दूसरी ओर IPO बाजार में भी जबरदस्त गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
क्या 7 सितंबर को 24,000 छू पाएगा निफ्टी?
तकनीकी संकेतों को देखें तो निफ्टी के लिए सोमवार को 24,000 सबसे महत्वपूर्ण स्तर रहेगा। इसके ऊपर मजबूती के साथ टिकने पर 24,150-24,200 की तरफ बढ़ने की संभावना बन सकती है।
इसके विपरीत, अगर इंडेक्स 24,000 के आसपास फिर बिकवाली का सामना करता है और 23,800 के नीचे जाता है, तो बाजार में कमजोरी बढ़ सकती है। ऐसे में 23,600 अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है।
यानी सोमवार को निफ्टी की दिशा मुख्य रूप से 23,800 सपोर्ट और 24,000-24,200 रेजिस्टेंस जोन के बीच तय होती नजर आ सकती है। निवेशकों को ग्लोबल संकेतों और क्रूड की कीमतों पर भी नजर रखनी होगी।
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