Gold Import: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोने की खरीद में संयम बरतने और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील के बावजूद भारत में गोल्ड इंपोर्ट में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल से जुलाई के बीच देश का सोने का आयात सालभर पहले की समान अवधि की तुलना में 32% से अधिक बढ़कर 15.17 अरब डॉलर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है।
नई दिल्ली: भारत में सोने की मांग और आयात को लेकर एक बार फिर बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इसके बावजूद अप्रैल से जुलाई के बीच भारत के गोल्ड इंपोर्ट में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत ने करीब 15.17 अरब डॉलर का सोना आयात किया। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 32% से ज्यादा की वृद्धि है।
हालांकि, इस बढ़ोतरी का सबसे अहम पहलू UAE से होने वाला गोल्ड इंपोर्ट है। जून में UAE से भारत का सोने का आयात 175.2% बढ़कर 64.94 करोड़ डॉलर पहुंच गया। इसके उलट दुनिया के बाकी देशों से भारत का गोल्ड इंपोर्ट इसी महीने 17.7% घटकर 1.32 अरब डॉलर रह गया।
UAE से गोल्ड इंपोर्ट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों?
GTRI के मुताबिक, जून में UAE से भारत के गोल्ड इंपोर्ट में हुई तेज बढ़ोतरी ने कुल आंकड़ों को काफी प्रभावित किया। एक साल पहले जून में भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट में UAE की हिस्सेदारी करीब 12.8% थी, जो इस साल बढ़कर लगभग 33% हो गई।
आंकड़ों के अनुसार, UAE से भारत का आयात करीब 41.35 करोड़ डॉलर बढ़ा, जबकि बाकी देशों से आयात में करीब 28.41 करोड़ डॉलर की कमी आई। इससे साफ है कि गोल्ड ट्रेड में UAE का महत्व काफी तेजी से बढ़ा है।
अप्रैल-जून में भी UAE से आयात में जोरदार उछाल
सिर्फ जून ही नहीं, बल्कि अप्रैल से जून की पूरी तिमाही में भी UAE से भारत के गोल्ड इंपोर्ट में बड़ी तेजी रही। इस अवधि में UAE से सोने का आयात 124.8% बढ़कर 3.14 अरब डॉलर हो गया।
इसकी तुलना में बाकी दुनिया से भारत का गोल्ड इंपोर्ट करीब 29.3% बढ़ा। यानी UAE से आयात की रफ्तार बाकी देशों की तुलना में चार गुना से भी ज्यादा रही।
अप्रैल-जून तिमाही में भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट में करीब 3.53 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसमें अकेले UAE की हिस्सेदारी लगभग 1.74 अरब डॉलर रही।
सरकार ने बढ़ाई थी गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी
सोने के बढ़ते आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 13 मई को गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। इसके बावजूद अप्रैल-जून के दौरान भारत में गोल्ड बार का आयात तेजी से बढ़ा।
इस अवधि में करीब 11 अरब डॉलर के गोल्ड बार भारत में आयात किए गए, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा करीब 7.5 अरब डॉलर था। यानी गोल्ड बार के आयात में करीब 47.1% की वृद्धि हुई।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आयात शुल्क बढ़ाने के बाद भी गोल्ड बार की आवक में कमी के बजाय तेज बढ़ोतरी दिखाई दी।
क्या UAE से आयात के पीछे ड्यूटी का फायदा है?
ट्रेड सूत्रों के मुताबिक, UAE से जून में गोल्ड इंपोर्ट बढ़ने के पीछे ड्यूटी ड्रॉबैक से जुड़ी गतिविधियां भी एक वजह हो सकती हैं। बताया गया है कि कुछ कारोबारियों ने भारत से जूलरी UAE भेजी और वहां से उसे दोबारा गोल्ड बार के रूप में भारत में आयात किया।
इस तरह के ट्रेड स्ट्रक्चर से आयात शुल्क के अंतर का फायदा उठाने की संभावना बनती है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक स्थिति और व्यापारिक संरचना की जांच जरूरी है।
2022 की ट्रेड डील भी बनी अहम वजह
GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने UAE के साथ 2022 में हुई ट्रेड डील का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत UAE से गोल्ड इंपोर्ट पर मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी MFN ड्यूटी की तुलना में करीब 1 प्रतिशत कम शुल्क का प्रावधान है।
बुलियन ट्रेड में यह अंतर छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन अरबों डॉलर के कारोबार में 1 प्रतिशत का अंतर भी काफी बड़ा वित्तीय फायदा दे सकता है।
श्रीवास्तव के मुताबिक, सरकार को यह देखना चाहिए कि UAE से बढ़ता गोल्ड इंपोर्ट वास्तव में UAE-origin गोल्ड के कारण है या फिर दूसरे देशों से आने वाला सोना दुबई के रास्ते भारत पहुंच रहा है।
UAE के पास अपनी गोल्ड माइन नहीं, फिर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
GTRI ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि UAE खुद कोई बड़ा गोल्ड माइनिंग देश नहीं है। ऐसे में भारत को UAE से सोने के आयात में इतनी तेज वृद्धि के पीछे वास्तविक स्रोत की पड़ताल करनी चाहिए।
संभावना यह भी जताई गई है कि दूसरे देशों से आने वाला सोना UAE के ट्रेडिंग हब के जरिए भारत पहुंच रहा हो। ऐसे में केवल UAE को मूल स्रोत मानने के बजाय पूरे ट्रेड रूट और सोने के वास्तविक ऑरिजिन की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
महंगा सोना भी बढ़ा सकता है आयात का डॉलर मूल्य
गोल्ड इंपोर्ट के बढ़ते डॉलर मूल्य का एक कारण सोने की ऊंची कीमतें भी हो सकती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत ज्यादा होती है, तो समान मात्रा में सोना आयात करने पर भी कुल आयात बिल बढ़ जाता है।
यानी आयात मूल्य में 32% की वृद्धि का मतलब यह जरूरी नहीं है कि सोने की मात्रा भी उतनी ही बढ़ी हो। इसमें सोने की कीमत और आयात की मात्रा दोनों का योगदान हो सकता है।
GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने भी इस ओर इशारा करते हुए कहा कि हाई-वैल्यू और कम मार्जिन वाले बुलियन कारोबार में शुल्क में 1 प्रतिशत का अंतर भी काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
एक नजर में गोल्ड इंपोर्ट के बड़े आंकड़े
- 32% से ज्यादा: अप्रैल-जुलाई में भारत के गोल्ड इंपोर्ट में बढ़ोतरी।
- 15.17 अरब डॉलर: अप्रैल-जुलाई के दौरान कुल गोल्ड इंपोर्ट।
- 47.1%: अप्रैल-जून में गोल्ड बार के आयात में बढ़ोतरी।
- 175.2%: जून में UAE से गोल्ड इंपोर्ट में वृद्धि।
- 33%: जून में भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट में UAE की हिस्सेदारी।
- 12.8%: पिछले साल जून में UAE की हिस्सेदारी।
- 3.14 अरब डॉलर: अप्रैल-जून में UAE से भारत का गोल्ड इंपोर्ट।
- 124.8%: अप्रैल-जून में UAE से गोल्ड इंपोर्ट की वृद्धि।
- 15%: 13 मई के बाद गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी।
- 6%: इससे पहले लागू गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी।
आगे सरकार की नजर किस पर होगी?
सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब सरकार विदेशी मुद्रा के खर्च को नियंत्रित करने और गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने पर जोर दे रही है। ऐसे में UAE से गोल्ड इंपोर्ट में 175% से ज्यादा की छलांग नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है।
सरकार के सामने अब यह सवाल अहम होगा कि UAE से बढ़ा आयात वास्तविक मांग के कारण है, ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर है या फिर ट्रेड रूट और शुल्क में अंतर का फायदा उठाने वाली गतिविधियों की वजह से इसमें तेजी आई है।
अगर UAE के जरिए दूसरे देशों का सोना भारत पहुंच रहा है, तो केवल इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में गोल्ड के वास्तविक स्रोत, ट्रेड रूट और ड्यूटी बेनिफिट की निगरानी भी जरूरी हो सकती है।


