भारतीय शेयर बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी ब्रोकरेज फर्मों का नजरिया फिर से सकारात्मक होता दिख रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में आई गिरावट के बावजूद वैश्विक निवेश संस्थानों का मानना है कि भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। उनका कहना है कि मौजूदा कमजोरी अस्थायी है और आने वाले महीनों में बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।
बाजार की गिरावट अस्थायी, मजबूत है भारत की कहानी
विदेशी ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट साइक्लिकल (चक्रगत) कारणों से आई है, न कि स्ट्रक्चरल (संरचनात्मक) वजहों से। यानी अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।
ब्रोकरेज के अनुसार भारत की आर्थिक गतिविधियों में सुधार जारी है, ग्रोथ मोमेंटम मजबूत बना हुआ है और घरेलू मांग को लेकर पहले की तुलना में चिंताएं काफी कम हुई हैं। यही वजह है कि मध्यम अवधि में भारतीय बाजार को लेकर उसका भरोसा बरकरार है।
जून तिमाही में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद
विदेशी ब्रोकरेज जेफरीज का अनुमान है कि जून तिमाही में कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ पिछले 13 तिमाहियों की तुलना में सबसे बेहतर रह सकती है। इसके पीछे तेज आर्थिक गतिविधियां और ऊंची नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ को प्रमुख कारण बताया गया है।
ब्रोकरेज का मानना है कि ऑयल एंड गैस और मेटल सेक्टर को छोड़कर अधिकांश कंपनियों की अर्निंग्स में सालाना आधार पर करीब 12% की बढ़ोतरी हो सकती है।
वहीं फिलिप कैपिटल ने भी ऑयल एंड गैस सेक्टर को छोड़कर निफ्टी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ लगभग 15% रहने का अनुमान जताया है।
निवेशकों को लंबी अवधि पर फोकस रखने की सलाह
विदेशी ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि निवेशकों को केवल जून तिमाही के नतीजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आगे आने वाली तिमाहियों पर नजर रखनी चाहिए।
बाजार रणनीतिकारों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से निवेशकों का फोकस फिर से कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ और अर्निंग्स मोमेंटम पर शिफ्ट होगा। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत में मध्यम अवधि के निवेश पर सीमित प्रभाव पड़ेगा।
किन सेक्टरों में दिख सकती है बेहतर तेजी?
ज्यादातर विदेशी ब्रोकरेज फर्मों ने फाइनेंशियल सेक्टर को सबसे मजबूत दावेदार माना है। इसके पीछे बेहतर क्रेडिट ग्रोथ, मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर मांग जैसे कारण बताए गए हैं।
इसके अलावा निम्न सेक्टरों में भी बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है—
- फाइनेंशियल्स
- इंडस्ट्रियल्स
- कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी कंपनियां
- कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी
- इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित व्यवसाय
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि निवेश गतिविधियों में तेजी आने से इन सेक्टरों को अतिरिक्त फायदा मिलेगा, जबकि जेपी मॉर्गन ने कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी शेयरों को अपनी प्रमुख पसंद बताया है।
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा अर्निंग्स ग्रोथ की उम्मीद
फिलिप कैपिटल के अनुसार जून तिमाही में सबसे बेहतर अर्निंग्स ग्रोथ निम्न सेक्टरों में देखने को मिल सकती है—
- एनबीएफसी
- कंज्यूमर ड्यूरेबल्स
- डिफेंस
- ऑर्गेनाइज्ड रिटेल
हालांकि कुछ सेक्टरों पर दबाव बना रह सकता है, जिनमें शामिल हैं—
- ऑयल एंड गैस
- सीमेंट
- हेल्थकेयर
- मेटल्स
कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर
जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों का सीजन शुरू हो चुका है। आईटी दिग्गज टीसीएस ने 9 जुलाई को अपने नतीजे जारी कर दिए हैं, जबकि आने वाले दिनों में कई बड़ी कंपनियां भी अपने तिमाही परिणाम पेश करेंगी। इन नतीजों से बाजार की आगे की दिशा तय होने में अहम भूमिका रहेगी।
निष्कर्ष
विदेशी ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि मौजूदा बाजार कमजोरी से घबराने की जरूरत नहीं है। भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, बेहतर ग्रोथ आउटलुक और कॉर्पोरेट अर्निंग्स में संभावित सुधार के चलते मध्यम और लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजार फिर से मजबूती दिखा सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान देना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
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