नई दिल्ली: भारतीय पूंजी बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। पहली बार घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को कुल कस्टडी वाली संपत्ति (Assets Under Custody – AUC) के मामले में पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय निवेशकों की बढ़ती ताकत और घरेलू पूंजी के मजबूत होते प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में जहां विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगातार मुनाफावसूली और बिकवाली की, वहीं घरेलू निवेशकों ने व्यवस्थित निवेश योजनाओं (SIP) और म्यूचुअल फंड्स के जरिए लगातार निवेश जारी रखा। इसी का परिणाम है कि अब भारतीय बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
पहली बार म्यूचुअल फंड्स की AUC FIIs से ज्यादा
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के जून 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू म्यूचुअल फंड्स की कुल Assets Under Custody (AUC) बढ़कर 76.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है। इसमें इक्विटी, डेट और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शामिल हैं।
इसके मुकाबले विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की कुल कस्टडी वाली संपत्ति 76.22 लाख करोड़ रुपये रही। यानी पहली बार घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने मामूली लेकिन ऐतिहासिक बढ़त हासिल कर ली है।
इक्विटी में अभी भी FIIs आगे, लेकिन अंतर तेजी से घटा
अगर केवल शेयर बाजार यानी शुद्ध इक्विटी निवेश की बात करें तो विदेशी निवेशक अभी भी आगे हैं, लेकिन उनकी बढ़त तेजी से कम हो रही है।
- सितंबर 2024 में FIIs की इक्विटी होल्डिंग 78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर थी।
- जून 2026 तक यह घटकर 68.65 लाख करोड़ रुपये रह गई, यानी करीब 12% की गिरावट।
- दूसरी ओर, घरेलू म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी संपत्ति 44.20 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 54.50 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो लगभग 23.3% की वृद्धि है।
यह आंकड़े बताते हैं कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और इक्विटी बाजार में भी वे विदेशी निवेशकों के बराबर पहुंचने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
मार्केट शेयर में भी घरेलू निवेशकों की मजबूत पकड़
PRIME Database के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक भारतीय शेयर बाजार में घरेलू म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 11.46% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह लगातार 11वीं तिमाही है जब उनकी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वहीं, विदेशी निवेशकों का मार्केट शेयर घटकर 16.13% रह गया, जो पिछले 14 वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
दोनों के बीच का अंतर अब केवल 4.67% रह गया है, जबकि दिसंबर 2023 में यही अंतर 9.34% था। मार्च 2015 में यह अंतर 17.14% तक पहुंच गया था।
डेट मार्केट में घरेलू फंड्स का दबदबा
फिक्स्ड इनकम यानी डेट मार्केट में घरेलू म्यूचुअल फंड्स की स्थिति और भी मजबूत दिखाई दे रही है।
- घरेलू म्यूचुअल फंड्स की डेट एसेट्स 16.98 लाख करोड़ रुपये हैं।
- जबकि विदेशी निवेशकों की डेट होल्डिंग केवल 6.82 लाख करोड़ रुपये है।
यानी डेट मार्केट में घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इससे साफ है कि भारत का डेट बाजार अब मुख्य रूप से घरेलू पूंजी पर आधारित हो चुका है।
क्या है इस बदलाव का मतलब?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय बाजार की परिपक्वता को दर्शाता है। पहले बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों के निवेश और निकासी पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब घरेलू म्यूचुअल फंड्स और खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है।
SIP के जरिए हर महीने आने वाला नियमित निवेश, निवेशकों में बढ़ती वित्तीय जागरूकता और म्यूचुअल फंड्स की लोकप्रियता ने भारतीय पूंजी बाजार की तस्वीर बदल दी है। आने वाले वर्षों में यदि यही रुझान जारी रहता है तो घरेलू संस्थागत निवेशकों का प्रभाव और भी मजबूत होने की संभावना है।


